UP Analogue Paneer: उत्तर प्रदेश में दूध और उससे बने उत्पादों में मिलावट को रोकने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राज्य में एनालॉग पनीर, क्रीम, घी, छेना और खोवा को लेकर सख्त आदेश जारी किया गया है. सरकार ने साफ किया है कि दूध और दूध से बने उत्पाद अपने असली रूप में ही बेचे जाने चाहिए.
यह फैसला दूध और डेयरी प्रोडक्ट में मिलावट की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद लिया गया है. जांच के दौरान कई जगहों से लिए गए सैंपल में मिलावट वाले पदार्थ पाए गए. इसके बाद सरकार ने खाद्य सुरक्षा विभाग को ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
मिलावट मिली तो पूरी यूनिट पर होगी कार्रवाई
सरकार के आदेश के मुताबिक अगर किसी डेयरी यूनिट में मिलावटी दूध या दूध से बना कोई उत्पाद पाया जाता है तो सिर्फ उस सामान पर कार्रवाई नहीं होगी. पूरी निर्माण इकाई के उत्पादों को जब्त किया जा सकता है.
अगर मिलावटी सामान से लोगों की सेहत को गंभीर खतरा दिखाई देता है तो संबंधित यूनिट को तुरंत बंद कराया जा सकता है. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 34 के तहत प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई भी की जा सकती है. वहीं, अगर जांच में खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति या कंपनी के खिलाफ FIR भी दर्ज की जा सकती है.
मिलावट करने वाले ब्रांड पर भी लगेगा बैन
सरकार ने सिर्फ स्थानीय डेयरी यूनिटों को ही नहीं, बल्कि बाहर से आने वाले ब्रांडेड उत्पादों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है. अगर किसी दूसरे राज्य में बने डेयरी प्रोडक्ट के सैंपल में हानिकारक रसायन या वनस्पति वसा पाई जाती है तो उस ब्रांड की उत्तर प्रदेश में बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है.
ऐसे मामलों में संबंधित ब्रांड का खाद्य लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन भी निलंबित किया जा सकता है. यानी मिलावट साबित होने पर कंपनी के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में अपने उत्पाद बेचना मुश्किल हो जाएगा.
डेयरी प्रोडक्ट में मिलावट को लेकर चिंता
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में दूध और उससे बने उत्पादों में कई तरह की मिलावट सामने आने की बात कही गई है. इनमें वनस्पति वसा, सोयाबीन और सोया से बने पदार्थ, टैल्कम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, तरल ग्लूकोज और हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसे पदार्थ शामिल हैं.
इसके अलावा कुछ मामलों में अलग-अलग तरह के न्यूट्रलाइजर के इस्तेमाल की भी जानकारी सामने आई है. सरकार का मानना है कि इस तरह के पदार्थों से दूध और डेयरी उत्पाद तैयार करना लोगों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभाग को ऐसे मामलों की जांच और कार्रवाई तेज करने को कहा गया है.
एनालॉग पनीर को लेकर क्यों है सख्ती?
एनालॉग पनीर को आम तौर पर दूध से बने असली पनीर के विकल्प के तौर पर तैयार किया जाता है. इसमें दूध की जगह या उसके साथ वनस्पति वसा और दूसरे पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
सरकार की चिंता यह है कि ग्राहक को साफ जानकारी मिले कि वह असली दूध से बना उत्पाद खरीद रहा है या किसी दूसरे पदार्थ से तैयार किया गया विकल्प. इसी वजह से दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता और उनके सही तरीके से बेचे जाने पर जोर दिया जा रहा है.
कई राज्यों में पहले भी हुई है कार्रवाई
उत्तर प्रदेश ऐसा पहला राज्य नहीं है जहां एनालॉग पनीर और इसी तरह के डेयरी विकल्पों को लेकर सख्ती की गई है. उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में भी वनस्पति वसा से बने डेयरी विकल्पों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है.
उत्तर प्रदेश सरकार के ताजा कदम के बाद अब राज्य में दूध, पनीर, घी, क्रीम, छेना और खोवा की जांच और सख्त होने की उम्मीद है. सरकार का मकसद मिलावट पर रोक लगाना और लोगों को सुरक्षित और सही गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराना है.
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