Delhi: कड़ाके की ठंड में बेघरों के लिए बने रैन बसेरे की क्या है जमीनी हकीकत? पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट

Delhi Night Shelters: लोगों का कहना है कि सरकार ने टेंट बनाकर दे दिया है लेकिन सुविधाएं ना के बराबर है.

Delhi: कड़ाके की ठंड में बेघरों के लिए बने रैन बसेरे की क्या है जमीनी हकीकत? पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट

नई दिल्ली, भारत24 डिजिटल डेस्क: दिल्ली में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. नए साल पर जहां लोग जश्न मनाते दिखे वहीं रैन बसेरा में ठहरे अप्रवासी ठंड से दो चार करते दिखे. भारत 24 की टीम ने केजरीवाल सरकार द्वारा स्थापित किए गए रैन बसेरों की स्थिति का जायजा लिया. एम्स, अंसारी नगर, सफदरजंग में बने रैन बसेरे (Delhi Night Shelters) लोगों के लिए उपयुक्त नहीं साबित हो रहे हैं.  लोगों का कहना है कि सरकार ने टेंट बनाकर दे दिया है लेकिन सुविधाएं ना के बराबर है.

सरकार नहीं दे रही सुविधाएं

लोगों को कहीं खाना मिल रहा है तो कहीं उनको खुद भोजन बनाना पड़ रहा है. रैन बसेरों में प्रकाश की सुविधा भी नहीं है. बिहार से आए और अंगीठी पर भोजन बनाते एक महिला और युवक ने अपनी आप बीती बताई और कहां कि उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है. रैन बसेरों के पास पानी और टॉयलेट की सुविधा भी बेहतर नहीं है. ऐसे में लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. पानी की बोतल तक खरीदनी पड़ रही है. दूसरी तरफ टॉयलेट भी टूटे फूटे नजर आए जिससे की गंदगी का अंबार आस पास देखने को मिल रहा है. 

 कंपकंपाती ठंड में जाएं तो जाएं कहां?

रैन बसेरों में लाइट नहीं होने से भी लोगों को दो चार होना पड़ रहा है. किसी तरह ये लोग आस पास की दुकानों पर अपनी इमरजेंसी लाइट चार्ज कर काम चला रहे हैं. इन लोगों का कहना है कि  खाने के लिए भोजन जरूर मिल रहा है लेकिन क्वालिटी बहुत खराब है. परिजन बीमार हैं इसलिए उनको इस स्थिति में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है.  वहीं, दिल्ली में रैन बसेरों में जगह में भी कमी हो गई है और ऐसे में लोगों को अंडरपास में भी सहारा लेना पड़ रहा है. घर से लाए चद्दर और कंबल ही उनका सहारा बन रहे हैं. सफदरजंग के अंडरपास में रह रहे लोगों को समझ नहीं आ रहा है की वो इस कंपकंपाती ठंड में जाएं तो जाएं कहां ?

रिपोर्ट- अक्षय