अमेरिका के उत्तरतम इलाके अलास्का में स्थित उटकियागविक, जिसे पहले "बारो" के नाम से जाना जाता था, में मंगलवार को 2025 का आखिरी सूर्यास्त हो चुका है. इसके बाद यह क्षेत्र ध्रुवीय रात (Polar Night) में प्रवेश कर गया है, जिसका मतलब है कि अगले 64 दिनों तक सूरज क्षितिज से नीचे रहेगा और यहां पर रात का ही वास होगा. इस दौरान, उटकियागविक में कोई सूरज नहीं दिखेगा, और यह स्थिति 22 जनवरी 2026 तक कायम रहेगी. इसके पीछे की मुख्य वजह पृथ्वी का झुकाव और इस शहर का आर्कटिक सर्कल में स्थित होना है.
पोलर नाइट क्या है?
पोलर नाइट, जैसा कि नाम से ही जाहिर है, एक ऐसी खगोलीय घटना है, जिसमें सूरज क्षितिज से ऊपर नहीं आता और क्षेत्र में अंधेरा छाया रहता है. उटकियागविक जैसे आर्कटिक इलाकों में यह स्थिति सर्दियों के दौरान होती है, जब पृथ्वी की झुकी हुई धुरी के कारण उत्तरी ध्रुव सूरज से दूर हो जाता है. इस दौरान सूरज की रोशनी पूरी तरह से गायब रहती है और रात का समय लंबा हो जाता है. उटकियागविक में 18 नवंबर को दोपहर 1:36 बजे सूरज डूबा था, और अब यह 22 जनवरी 2026 तक फिर से दिखाई नहीं देगा. यह 64-65 दिन की अवधि है, जो प्रत्येक वर्ष सर्दियों में होती है.
सूरज क्यों नहीं निकलता है?
पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है, और इसी झुकाव के कारण उत्तरी ध्रुव सर्दियों में सूरज से बहुत दूर चला जाता है. इससे आर्कटिक और सब-आर्कटिक इलाकों में सूर्य की किरणें नहीं पहुंच पातीं. इसलिए इन इलाकों में पोलर नाइट की स्थिति बनती है, जहां सूरज महीनों तक नहीं उगता. इसके विपरीत, गर्मियों के दौरान सूरज कभी नहीं डूबता, और वहां पोलर डे की स्थिति होती है, जब सूरज 24 घंटे आसमान में होता है. उटकियागविक में मई से अगस्त तक सूरज लगातार ऊपर रहता है, और यहां 80-85 दिनों तक सूरज डूबता नहीं है.
वैज्ञानिकों के लिए एक आदर्श शोध केंद्र
उटकियागविक को वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है. यहां आर्कटिक शोध, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अध्ययन किए जाते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण यहां की बर्फ पिघल रही है, और यह ध्रुवीय रात पर असर डाल सकता है. इस क्षेत्र में शोध कार्यों के अलावा, स्थानीय लोग भी इस अनोखी घटना को लेकर बेहद उत्साहित रहते हैं, क्योंकि इस दौरान लंबे समय तक रात का समय होने के कारण यहां के लोग विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं.
आर्कटिक के बदलते मापदंड
उटकियागविक और आर्कटिक सर्कल के इलाकों में सूर्य की अनुपस्थिति और स्थिति की लगातार बदलती गतिविधियां, पृथ्वी के जलवायु पर हो रहे प्रभावों को समझने के लिए वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करती हैं. इस तरह के शोध जलवायु परिवर्तन को समझने और इस पर आवश्यक कदम उठाने में मददगार साबित हो सकते हैं.
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