China World Largest Dam: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है. इस तबाही में अब तक 162 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 750 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं. इनमें 133 भारतीय भी शामिल हैं. नेपाल का कहना है कि तिब्बत के केरुंग इलाके में बुधवार को एक झील फटने से करीब 2 करोड़ घन मीटर पानी नेपाल में आया. नेपाल ने आरोप लगाया कि चीन ने इसकी पहले जानकारी नहीं दी. अगर समय पर अलर्ट मिलता तो नुकसान कम किया जा सकता था.
नेपाल की बाढ़ ने बढ़ाई भारत की चिंता
नेपाल के रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. यह नदी तिब्बत के शिशापांगमा पर्वत से निकलकर नेपाल में आती है. इस घटना के बाद भारत की चिंता भी बढ़ गई है, क्योंकि चीन भारत की सीमा के पास एक बड़ी जलविद्युत परियोजना बना रहा है.
चीन अरुणाचल प्रदेश की सीमा से करीब 30 किलोमीटर दूर मेडोग जलविद्युत परियोजना बना रहा है. यह इलाका भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है. चीन ने जुलाई 2025 में यहां निर्माण शुरू किया था. यारलुंग त्सांगपो नदी पर बनने वाली इस परियोजना में पांच बांध बनाए जाएंगे. इसकी क्षमता 60 गीगावाट होगी और इसके 2033 के आसपास पूरा होने की उम्मीद है.
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
मेडोग परियोजना से हर साल करीब 300 अरब यूनिट बिजली पैदा होने का अनुमान है. इसकी लागत 137 से 170 अरब डॉलर के बीच बताई जा रही है. लेकिन विशेषज्ञों की चिंता सिर्फ परियोजना के आकार को लेकर नहीं है. यह इलाका भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के मिलने वाले क्षेत्र के पास है, जिससे यहां भूकंप का खतरा रहता है.
बड़े भूकंप की स्थिति में भूस्खलन, चट्टान गिरने और अचानक पानी बढ़ने जैसी घटनाएं हो सकती हैं. इससे बांध सुरक्षित रहने के बावजूद नीचे के इलाकों में नुकसान हो सकता है.
पेमा खांडू ने कहा- ‘वाटर बम’
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू चीन की मेडोग परियोजना को ‘वाटर बम’ बता चुके हैं. उनका कहना है कि नदी के ऊपरी हिस्से में बन रही इतनी बड़ी परियोजना से पानी का बहाव रोका जा सकता है या अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा सकता है.
भारत ने इस परियोजना को लेकर चीन के सामने अपनी चिंता भी जाहिर की है. वहीं, केंद्र सरकार अरुणाचल प्रदेश में 11,000 मेगावाट की सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना पर काम कर रही है. इसका एक उद्देश्य पानी के बहाव को नियंत्रित करना भी है.
नेपाल में भारी नुकसान, भारत में भी अलर्ट
नेपाल में बाढ़ के कारण घर, सड़कें और बिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं. 341 से ज्यादा विदेशी यात्रियों के लापता होने की बात कही जा रही है, जिनमें 100 से ज्यादा भारतीय नागरिक शामिल हैं.
नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश में भी अलर्ट जारी किया गया है. बिहार के पश्चिम चंपारण समेत छह जिलों में निगरानी बढ़ाई गई है. यूपी के महराजगंज और कुशीनगर में भी प्रशासन सतर्क है. नेपाल से आया पानी गंडक बैराज तक पहुंच गया है और इसके सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं. एनडीआरएफ की टीमें तैनात हैं और भारत की ओर से नेपाल के लिए राहत सामग्री भी भेजी गई है.
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