दिल्ली में अब 11 की जगह होंगे 13 राजस्व जिले, LG ने नए ढांचे को दी मंजूरी, आम जनता को होंगे ये फायदे

दिल्ली सरकार ने राजधानी के प्रशासनिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए 13 राजस्व जिलों की व्यवस्था लागू कर दी है. इस फैसले से न केवल राजस्व जिलों बल्कि नगर निगम के जोन की सीमाएं भी एक जैसी हो गई हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में आने वाली बड़ी बाधाओं को दूर किया गया है.

Delhi undergoes administrative makeover with 13 revenue districts and uniform boundaries
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नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राजधानी के प्रशासनिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए 13 राजस्व जिलों की व्यवस्था लागू कर दी है. इस फैसले से न केवल राजस्व जिलों बल्कि नगर निगम के जोन की सीमाएं भी एक जैसी हो गई हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में आने वाली बड़ी बाधाओं को दूर किया गया है. सरकार का कहना है कि यह कदम शासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनता के करीब लाने में मदद करेगा.

राजस्व जिलों और नगर निगम की सीमाओं का तालमेल

अब तक, दिल्ली में राजस्व जिलों और नगर निगम जोन की सीमाओं में असमानता थी, जिससे अधिकारियों और नागरिकों को दिक्कतें होती थीं. इन अलग-अलग सीमाओं के कारण अधिकार क्षेत्र को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती थी. अब इन सीमाओं को एक जैसा कर दिया गया है, जिससे न केवल दफ्तरों के चक्कर कम होंगे, बल्कि काम में भी तेजी आएगी. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि यह समस्या दशकों से लंबित थी, जिसे उनकी सरकार ने सिर्फ 10 महीनों में हल कर दिया है.

जुलाई में किया गया था ऐलान, दिसंबर में मिली मंजूरी

इस बदलाव का ऐलान जून 2025 में किया गया था, जब भाजपा सरकार ने 11 नगर निगम जोन की जगह 13 नए राजस्व जिलों की स्थापना की घोषणा की थी. इसके बाद लगातार इस प्रस्ताव पर काम चलता रहा और 11 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी दी. उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की सहमति के बाद इस फैसले के बारे में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है.

हर जिले में बनेगा मिनी सचिवालय

नई व्यवस्था के तहत, सरकार हर जिले में मिनी सचिवालय स्थापित करने की योजना बना रही है. इन मिनी सचिवालयों में सरकारी सेवाओं की उपलब्धता एक ही स्थान पर होगी. इसका उद्देश्य नागरिकों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर से राहत देना और सेवा वितरण प्रक्रिया को तेज़ करना है. इस कदम से दिल्ली के नागरिकों को सरकारी कार्यों में आसानी होगी, और समय की बचत होगी.

बजट और प्रशासनिक सुधार

नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 25 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है. इस निवेश से प्रशासनिक सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है, जो सीधे तौर पर जनता को लाभ पहुंचाएगा. इससे सरकारी कामकाज की गति बढ़ेगी और नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी.

एसडीएम की संख्या में वृद्धि और कार्य का विभाजन

राजस्व जिलों की संख्या बढ़ने के साथ, उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) की संख्या में भी इजाफा किया गया है. अब एसडीएम की संख्या 33 से बढ़कर 39 हो गई है. नई व्यवस्था में दिल्ली के प्रमुख जिलों, जैसे नई दिल्ली, मध्य दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में चार-चार एसडीएम तैनात किए जाएंगे. वहीं, बाकी जिलों में तीन-तीन एसडीएम काम करेंगे. यह व्यवस्था काम के बंटवारे को स्पष्ट करेगी और प्रशासन को और अधिक चुस्त बनाएगी.

आम जनता को मिलेंगे ये लाभ

इस प्रशासनिक बदलाव से दिल्ली के नागरिकों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे. सबसे पहले, सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और प्रशासन आम जनता के और करीब होगा. साथ ही, अधिकारियों पर कार्यभार का दबाव संतुलित रहेगा, जिससे काम में आसानी होगी. इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि नागरिकों को अपनी शिकायतों का जल्दी समाधान मिलेगा और प्रशासनिक सीमाओं को लेकर कोई भ्रम नहीं होगा. राजस्व विभाग, नगर निगम और अन्य सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से शहरी योजनाएं, आपदा प्रबंधन और भूमि रिकॉर्ड का प्रबंधन अधिक प्रभावी बनेगा.

13 जिले और उनके एसडीएम कार्यालय
 

  • दक्षिणी पूर्वी - जंगपुरा, कालकाजी, बदरपुर
  • पुरानी दिल्ली - सदर बाजार एवं चांदनी चौक
  • उत्तरी - बुराड़ी, आदर्शनगर, बादली
  • नई दिल्ली - दिल्ली कैंट एवं नई दिल्ली
  • मध्य जिला - पटेल नगर एवं करोलबाग
  • मध्य उत्तरी - शकूर बस्ती, शालीमारबाग एवं मॉडल टाउन
  • दक्षिणी पश्चिमी - नजफगढ़, मटियाला, द्वारका एवं बिजवासन
  • बाहरी उत्तरी - मुंडका, नरेला, बवाना
  • उत्तरी पश्चिमी - किराड़ी, नांगलोई जाट एवं रोहिणी
  • उत्तरी पूर्वी - करावल नगर, गोकलपुरी, यमुना विहार एवं शाहदरा
  • पूर्वी जिला - गांधीनगर, विश्वास नगर एवं पटपड़गंज
  • दक्षिणी - छतरपुर, मालवीय नगर, देवली एवं मेहरौली
  • पश्चिमी - विकासपुरी, जनकपुरी एवं राजौरी गार्डन

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