Delhi Air Pollution: दिल्ली-एनसीआर की सर्दी में प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, लेकिन इस बार पराली जलाने को प्रदूषण के मुख्य कारण के रूप में नहीं देखा जा रहा है. एक नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि इस साल प्रदूषण का असली कारण वाहनों और अन्य स्थानीय स्रोतों से निकलने वाले जहरीले प्रदूषक तत्व हैं, जो दिल्ली की हवा को और भी दमघोंटू बना रहे हैं.
59 दिन तक प्रदूषण का खतरनाक स्तर
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) ने दिल्ली के विभिन्न इलाकों में 59 दिनों तक प्रदूषण का अध्ययन किया. इस दौरान पाया गया कि दिल्ली के कई इलाकों में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) का स्तर तय सीमा से ऊपर रहा. रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के द्वारका सेक्टर-8 में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर 55 दिनों तक बढ़ा रहा, जबकि जहांगीरपुरी और दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तर परिसर में भी 50 दिनों तक यह सीमा से ज्यादा था.
जहांगीरपुरी में सबसे ज्यादा प्रदूषण
जहांगीरपुरी को दिल्ली का सबसे प्रदूषित इलाका पाया गया, जहां सालभर का औसत पीएम 2.5 स्तर 119 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था. इसके बाद बावाना और वज़ीरपुर का नंबर आता है, जहां यह स्तर 113 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था. इस रिपोर्ट में कुछ नए प्रदूषण हॉटस्पॉट्स भी सामने आए हैं, जिनमें विवेक विहार, अलीपुर, नेहरू नगर, और सिरी फोर्ट शामिल हैं.
छोटे शहरों में भी प्रदूषण का कहर
इस बार दिल्ली के आसपास के छोटे शहरों में भी प्रदूषण की स्थिति गंभीर रही. विशेष रूप से बहादुरगढ़ में 9 से 18 नवंबर तक 10 दिनों तक स्मॉग का असर देखने को मिला. यह स्थिति यह दर्शाती है कि अब छोटे शहर भी एक समान प्रदूषण स्तर का सामना कर रहे हैं, जैसे दिल्ली में होता है.
ये है प्रदूषण का असली कारण
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ने का मुख्य कारण वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक तत्व हैं. पीएम 2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) का बढ़ता मिश्रण हवा को जहरीला बना रहा है. खासतौर पर, व्यस्त घंटों में इन प्रदूषकों का स्तर तेजी से बढ़ता है, क्योंकि सर्दियों के दौरान वाहनों से निकलने वाला धुआं पतली वायु परतों में जमा हो जाता है.
पराली जलाने का असर कम
इस साल पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन इसका प्रभाव दिल्ली में प्रदूषण के स्तर पर नहीं दिखा. रिपोर्ट में कहा गया है कि पराली जलाने के मुकाबले, वाहन उत्सर्जन और उद्योगों के प्रदूषण से हवा की गुणवत्ता अधिक खराब हो रही है.
आगे की कार्रवाई की जरूरत
सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी के अनुसार, प्रदूषण के मुख्य स्रोतों पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि सर्दियों में धूल नियंत्रण उपायों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, जबकि वाहनों, उद्योगों और अपशिष्ट जलाने जैसे अन्य स्रोतों पर कम ध्यान दिया जाता है. अगर इन पर कार्रवाई की जाती है, तो प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है.
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