उत्तराखंड में UCC लागू होने पर कुछ लोगों को लगी मिर्ची, क्यों कही कोर्ट में चुनौती देने की बात?

धार्मिक रीति-रिवाजों या कानूनी प्रावधानों के तहत विवाह की रस्में किसी भी रूप में की जा सकती हैं, लेकिन अधिनियम के लागू होने के बाद होने वाले विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य है.

उत्तराखंड में UCC लागू होने पर कुछ लोगों को लगी मिर्ची, क्यों कही कोर्ट में चुनौती देने की बात?
इंदौर में मीडिया से बात करते हुए सलमान खुर्शीद | Photo- ANI के वीडियो से ग्रैब्ड

इंदौर (मध्य प्रदेश) : उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद कुछ विपक्षी नेताओं मिर्ची लगी है और इसके खिलाफ कोर्ट में जाने की बात कह रहे हैं. कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने सोमवार को कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (Unifor, Civil Code) को अदालतों में चुनौती दी जाएगी. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तराखंड में आज से यूसीसी लागू हो गया है.

खुर्शीद ने यहां संवाददाताओं से कहा, "इसे होने दें. उन्हें इसे आज लागू करने दें. उसके बाद हम देखेंगे."

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उन्होंने इसे कैसे किया है, समझ से परे है : सलमान खुर्शीद

उन्होंने कहा. "मेरा भी उत्तराखंड में घर है, क्या यह मुझ पर भी लागू होगा? इसमें यह भी कहा गया है कि यह उन लोगों पर लागू होगा जो उत्तराखंड के निवासी हैं, चाहे वे कहीं भी रहते हों. तो, यूसीसी उनका कितना पालन करेगी? उन्होंने क्या किया है और किस सोच के साथ उन्होंने ऐसा किया है - हमें समझ में नहीं आता...अगर इसमें कुछ ऐसा है जिस पर चर्चा की जरूरत है, तो हम करेंगे. अगर जरूरत पड़ी तो हम इसे अदालत में चुनौती देंगे."

इस बीच, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता के लागू होने से जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव करने वाले व्यक्तिगत नागरिक मामलों से संबंधित सभी कानूनों में एकरूपता आएगी.

उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता के लागू होने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, जिसमें अधिनियम के नियमों का अनुमोदन और संबंधित अधिकारियों का प्रशिक्षण शामिल है.

सीएम धामी ने इसे राष्ट्र के लिए बताया जरूरी

सीएम धामी ने लिखा, "प्रिय प्रदेशवासियों, 27 जनवरी 2025 से राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो जाएगी, जिससे उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बन जाएगा, जहां यह कानून लागू होगा. यूसीसी लागू करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, जिसमें अधिनियम के नियमों का अनुमोदन और संबंधित अधिकारियों का प्रशिक्षण शामिल है. यूसीसी समाज में एकरूपता लाएगी और सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और जिम्मेदारियां सुनिश्चित करेगी. समान नागरिक संहिता प्रधानमंत्री द्वारा देश को एक विकसित, संगठित, सामंजस्यपूर्ण और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए किए जा रहे महायज्ञ में हमारे राज्य द्वारा दी गई एक आहुति मात्र है. समान नागरिक संहिता के तहत जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव करने वाले व्यक्तिगत नागरिक मामलों से संबंधित सभी कानूनों में एकरूपता लाने का प्रयास किया गया है."

उत्तराखंड सरकार आज उत्तराखंड समान नागरिक संहिता अधिनियम, 2024 को लागू करेगी, जिसमें वसीयतनामा उत्तराधिकार के तहत वसीयत और पूरक दस्तावेजों, जिन्हें कोडिसिल के रूप में जाना जाता है, के निर्माण और रद्द करने के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचा स्थापित किया जाएगा. राज्य सरकार के अनुसार यह अधिनियम उत्तराखंड राज्य के सम्पूर्ण क्षेत्र पर लागू होता है व उत्तराखंड से बाहर रहने वाले राज्य के निवासियों पर भी प्रभावी है.

यूसीसी उत्तराखंड के अनुसूचित जनजातियों और संरक्षित प्राधिकरण-सशक्त व्यक्तियों एवं समुदायों को छोड़कर सभी निवासियों पर लागू होता है.

यूसीसी के बाद उत्तराखंड यह होगा बदलाव

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है, जिसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और विरासत से संबंधित व्यक्तिगत कानूनों को सरल और मानकीकृत करना है.

इसके तहत विवाह केवल उन्हीं पक्षों के बीच हो सकता है, जिनमें से किसी का भी जीवित जीवनसाथी न हो, दोनों ही कानूनी अनुमति देने के लिए मानसिक रूप से सक्षम हों, पुरुष की आयु कम से कम 21 वर्ष तथा महिला की आयु 18 वर्ष पूरी हो चुकी हो तथा वे निषिद्ध संबंधों के दायरे में न हों.

धार्मिक रीति-रिवाजों या कानूनी प्रावधानों के तहत विवाह की रस्में किसी भी रूप में की जा सकती हैं, लेकिन अधिनियम के लागू होने के बाद होने वाले विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य है.

जो लोग राज्य से बाहर रह रहे वे भी दायरे में आएंगे

सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 26 मार्च 2010 से पहले या उत्तराखंड राज्य के बाहर, जहां दोनों पक्ष साथ रह रहे हैं और सभी कानूनी पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं, विवाह अधिनियम के लागू होने के 6 महीने के भीतर रजिस्टर्ड हो सकते हैं (हालांकि यह अनिवार्य नहीं है).

इसी तरह, विवाह पंजीकरण की स्वीकृति और पावती का काम भी तुरंत पूरा किया जाना आवश्यक है. आवेदन मिलने के बाद, उप-पंजीयक को 15 दिनों के भीतर उचित निर्णय लेना होगा.

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