OMG! एक ऐसा गाना, जिसे सुनकर 100 से ज्यादा लोगों ने कर लिया था सुसाइड, 62 साल के लिए लगाना पड़ा था बैन

क्या आपने कभी सुना है कि कोई गाना किसी की जान ले सकता है? कुछ गाने हमसे प्यार, खुशी, और भावनाओं से जुड़ी यादों को जोड़ते हैं, लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई गाना इतना मनहूस हो कि उसके कारण सैकड़ों लोग अपनी जान दे दें?

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क्या आपने कभी सुना है कि कोई गाना किसी की जान ले सकता है? कुछ गाने हमसे प्यार, खुशी, और भावनाओं से जुड़ी यादों को जोड़ते हैं, लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई गाना इतना मनहूस हो कि उसके कारण सैकड़ों लोग अपनी जान दे दें? ऐसा एक गाना है जिसे “Gloomy Sunday” कहा जाता है, और इसे दुनिया का सबसे मनहूस गाना माना जाता है. इस गाने को सुनने के बाद 100 से ज्यादा लोग आत्महत्या कर चुके थे, जिसके चलते इस गाने पर 62 साल के लिए बैन लगा दिया गया था. जानिए इस दर्दनाक गाने की असली कहानी.

"Gloomy Sunday" का उत्पत्ति और पहला सुसाइड

यह गाना 1933 में रेज्सो सेरेस और लैजलो द्वारा लिखा गया था. दो साल बाद, 1935 में जब यह गाना रिलीज हुआ, तो किसी ने इसे सुनकर आत्महत्या कर ली. उस व्यक्ति ने अपने सुसाइड नोट में इस गाने का उल्लेख किया था, जो गाने की भूतिया प्रभाव को दर्शाता है. यह गाना इस हद तक खतरनाक माना गया कि इसके कंपोजर की मंगेतर ने भी जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी. गाने में ऐसा दर्द था कि इसे सुनने वाला हर व्यक्ति अपने अंदर का दुख और दर्द महसूस करता था, जिससे वह मानसिक रूप से और भी परेशान हो जाता था.

दर्द से भरा गाना जिसने दुनिया को झकझोर दिया

“Gloomy Sunday” में एक प्रेम कहानी का दुख भरा दृश्य था, जिसमें बिछड़ने का दर्द और अकेलेपन की भावना थी. इस गाने में इतनी तीव्र भावनाएँ थीं कि जब लोग इसे सुनते, तो उनका दिल भर आता था और वे खुद को टूटता हुआ महसूस करते थे. गाने की गहरी निराशा और अवसाद ने कई लोगों को अपनी जिंदगी खत्म करने का रास्ता दिखाया. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, गाने को सुनने के बाद दो लोगों ने गोली मारी और एक महिला ने नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली. ऐसे हादसों ने इस गाने को और भी खतरनाक बना दिया.

गाने पर 62 साल का बैन

इस गाने के प्रभाव को देखते हुए, कई देशों में इसे बैन कर दिया गया. 1941 में गाने पर पहली बार बैन लगा दिया गया था, क्योंकि गाने के कारण होने वाली आत्महत्याओं की संख्या बढ़ती जा रही थी. इसे इतना डरावना माना गया कि कुछ जगहों पर इसे सार्वजनिक रूप से सुनने की मनाही कर दी गई. गाने पर इतना प्रभाव था कि इसके संगीत को पुनः तैयार करने की कोशिश की गई, लेकिन फिर भी आत्महत्या करने का सिलसिला रुक नहीं पाया.

रेज्सो सेरेस का खुद का दुखद अंत

इस गाने के लेखक रेज्सो सेरेस का खुद का जीवन भी दुखों से भरा था. 1968 में रेज्सो सेरेस ने भी आत्महत्या कर ली. यह गाना और इसके आसपास के हादसे इतने दुखद थे कि उन्होंने भी जीवन के दर्द को सहन नहीं किया. गाने की पॉपुलैरिटी इतनी अधिक हो गई थी कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक मानसिक और भावनात्मक संकट बन गया था. कई सालों तक इस गाने ने दुनिया में दुःख और दुखद घटनाओं की छाया डाली.

बैन हटाने के बाद गाने की वापसी

62 साल तक के लंबे बैन के बाद, 2003 में इस गाने से बैन हटा लिया गया, और फिर यह गाना नए रूप में सामने आया. हालांकि, इसकी पिछली दुखद यात्रा ने हमेशा के लिए इसे एक भूतिया गाने के रूप में दर्ज कर दिया. 

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