CM Kejriwal on CAA
देशभर में सीएए को लेकर चर्चाए काफी तेज है. अब इस मामले ने सियासी मोड़ लेना भी शुरु कर दिया है. आपको बता दें कि दिल्ली CM ( CM Kejriwal on CAA)ने इस नए कानून को लेकर केंद्र सरकार पर बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर निशाना साधा है.
सीएम केजरीवाल ने CAA पर दिया बयान
सीएम केजरीवाल ने सीएए पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कल भाजपा की केंद्र सरकार ने CAA लागू करने का नोटिफीकेशन जारी किया है. उन्होनें कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले BJP को सीएए पर बात करनी पड़ रही है. इसी दौरान सीएम ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर 10 साल अच्छे काम किए होते तो सीएए की जगह अपने कार्यों को लेकर वोट मांगना पड़ता.
CAA पर बोले CM केजरीवाल
बता दें कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीएम ने बताया कि आखिर CAA है क्या? उन्होनें कहा कि बीजेपी की केंद्र सरकार का कहना है कि तीन देश बांगलादेश,पाकिस्तान और अफगानिस्तान इन तीन देश के अल्पसंख्यक भारत देश की नागरिकता लेना चाहें तो उन्हें नागरिकता दी जाएगी.
पाकिस्तान से लाकर लोगों को बसाना चाहते हैं
सीएम केजरीवाल ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी पार्टी से भारत में रोजगार नहीं दी जा रही. लेकिन पाकिस्तान से बच्चों को भारत में लाकर उन्हें यहां रोजगार देकर के बसाया जाएगा. सीएम बोले कि इन तीन देशों में करीबन ढाई से 3 करोड़ अल्पसंख्यक हैं.
वोट बैंक बनाने की गंदी राजनीति है
केजरीवाल ने सीएए पर सवाल करते हुए कहा कि यदि इन तीन देशों से लोग भारत की ओर आ गए तो इन्हें रोजगार कौन देगा. उन्होनें कहा कि मैने जब इस बारे में लोगों से बात की तो उनका कहना है कि यह सब वोटबैंक बनाने की गंदी राजनीति है. उन्होनें कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में नहीं बीजेपी को आने वाले चुनावों में इसका काफी फायदा मिल सकता है, सीएम ने कहा ऐसा कुछ लोगों का कहना है.
पड़ोसी देश से गरीबों को लाने के लिए दरवाजे खोल रही बीजेपी
दिल्ली सीएम ने कहा कि बीजेपी वाले पूरी दुनिया से उल्टा चल रहे हैं. पूरी दुनिया में कोई देश अपने देश में गरिबों को नहीं लाना चाहता. पड़ोसी देश तरह-तरह के कानून तैयार करता है. क्योंकी कोई भी पड़ोसी देश का व्यक्ति अपने देश में घुस न सके. सीएम ने बीजेपी पर वार करते हुए कहा कि बीजेपी एक अकेली ऐसी पार्टी है जो पड़ोसी देशों के गरीब बच्चों को अपने देश में लाने के लिए दरवाजे खोल रही है.
इन्हें मिल सकती है देश की नागरिकता
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए सीएए नियमों का मकसद सताए गए गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है - जिनमें हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई शामिल हैं - जो 31 दिसंबर 2014 से पहले माइग्रेट कर बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत आए हैं.
एक अधिकारी के अनुसार, गृह मंत्रालय की अधिसूचना जारी होने के साथ ही सीएए कानून को अमल में लाया जा सकता है, जिससे पात्र व्यक्तियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की अनुमति मिलेगी.
एक अधिकारी के अनुसार, गृह मंत्रालय की अधिसूचना जारी होने के साथ ही सीएए कानून को अमल में लाया जा सकता है, जिससे पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता पाने की अनुमति मिलेगी.
सीएए के कार्यान्वयन में 4 साल से अधिक की देरी हो चुकी है, इसलिए इसके संबंधित नियमों को तैयार करना आवश्यक हो गया है.
अधिकारी ने कहा, "नियम तैयार किए गए हैं, और पूरी प्रक्रिया के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल पहले से ही स्थापित किया गया है, जिसे डिजिटल रूप से संचालित किया जाएगा. आवेदकों को बिना किसी यात्रा दस्तावेज के भारत में अपने आने के साल का खुलासा करना होगा. किसी अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी आवेदक."
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