दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में हाल ही में एक बड़े एनकाउंटर में बिहार के चार मोस्ट वांटेड अपराधी मारे गए, जिनमें सबसे प्रमुख नाम रंजन पाठक का था. यह एनकाउंटर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा अंजाम दिया गया, जिसने इन अपराधियों के खिलाफ लंबी पूछताछ और सटीक जानकारी के बाद कार्रवाई की. इन चारों अपराधियों के खिलाफ हत्या, लूट, रंगदारी और आपराधिक वारदातों के कई मामले दर्ज थे. खास बात यह है कि ये सभी बिहार के सीमावर्ती इलाके से ताल्लुक रखते थे और उनके अपराधों का दायरा नेपाल तक फैला हुआ था.
22 और 23 अक्टूबर की मध्य रात्रि लगभग 2:20 बजे दिल्ली के रोहिणी इलाके में बहादुर शाह मार्ग के पास डॉक्टर अंबेडकर चौक और पंसाली चौक के बीच पुलिस को एक सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध अपराधी इलाके में घूम रहे हैं. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस की विशेष टीम ने तुरंत कार्रवाई की. जब पुलिस ने अपराधियों को रोकने का प्रयास किया, तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में चारों अपराधी मारे गए. उन्हें तुरंत रोहिणी स्थित डॉ. बीएसए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
रंजन पाठक कौन था?
रंजन पाठक बिहार के सीतामढ़ी जिले के सुरसंड थाना क्षेत्र के मलहई गांव का रहने वाला था. वह लगभग 25 वर्ष का था और लंबे समय से पुलिस की नजर में था. उस पर 25,000 रुपये का इनाम था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया था. रंजन 'सिग्मा गैंग' का सरगना माना जाता था, जो बिहार के सीमावर्ती जिलों सीतामढ़ी, शिवहर और मधुबनी में सक्रिय था.
रंजन और उसका गिरोह कई गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त था. इस गैंग ने हत्या, लूटपाट, रंगदारी और तस्करी जैसी वारदातों को अंजाम दिया था. इसके अलावा, यह गैंग नेपाल की सीमा के पार भी अपने आपराधिक नेटवर्क का विस्तार करता था, जहां से वे योजना बनाकर बिहार में वारदात को अंजाम देते और फिर नेपाल भाग जाते थे.
सिग्मा गैंग क्या है?
सिग्मा गैंग बिहार का एक कुख्यात अपराधी गिरोह था, जो पिछले कई वर्षों से बिहार से नेपाल तक अपनी सक्रियता बनाए हुए था. इस गिरोह ने आपराधिक गतिविधियों जैसे कि तस्करी, रंगदारी, सुपारी किलिंग और फिरौती मांगने की घटनाओं को अंजाम दिया.
यह गिरोह अपनी गतिविधियों के लिए जाना जाता था कि वे नेपाल में छुप जाते थे, जिससे उनके पकड़ में आने की संभावना कम हो जाती थी. सिग्मा गैंग ने सीतामढ़ी जिले में कई बड़ी हत्याओं को अंजाम दिया था, जिनमें ब्रह्मर्षि सेना के पूर्व जिलाध्यक्ष गणेश शर्मा की हत्या विशेष रूप से उल्लेखनीय है. इसके अलावा, मदन कुशवाहा और आदित्य सिंह की हत्या में भी इस गैंग के सदस्यों का नाम सामने आया था.
मारे गए अन्य अपराधी कौन थे?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, एनकाउंटर में मारे गए चारों अपराधी निम्नलिखित हैं:
ये सभी अपराधी कई हत्या, अपहरण, लूट और रंगदारी जैसे मामलों में वांछित थे और लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर थे.
पुलिस ने क्या जानकारी दी?
बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि इन अपराधियों के पास से AK-47 जैसी भारी हथियार और अन्य घातक हथियार बरामद हुए हैं. यह हथियार उनकी अपराधी गतिविधियों को अंजाम देने में काम आते थे. पुलिस के मुताबिक, यह गैंग बिहार के साथ-साथ नेपाल में भी सक्रिय था और कई आपराधिक वारदातों को अंजाम दे चुका था.
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कहा कि उन्हें बिहार पुलिस से सूचना मिली थी कि ये अपराधी दिल्ली में फर्जी पहचान के साथ छुपे हुए हैं और किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं. इसी के चलते उन्होंने अभियान चलाया और इस एनकाउंटर को अंजाम दिया गया.
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