सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD का बुलडोजर एक्शन, बगल की जर्जर इमारत गिराने का काम शुरू

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए इमारत हादसे के बाद नगर निगम ने राजधानी में अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है.

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दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए इमारत हादसे के बाद नगर निगम ने राजधानी में अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. MCD ने हादसे के बाद बगल की इमारत को भी गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. निगम आयुक्त संजीव खिरवार के मुताबिक, इस भवन को अगले एक-दो दिन में ध्वस्त किया जा सकता है. बीते दो दिनों में अलग-अलग इलाकों में 24 अवैध निर्माण गिराए गए, जबकि सात संपत्तियों को सील किया गया है. इसके अलावा 35 संपत्तियों को कारण बताओ नोटिस और छह को सीलिंग संबंधी नोटिस जारी किए गए हैं.

अवैध निर्माण पर कार्रवाई

नगर निगम ने 27 अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश भी जारी किए हैं. इसी के साथ हादसे के बाद राजधानी में संचालित PG की सुरक्षा स्थिति की जांच के लिए सर्वे शुरू किया गया है. पहले दिन MCD की टीम ने 1,120 PG का निरीक्षण किया, जहां करीब 20,431 छात्र रह रहे हैं. इनमें से 52 PG की हालत खराब या चिंताजनक पाई गई, जबकि बाकी जगहों की स्थिति फिलहाल संतोषजनक मिली. निगम का कहना है कि शुरुआती चरण में सिर्फ इमारतों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है.

खस्ताहाल PG को लेकर निगम ने अपनाया सतर्क रुख

MCD फिलहाल खराब स्थिति वाले PG संचालकों को मरम्मत कराने की सलाह दे रहा है. अगर कोई इमारत बेहद जर्जर या खतरनाक स्थिति में मिलती है तो उसे खाली कराने का फैसला लिया जा सकता है. हालांकि, निगम छात्रों को अचानक आवासीय संकट में डालने से बचना चाहता है, क्योंकि खाली कराए गए PG के छात्रों को सरकारी PG में स्थानांतरित करने की फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है. अधिकारियों का मानना है कि बड़े पैमाने पर PG खाली कराने से किराए में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका सीधा असर छात्रों पर पड़ेगा.

सिविल लाइंस में सबसे ज्यादा PG

सर्वे के दौरान सबसे ज्यादा 450 PG सिविल लाइंस जोन में मिले हैं. इस क्षेत्र में मुखर्जी नगर जैसे इलाके भी शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र रहते हैं. इसके अलावा मुनिरका, लक्ष्मी नगर, विश्वास नगर, राजेंद्र नगर और करोल बाग में भी PG की जानकारी जुटाई गई है. अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल इमारत की सामान्य स्थिति देखी जा रही है. ढांचागत सुरक्षा और अग्निशमन विभाग से जुड़े अनापत्ति प्रमाण पत्र की जांच के लिए अलग से सर्वे किया जाएगा.

सामने आईं कई खामियां

निरीक्षण के दौरान कई PG में छात्रों के रहने की व्यवस्था भी चिंताजनक मिली. कुछ जगह छोटे-छोटे कमरों में दो से तीन छात्र रह रहे थे. मुखर्जी नगर, करोल बाग और ओल्ड राजेंद्र नगर में ऐसी स्थिति कई स्थानों पर देखने को मिली. कुछ इमारतों के प्रवेश द्वार पर गंदगी, मकड़ी के जाले और सीढ़ियों के नीचे कूड़ा मिला. कई जगह पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने का खतरा भी नजर आया. वहीं, प्रवेश द्वार पर बिजली के मीटर लगे होने और दीवारों का प्लास्टर उखड़ने जैसी खामियां भी मिलीं, जो आपात स्थिति में जोखिम बढ़ा सकती हैं.

रसोई की हालत भी खराब

कई PG की रसोई में भी साफ-सफाई की स्थिति खराब मिली और खाद्य सामग्री अस्वच्छ तरीके से रखी हुई पाई गई. निरीक्षण में कुछ इमारतों को खतरनाक श्रेणी में चिह्नित किया गया है. नगर निगम के उपायुक्त अज़हरुद्दीन काजी ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अवैध रूप से संचालित PG को सील करने और खतरनाक इमारतों को खाली कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. MCD का यह अभियान सत्य निकेतन हादसे के बाद राजधानी में इमारतों और PG की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता के बीच अहम माना जा रहा है.

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