जन्मदर की कमी से जूझ रहा चीन, पैसे पर पैसा दे रही सरकार, फिर भी बच्चे पैदा नहीं कर रहे लोग, क्या है वजह?

चीन, जो कभी अपनी विशाल आबादी को नियंत्रित करने के लिए एक बच्चा नीति जैसी कठोर नीतियां अपनाता रहा, आज खुद को जनसंख्या संकट के बीच घिरा पा रहा है.

China is struggling with a low birth rate People not having children
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

बीजिंग/हांगकांग: चीन, जो कभी अपनी विशाल आबादी को नियंत्रित करने के लिए एक बच्चा नीति जैसी कठोर नीतियां अपनाता रहा, आज खुद को जनसंख्या संकट के बीच घिरा पा रहा है. बीते कुछ वर्षों में देश की जन्मदर में लगातार गिरावट आई है और जनसंख्या में पहली बार लगातार तीसरे वर्ष गिरावट दर्ज की गई है. यह घटनाक्रम केवल चीन के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और सामाजिक स्थिरता के लिए भी एक चेतावनी है.

सरकार द्वारा चलाई जा रही अर्थिक सहायता योजनाएं, कर में रियायतें, और परिवार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं, इन सभी प्रयासों के बावजूद चीन में लोग बच्चे पैदा करने से बच रहे हैं. यह स्थिति इस ओर संकेत करती है कि सिर्फ आर्थिक उपायों से जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा देना अप्रभावी हो सकता है, जब तक कि सामाजिक और संरचनात्मक बाधाओं को दूर न किया जाए.

जन्मदर गिरने के पीछे की जमीनी हकीकत

चीन सरकार ने बीते वर्षों में परिवारों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करने के लिए कई योजनाएं शुरू कीं. जैसे:

  • तीन साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सालाना 3,600 युआन (लगभग ₹42,000) की आर्थिक सहायता
  • मातृत्व और पितृत्व अवकाश में विस्तार
  • कर में रियायतें और सब्सिडी

हालांकि, इन योजनाओं का प्रभाव बहुत सीमित रहा है. ग्वांगडोंग जैसे प्रांत, जो देश में सबसे ज्यादा बच्चे पैदा करने वाला क्षेत्र है, वहां भी जन्मदर को लेकर चिंताजनक संकेत मिले हैं.

अध्ययन क्या कहता है?

बीजिंग स्थित कैपिटल यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस की जर्नल ‘जनसंख्या और अर्थशास्त्र’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया है. इस अध्ययन में चीन के सभी प्रांतों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया और एक विशेष फर्टिलिटी-फ्रेंडली इंडेक्स (प्रजनन-अनुकूलता सूचकांक) तैयार किया गया.

मुख्य निष्कर्ष:

  • ग्वांगडोंग, जहां साल 2024 में 11.3 लाख बच्चे पैदा हुए, फर्टिलिटी फ्रेंडली इंडेक्स में दूसरे सबसे निचले पायदान पर है.
  • यहां मातृत्व अवकाश मात्र 98 दिन है, जो देश में निर्धारित न्यूनतम सीमा है.
  • चाइल्ड केयर और अन्य सुविधाओं की कमी के कारण यह क्षेत्र जन्म के लिए अनुकूल नहीं माना गया.
  • सिचुआन जैसे आर्थिक रूप से समृद्ध प्रांत भी बच्चों के पालन-पोषण के लिहाज से प्रोत्साहन के स्तर पर कमजोर हैं.

जनसंख्या में गिरावट, देखें आंकड़े-

  • 2024 में चीन की जनसंख्या घटकर 1.408 अरब रह गई है.
  • यह आंकड़ा 2023 की तुलना में 13.9 लाख कम है.
  • देश का औसत जन्मदर प्रति 1,000 लोगों पर 6.77 रही है.

जबकि ग्वांगडोंग जैसे कुछ क्षेत्रों में यह दर थोड़ी अधिक (8.89) रही, लेकिन यह भी जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है.

मृत्यु दर जन्मदर से अधिक बनी हुई है.

इस गिरावट के चलते, चीन अब जनसांख्यिकीय संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है. खासकर बुजुर्ग आबादी के तेजी से बढ़ने के कारण कार्यशील जनसंख्या घटती जा रही है, जो आर्थिक विकास के लिए खतरे की घंटी है.

सामाजिक और सांस्कृतिक अवरोध

शोध में यह भी सामने आया कि जनसंख्या नीति केवल आर्थिक लाभों तक सीमित रहकर सफल नहीं हो सकती. कई ऐसे सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू हैं जो लोगों के बच्चे न पैदा करने के निर्णय में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

लड़के की चाह

  • ग्वांगडोंग में लिंग असमानता भी चिंता का विषय है.
  • यहां हर 100 लड़कियों पर 115.24 लड़कों का जन्म हुआ है.

यह आंकड़ा दर्शाता है कि लड़का पैदा करने की प्रवृत्ति अब भी मजबूत बनी हुई है, जिससे भविष्य में जेंडर इंबैलेंस और सामाजिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

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