नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ी एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. अब पीएफ का पैसा निकालने, ट्रांसफर कराने या पुरानी नौकरी की सर्विस को मर्ज कराने के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. सरकार एक ऐसा नया इंतजाम करने जा रही है, जिससे ये सारे काम बेहद आसान और तेज हो जाएंगे.
अब तक अक्सर देखने को मिलता था कि फॉर्म में छोटी सी गलती, KYC की समस्या या जानकारी की कमी की वजह से पीएफ क्लेम अटक जाते थे या रिजेक्ट हो जाते थे. लेकिन सरकार के नए कदम के बाद इन दिक्कतों से छुटकारा मिलने की उम्मीद है.
EPFO के लिए भी आएंगे ‘लाइसेंसधारी एजेंट’
केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने महसूस किया है कि ऑनलाइन सुविधाएं होने के बावजूद, बड़ी संख्या में कर्मचारी अभी भी EPFO से जुड़े काम खुद नहीं कर पाते. इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार इनकम टैक्स और जीएसटी की तर्ज पर EPFO के लिए भी लाइसेंसधारी एजेंट नियुक्त करने की तैयारी कर रही है.
इन एजेंट्स को ‘सुविधाप्रदाता’ या सर्विस एजेंट कहा जाएगा. ये एजेंट पीएफ निकासी, अकाउंट ट्रांसफर, सर्विस मर्ज और अन्य प्रक्रियाओं में खाताधारकों की मदद करेंगे. इससे लोगों को न तो तकनीकी झंझट झेलनी पड़ेगी और न ही गलतियों की वजह से क्लेम रिजेक्ट होने का डर रहेगा.
फरवरी में लग सकती है अंतिम मुहर
इस प्रस्ताव को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया से मंजूरी मिल चुकी है. अब इसे EPFO के न्यासी बोर्ड की अगली बैठक में रखा जाएगा, जो फरवरी में होने की संभावना है. माना जा रहा है कि इसी बैठक में इस योजना पर अंतिम मुहर लग सकती है.
एक बार योजना लागू होने के बाद कर्मचारी ठीक उसी तरह एजेंट की मदद ले सकेंगे, जैसे आज टैक्स भरने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स एक्सपर्ट की सहायता लेते हैं.
कैसे चुने जाएंगे ये एजेंट?
सरकार ने इस बात का खास ध्यान रखा है कि इन एजेंट्स की विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठे. कोई भी व्यक्ति सीधे एजेंट नहीं बन पाएगा. इसके लिए पहले चयन प्रक्रिया होगी, फिर EPFO के नियमों और प्रक्रियाओं की पूरी ट्रेनिंग दी जाएगी.
ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ही उन्हें आधिकारिक लाइसेंस दिया जाएगा. बिना लाइसेंस के कोई भी व्यक्ति EPFO से जुड़े काम नहीं कर सकेगा. इससे खाताधारकों का डेटा सुरक्षित रहेगा और धोखाधड़ी की आशंका भी कम होगी.
कितना देना होगा शुल्क?
इन एजेंट्स को EPFO की तरफ से सैलरी नहीं दी जाएगी. सरकार सेवाओं के हिसाब से एक मामूली सुविधा शुल्क तय करेगी. खाताधारक अपनी जरूरत के मुताबिक एजेंट की मदद ले सकेंगे और तय शुल्क देकर बिना किसी भागदौड़ के अपना काम पूरा करवा सकेंगे.
यह सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी जो ऑनलाइन सिस्टम से सहज नहीं हैं, बुजुर्ग कर्मचारी हैं या जिनके पास EPFO दफ्तर जाने का समय नहीं होता.
EPFO 2.0 की तरफ बड़ा कदम
सरकार EPFO को पूरी तरह डिजिटल और तेज बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. लाइसेंसधारी एजेंटों की नियुक्ति इसी योजना का हिस्सा है, जिसे EPFO 2.0 कहा जा रहा है.
इसके साथ ही तकनीकी स्तर पर भी बड़े बदलाव किए जा रहे हैं ताकि PF से जुड़ी सेवाएं आम लोगों के लिए और आसान बन सकें.
मार्च तक UPI से PF निकालने की सुविधा
श्रम मंत्री मनसुख मांडविया पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि मार्च तक EPFO खातों को UPI से जोड़ दिया जाएगा. इसका मतलब यह होगा कि खाताधारक अपने पीएफ अकाउंट से सीधे UPI के जरिए पैसा निकाल सकेंगे.
भविष्य में सरकार की योजना PF निकासी के लिए ATM सुविधा शुरू करने की भी है, ताकि जरूरत पड़ने पर लोग तुरंत अपने पैसे तक पहुंच बना सकें.
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