VVS Laxman On Team India: टीम इंडिया के खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने से भारतीय क्रिकेट में चिंता बढ़ गई है. श्रीलंका के खिलाफ होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन का नाम भी चोटिल खिलाड़ियों की लिस्ट में जुड़ गया है. दोनों खिलाड़ी इस सीरीज का हिस्सा नहीं बन पाएंगे.
खिलाड़ियों की चोट के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि खिलाड़ियों को पूरी तरह फिट होने से पहले ही टीम में शामिल कर लिया जाता है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या फिटनेस जांच और चयन प्रक्रिया के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है.
इन सवालों के बीच CoE के क्रिकेट हेड और पूर्व भारतीय बल्लेबाज VVS लक्ष्मण ने BCCI के सेक्रेटरी देवजीत सैकिया के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों की फिटनेस और टीम चयन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया पर अपनी बात रखी.
खिलाड़ियों की फिटनेस पर लक्ष्मण ने क्या कहा?
VVS लक्ष्मण ने साफ किया कि किसी खिलाड़ी की फिटनेस तय करने की प्रक्रिया जल्दबाजी में नहीं होती. उनके मुताबिक, खिलाड़ी की रिकवरी और फिटनेस को डेटा और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर देखा जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में खिलाड़ी की स्थिति को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है.
लक्ष्मण ने उन सवालों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि CoE ने कुछ खिलाड़ियों को पूरी तरह फिट हुए बिना ही खेलने की मंजूरी दे दी. उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति या संस्था को दोष देना सही तरीका नहीं है.
उनके मुताबिक, CoE, टीम मैनेजमेंट, स्पोर्ट्स साइंस टीम, मेडिकल स्टाफ और चयन समिति लगातार आपस में मिलकर काम करते हैं. सभी पक्षों के बीच खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर जानकारी साझा की जाती है.
Reporter 🗣️: Players are fully fit while playing in the IPL, but when it comes to playing for India, we often see them getting injured. Should the players or the fitness management be blamed for these repeated injuries?
— Central Cricket (@arshdeep3444) August 9, 2026
VVS Laxman 🗣️:I don’t think we should use the word ‘blame’… pic.twitter.com/7nN0ztDHu2
फिटनेस रिपोर्ट के बाद ही होता है फैसला
लक्ष्मण ने बताया कि टीम चयन से पहले खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर एक तय प्रक्रिया होती है. जब किसी खिलाड़ी की रिकवरी चल रही होती है, तब CoE उसकी मौजूदा फिटनेस की जानकारी तैयार करता है.
इसके बाद फिटनेस स्टेटस रिपोर्ट चयन समिति के प्रमुख को भेजी जाती है. इसकी जानकारी टीम के हेड कोच और BCCI को भी दी जाती है. यानी किसी खिलाड़ी की फिटनेस को लेकर चयनकर्ताओं के पास पहले से जानकारी होती है.
लक्ष्मण ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता रखी जाती है. टीम चुनने से पहले ही यह साफ कर दिया जाता है कि कौन सा खिलाड़ी पूरी तरह फिट है और किस खिलाड़ी का चयन फिटनेस टेस्ट पास करने पर निर्भर है.
बुमराह और साई सुदर्शन के मामले में क्या हुआ?
जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन जैसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों को टीम में शामिल किए जाने और बाद में उनके बाहर होने को लेकर भी सवाल पूछे गए. इस पर लक्ष्मण ने कहा कि ऐसे मामलों को सिर्फ इस तरह नहीं देखा जा सकता कि खिलाड़ी को फिट घोषित कर दिया गया था और बाद में उसे टीम से वापस बुलाना पड़ा.
उन्होंने समझाया कि कई बार खिलाड़ी का चयन उसकी फिटनेस पर निर्भर होता है. इसका मतलब यह होता है कि टीम में जगह मिलने के बावजूद खिलाड़ी को तय फिटनेस टेस्ट पास करना जरूरी होता है. अगर खिलाड़ी फिटनेस टेस्ट पास नहीं करता है तो उसकी जगह दूसरे खिलाड़ी को टीम में शामिल किया जा सकता है. चयनकर्ताओं को इस स्थिति की जानकारी पहले से होती है.
'दोष' तय करना सही तरीका नहीं: लक्ष्मण
टीम में लगातार चोटिल खिलाड़ियों की संख्या बढ़ने पर जब लक्ष्मण से जवाबदेही को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने 'दोष' तय करने की सोच पर असहमति जताई. लक्ष्मण का कहना था कि चोट खेल का हिस्सा है और हर चोट के पीछे किसी एक व्यक्ति या सिस्टम को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा.
उन्होंने कहा कि CoE और टीम से जुड़े सभी विभाग मिलकर खिलाड़ियों की रिकवरी और फिटनेस पर काम कर रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि मेडिकल टीम और स्पोर्ट्स साइंस एक्सपर्ट खिलाड़ियों की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं. उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया तय होती है.
फिटनेस को लेकर पहले से तैयार रहती है टीम
लक्ष्मण के मुताबिक, जब किसी खिलाड़ी का चयन फिटनेस के आधार पर किया जाता है तो चयनकर्ताओं के पास बैकअप प्लान भी मौजूद रहता है. अगर खिलाड़ी तय समय तक फिट नहीं हो पाता है तो उसकी जगह दूसरे खिलाड़ी को मौका दिया जा सकता है. इसका मतलब यह है कि फिटनेस पर निर्भर खिलाड़ी का चयन सामान्य चयन से थोड़ा अलग होता है. टीम मैनेजमेंट को पहले से पता रहता है कि खिलाड़ी की फिटनेस अंतिम फैसला तय करेगी.
भारतीय टीम के लिए लगातार खिलाड़ियों का चोटिल होना निश्चित तौर पर चिंता का विषय है. खासकर बुमराह जैसे प्रमुख खिलाड़ी के बाहर होने से टीम की रणनीति पर असर पड़ सकता है. हालांकि, VVS लक्ष्मण ने साफ किया है कि खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर CoE, मेडिकल टीम और चयनकर्ताओं के बीच लगातार बातचीत होती है और फैसले मेडिकल रिपोर्ट तथा उपलब्ध डेटा के आधार पर लिए जाते हैं.
ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले समय में चोटिल खिलाड़ियों की वापसी कितनी तेजी से होती है और भारतीय टीम अपने प्रमुख खिलाड़ियों को लंबे समय तक फिट रखने के लिए किस तरह की रणनीति अपनाती है.
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