नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई तेज, 1 महीने में 175 स्मारक ढहाए गए; CRPF प्रमुख ने बताया बड़ा अभियान

Naxali Operation: देश में नक्सलवाद के खिलाफ अब निर्णायक लड़ाई अपने अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही है. सुरक्षाबलों ने न सिर्फ नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज किया है, बल्कि अब उनकी विचारधारा को भी जड़ से खत्म करने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं.

Decisive action against Naxalites intensified 175 monuments were demolished in 1 month CRPF chief
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Naxali Operation: देश में नक्सलवाद के खिलाफ अब निर्णायक लड़ाई अपने अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही है. सुरक्षाबलों ने न सिर्फ नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज किया है, बल्कि अब उनकी विचारधारा को भी जड़ से खत्म करने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं. लगातार चल रहे अभियान में एनकाउंटर और सरेंडर के साथ-साथ अब नक्सलियों से जुड़े प्रतीकों और स्मारकों को भी निशाना बनाया जा रहा है, ताकि उनके प्रभाव को पूरी तरह समाप्त किया जा सके.

आठ फरवरी 2026 को रायपुर में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी. इस बैठक में गृह मंत्री ने नक्सल प्रभावित इलाकों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि नक्सलियों द्वारा बनाए गए स्मारक उनकी विचारधारा को जिंदा रखने का काम करते हैं और नए लोगों को इस रास्ते पर लाने का माध्यम बनते हैं. इसी वजह से इन स्मारकों को पूरी तरह खत्म करने का सख्त निर्देश दिया गया.

स्मारकों पर चला बड़ा अभियान

इस निर्देश के बाद सुरक्षाबलों ने देशभर में बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया. सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह ने जानकारी दी कि पिछले एक महीने के भीतर 175 से अधिक नक्सली स्मारकों को जमींदोज कर दिया गया है. ये स्मारक अलग-अलग नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बने हुए थे और स्थानीय स्तर पर नक्सली प्रभाव बनाए रखने का काम कर रहे थे. अब इन प्रतीकों को हटाकर उस प्रभाव को खत्म करने की कोशिश की जा रही है.

अगले कुछ दिनों में पूरा होगा मिशन

अभियान अभी भी जारी है और इसे पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, अगले 15 से 20 दिनों के भीतर बाकी बचे सभी स्मारकों को भी गिरा दिया जाएगा. इसके साथ ही हथियारों की बरामदगी का काम भी तेज कर दिया गया है. सुरक्षाबलों को निर्देश दिए गए हैं कि नक्सलियों के छिपे हुए हथियारों को खोजकर जब्त किया जाए, ताकि उनकी ताकत पूरी तरह कमजोर हो सके.

कोबरा बटालियन ने निभाई अहम भूमिका

इस पूरे अभियान में कोबरा बटालियन की भूमिका बेहद अहम रही है. कठिन और खतरनाक इलाकों में काम करते हुए इस विशेष इकाई के जवान लगातार मोर्चे पर डटे हुए हैं. उनके साहस और रणनीति की सराहना की गई है. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में भी इस बटालियन की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी.

नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ते कदम

सरकार और सुरक्षाबलों की रणनीति अब सिर्फ नक्सलियों को खत्म करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी जड़ों और विचारधारा को भी समाप्त करने पर केंद्रित है. स्मारकों को हटाना, हथियारों की जब्ती और लगातार अभियान चलाना इस दिशा में उठाए गए बड़े कदम हैं. साफ है कि अब नक्सलवाद को किसी भी कीमत पर दोबारा पनपने नहीं दिया जाएगा और देश को इस समस्या से पूरी तरह मुक्त करने की कोशिश अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है.

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