चीन के 'मैग्लेव ट्रेन' ने बनाया रफ्तार का वर्ल्ड रिकॉर्ड, 2 सेकेंड में 700kmph की स्पीड पकड़ी, VIDEO

चीन ने सुपरफास्ट ट्रांसपोर्ट तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. देश के वैज्ञानिकों ने ऐसी मैग्लेव (Maglev) ट्रेन का सफल परीक्षण किया है, जो महज दो सेकेंड में 700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच गई.

Chinas Maglev Train sets world record for fastest speed
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Fastest Train: चीन ने सुपरफास्ट ट्रांसपोर्ट तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. देश के वैज्ञानिकों ने ऐसी मैग्लेव (Maglev) ट्रेन का सफल परीक्षण किया है, जो महज दो सेकेंड में 700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच गई. यह गति इतनी तेज है कि ट्रेन कुछ ही पलों में आंखों से ओझल हो जाती है. इस उपलब्धि के साथ चीन ने अल्ट्रा-हाई स्पीड रेल टेक्नोलॉजी में नया विश्व रिकॉर्ड कायम कर दिया है.

इस सुपरफास्ट मैग्लेव ट्रेन का परीक्षण चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने किया. करीब एक टन वजन वाली इस ट्रेन को 400 मीटर लंबे विशेष रूप से तैयार किए गए टेस्ट ट्रैक पर चलाया गया. गुरुवार को हुए इस टेस्ट के दौरान ट्रेन ने बेहद कम समय में रिकॉर्ड रफ्तार पकड़ी और फिर उसे सुरक्षित तरीके से रोक भी लिया गया.

वैज्ञानिकों की 10 साल की मेहनत लाई रंग

इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की टीम पिछले लगभग 10 साल से इस तकनीक को विकसित करने में जुटी हुई थी. इसी साल जनवरी में इसी ट्रैक पर ट्रेन को 648 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक पहुंचाया गया था. अब 700 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पार कर इसने नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह अब तक की सबसे तेज सुपरकंडक्टिंग इलेक्ट्रिक मैग्लेव ट्रेन है.

बिना पटरियों को छुए दौड़ती है मैग्लेव ट्रेन

मैग्लेव ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारंपरिक ट्रेनों की तरह पटरियों पर चलती नहीं है. इसमें लगे शक्तिशाली मैग्नेट ट्रेन को हवा में उठा देते हैं और आगे की दिशा में तेज धक्का देते हैं. चूंकि ट्रेन और ट्रैक के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं होता, इसलिए घर्षण लगभग खत्म हो जाता है. यही कारण है कि मैग्लेव ट्रेनें बेहद तेज रफ्तार हासिल कर पाती हैं.

वीडियो में बिजली की तरह दौड़ती दिखी ट्रेन

टेस्ट से जुड़ा वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ट्रेन बिजली की चमक की तरह ट्रैक पर दौड़ती नजर आती है और पीछे हल्की-सी धुंध छोड़ जाती है. कुछ ही सेकेंड में ट्रेन पूरी दूरी तय कर लेती है, जो इसकी असाधारण गति को साफ तौर पर दिखाता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस तकनीक से इस मैग्लेव ट्रेन को आगे बढ़ाया गया है, उसका उपयोग भविष्य में रॉकेट लॉन्च सिस्टम में भी किया जा सकता है. अगर इस तकनीक को पैसेंजर ट्रांसपोर्ट में अपनाया जाता है, तो बड़े-बड़े शहरों के बीच का सफर मिनटों में पूरा हो सकेगा और लंबी दूरी की यात्रा की परिभाषा ही बदल जाएगी.

हाइपरलूप ट्रांसपोर्ट की दिशा में बड़ा कदम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह तकनीक भविष्य के हाइपरलूप ट्रांसपोर्ट सिस्टम की नींव रख सकती है. हाइपरलूप में ट्रेनें वैक्यूम जैसी बंद ट्यूबों के अंदर बेहद तेज रफ्तार से चलेंगी. इससे न सिर्फ यात्रा का समय कम होगा, बल्कि सुरक्षा और ऊर्जा दक्षता भी बढ़ेगी.

जटिल तकनीकी चुनौतियों को किया गया हल

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के दौरान वैज्ञानिकों ने कई कठिन तकनीकी समस्याओं का समाधान किया. इनमें ट्रेन को हवा में स्थिर रखना, अत्यधिक तेज इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम को नियंत्रित करना, अचानक बहुत ज्यादा बिजली की मांग को संभालना और शक्तिशाली सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट का इस्तेमाल शामिल है.

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर ली जी ने कहा कि इस अल्ट्रा-हाई स्पीड मैग्लेव सिस्टम की सफलता से चीन में सुपरफास्ट ट्रेनों के रिसर्च और डेवलपमेंट को नई दिशा मिलेगी. इससे आने वाले समय में और भी तेज और उन्नत ट्रेनें बनाने का रास्ता खुलेगा.

चीन का मैग्लेव तकनीक में लंबा सफर

करीब 30 साल पहले इसी यूनिवर्सिटी ने चीन की पहली पैसेंजर मैग्लेव ट्रेन विकसित की थी. इसके साथ ही चीन यह तकनीक विकसित करने वाला दुनिया का तीसरा देश बना था. आज चीन इस क्षेत्र में दुनिया के सबसे आगे रहने वाले देशों में शामिल है.

दुनिया के गिने-चुने देशों में ही चलती है मैग्लेव ट्रेन

फिलहाल दुनिया में बहुत कम ऐसे देश हैं जहां मैग्लेव ट्रेनें चल रही हैं या उन पर काम हो रहा है. चीन के अलावा जापान और दक्षिण कोरिया इस तकनीक में आगे हैं. जापान में टेस्ट ट्रैक पर मैग्लेव ट्रेन 600 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार तक पहुंच चुकी है. टोक्यो और नागोया के बीच मैग्लेव लाइन पर काम चल रहा है.

दक्षिण कोरिया में इंचियोन एयरपोर्ट के पास कम दूरी के लिए मैग्लेव ट्रेन चलाई जा रही है. जर्मनी और ब्रिटेन ने इस तकनीक पर शुरुआती काम किया था, लेकिन फिलहाल वहां मैग्लेव ट्रेनें संचालन में नहीं हैं.

भारत में अभी पारंपरिक हाई-स्पीड ट्रेनें ही विकल्प

भारत में मैग्लेव ट्रेन अभी शुरू नहीं हो पाई है, क्योंकि यह तकनीक बेहद महंगी और जटिल मानी जाती है. इसके लिए अलग ट्रैक और नया इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना पड़ता है, जो मौजूदा रेलवे नेटवर्क से मेल नहीं खाता.

फिलहाल भारत की सबसे तेज ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस है, जिसकी अधिकतम रफ्तार लगभग 180 किमी प्रति घंटा है. भविष्य में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के शुरू होने के बाद भारत में 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन चलने की उम्मीद है.

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