मैगजीन ने मिसाइलों के बीच पैगंबर मूसा को हाथ मिलाते दिखाया, तुर्की में कार्टून पर विवाद, देखें वीडियो

तुर्किये में एक साप्ताहिक व्यंग्य पत्रिका लेमन द्वारा प्रकाशित एक कार्टून ने देशभर में तीव्र विवाद और सार्वजनिक आक्रोश को जन्म दिया है.

Controversy over alleged cartoon of the Prophet in Turkey
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अंकारा: तुर्किये में एक साप्ताहिक व्यंग्य पत्रिका लेमन द्वारा प्रकाशित एक कार्टून ने देशभर में तीव्र विवाद और सार्वजनिक आक्रोश को जन्म दिया है. कार्टून में दो ऐतिहासिक पात्रों जैसे दिखने वाले व्यक्तियों को—जिनमें से एक का नाम 'मुहम्मद' और दूसरा 'मूसा' बताया गया—आसमान से गिरती मिसाइलों के बीच हाथ मिलाते हुए दर्शाया गया था.

इस चित्र को लेकर यह आरोप लगाया गया कि यह इस्लाम धर्म और धार्मिक प्रतीकों का अपमान करता है, हालांकि पत्रिका ने बाद में स्पष्टीकरण जारी किया कि कार्टून का उद्देश्य किसी भी धार्मिक समुदाय को ठेस पहुंचाना नहीं था.

लोगों में आक्रोश और प्रदर्शन

कार्टून के प्रकाशन के बाद तुर्किये के विभिन्न शहरों, विशेष रूप से इस्तांबुल में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए. कई प्रदर्शनकारी धार्मिक नारों के साथ पत्रिका के कार्यालय के बाहर एकत्र हुए. कुछ प्रदर्शनकारियों ने हिंसक रुख अपनाते हुए कार्यालय की खिड़कियों पर पथराव भी किया.

कार्टूनिस्ट सहित चार की गिरफ्तारी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुर्किये की पुलिस ने कार्टूनिस्ट डोगन पहलवान के साथ-साथ लेमन पत्रिका के संपादक, प्रबंध संपादक और एक ग्राफिक डिजाइनर को गिरफ्तार कर लिया है. गृह मंत्री अली येरलिकाया ने इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि यह धार्मिक भावनाओं का अपमान है, जिसे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत नहीं देखा जा सकता.

गृह मंत्री ने कहा, "यह प्रेस की स्वतंत्रता का मामला नहीं है, यह हमारे धार्मिक मूल्यों का अपमान है."

संवेदनशीलता बनाम स्वतंत्रता

तुर्किये के न्याय मंत्री यिलमाज टुंक ने भी इस घटना की निंदा की और सोशल मीडिया पर लिखा कि कोई भी व्यक्ति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देकर धार्मिक प्रतीकों का उपहास नहीं कर सकता. उन्होंने इस प्रकार के प्रकाशनों को सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बताया.

पत्रिका ने मांगी माफी, दी सफाई

विवाद के बाद लेमन पत्रिका ने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में माफी जारी की. मुख्य संपादक टुनके अकगुन ने स्पष्ट किया कि कार्टून में दर्शाया गया चरित्र वास्तविक पैगंबर नहीं, बल्कि एक काल्पनिक पात्र था जिसका नाम 'मुहम्मद' रखा गया था — यह नाम दुनिया भर में लाखों लोगों द्वारा रखा गया है.

अकगुन ने कहा, "हमारा इरादा कभी भी किसी धार्मिक भावना को आहत करना नहीं था. यदि हमारे किसी पाठक को ठेस पहुंची है, तो हम खेद व्यक्त करते हैं."

उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ तत्व जानबूझकर कार्टून का गलत अर्थ निकालकर इसे भड़काऊ बना रहे हैं.

चार्ली हेब्दो विवाद की यादें ताजा

यह प्रकरण वर्ष 2015 में फ्रांस की चार्ली हेब्दो पत्रिका पर हुए हमले की भी याद दिलाता है, जिसमें पैगंबर मुहम्मद के विवादास्पद कार्टूनों के बाद 12 लोगों की जान चली गई थी. उस घटना ने वैश्विक स्तर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक सहिष्णुता के बीच संतुलन को लेकर गंभीर बहस को जन्म दिया था.

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