Dalai Lama Successor: तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने अपने उत्तराधिकारी को लेकर जारी अटकलों पर विराम लगाते हुए साफ शब्दों में कहा है कि वे अभी लंबा जीवन जीने वाले हैं और उनका उद्देश्य आगे भी मानवता की सेवा करना है. 90वें जन्मदिन से पहले धर्मशाला के मैक्लोडगंज स्थित मुख्य मंदिर में आयोजित दीर्घायु प्रार्थना समारोह के दौरान उन्होंने यह संदेश दिया.
अवलोकितेश्वर का आशीर्वाद मेरे साथ है
प्रार्थना सभा को संबोधित करते हुए दलाई लामा ने कहा, “कई भविष्यवाणियां इस ओर इशारा करती हैं कि मेरे जीवन पर अवलोकितेश्वर की विशेष कृपा है. मैं अभी 30-40 साल और जीवित रहकर लोगों की सेवा करना चाहता हूं." उन्होंने अपने निर्वासित जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि भले ही तिब्बत उनका देश उनसे छिन गया हो, लेकिन भारत में वे लाखों लोगों के लिए आध्यात्मिक पथप्रदर्शक बने हुए हैं.
पुनर्जन्म पर निर्णय लेने का अधिकार सिर्फ गादेन फोडरंग ट्रस्ट को
पुनर्जन्म को लेकर चल रही बहस के बीच दलाई लामा ने यह स्पष्ट किया कि उनके उत्तराधिकारी की पहचान का अधिकार सिर्फ गादेन फोडरंग ट्रस्ट को है. उन्होंने दोहराया कि यह परंपरा एक आध्यात्मिक प्रकिया है, न कि राजनीतिक. यह बयान ऐसे समय आया है जब चीन, दलाई लामा की नियुक्ति प्रक्रिया पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा है.
चीन की दखलअंदाजी पर निर्वासित सरकार का विरोध
तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख पेन्पा त्सेरिंग ने चीन की इस कोशिश पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, “पुनर्जन्म किसी भी तरह से राजनीतिक प्रक्रिया नहीं है. यह पूरी तरह आध्यात्मिक विषय है, जिसे केवल एक सिद्ध गुरु ही तय कर सकता है, न कि कोई सरकार. चीन की तरफ से हाल ही में यह बयान आया था कि भविष्य में जो भी दलाई लामा होगा, उसे बीजिंग की मंजूरी मिलना अनिवार्य होगा. इसपर वैश्विक स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है कि क्या धर्म और परंपरा पर राजनीतिक नियंत्रण थोपने की कोशिश हो रही है.
मानवता की सेवा का संकल्प बरकरार
दलाई लामा ने अपने संदेश के अंत में कहा कि चाहे देश से दूर हों, लेकिन उनका उद्देश्य अभी भी सभी प्राणियों को लाभ पहुंचाना है. उन्होंने कहा, “मैं यहां धर्मशाला में रहते हुए भी जितना संभव हो सके, जीवों की भलाई के लिए काम करता रहूंगा.”
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