लंबी जंग की तैयारी में चीन! देश में लागू हुआ नया कानून, नागरिकों पर मंडराया खतरा

China National Defense Law: चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा और युद्ध की तैयारी से जुड़े अपने कानून में बड़ा बदलाव किया है. देश की शीर्ष विधायिका ने संशोधित ‘नेशनल डिफेंस मोबिलाइजेशन लॉ’ को मंजूरी दे दी है. यह कानून 1 अक्टूबर से लागू होगा.

China implements new war law PLA to take control of tech companies the moment war breaks out
Image Source: Social Media

China National Defense Law: चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा और युद्ध की तैयारी से जुड़े अपने कानून में बड़ा बदलाव किया है. देश की शीर्ष विधायिका ने संशोधित ‘नेशनल डिफेंस मोबिलाइजेशन लॉ’ को मंजूरी दे दी है. यह कानून 1 अक्टूबर से लागू होगा.

नए कानून के तहत युद्ध या गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा संकट की स्थिति में चीन सरकार देश के नागरिकों, निजी कंपनियों, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे संसाधनों का इस्तेमाल रक्षा से जुड़े कामों के लिए कर सकेगी. इसे चीन की लंबे समय तक युद्ध लड़ने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. यह कानून साल 2010 के बाद राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी से जुड़े नियमों में किया गया बड़ा बदलाव है. संशोधित कानून में 14 अध्याय और 82 अनुच्छेद हैं.

क्या है चीन का नया युद्ध कानून?

नए कानून का मुख्य मकसद युद्ध की स्थिति में देश के संसाधनों को तेजी से सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों के लिए इस्तेमाल करना है. इसके तहत केवल सेना ही नहीं, बल्कि नागरिकों और निजी क्षेत्र को भी रक्षा तैयारियों से जोड़ा गया है.

नागरिकों को भी करना पड़ सकता है काम

युद्ध या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े संकट के समय कुछ नागरिकों को रक्षा और लॉजिस्टिक्स से जुड़े काम करने के लिए लगाया जा सकता है. कानून के मुताबिक 18 से 60 साल की उम्र के पुरुष और 18 से 55 साल की महिलाएं कुछ परिस्थितियों में राष्ट्रीय रक्षा से जुड़े कामों के दायरे में आ सकती हैं. इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर बड़ी संख्या में लोगों की सेवाएं ली जा सकती हैं.

टेक कंपनियों पर बढ़ेगा सरकार का अधिकार

नए कानून में टेक्नोलॉजी सेक्टर को भी खास महत्व दिया गया है. युद्ध की स्थिति में AI, ड्रोन, साइबर सिस्टम, डेटा और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल राष्ट्रीय रक्षा के लिए किया जा सकता है. इसका असर निजी टेक कंपनियों पर भी पड़ सकता है. कंपनियों की तकनीकी क्षमता और संसाधनों को जरूरत के मुताबिक रक्षा से जुड़े कामों में लगाया जा सकता है.

आम लोगों के संसाधन भी लिए जा सकते हैं

कानून के तहत जरूरत पड़ने पर नागरिकों की गाड़ियों, उपकरणों, इमारतों और दूसरी सुविधाओं का इस्तेमाल रक्षा से जुड़े कामों के लिए किया जा सकता है. यानी युद्ध जैसी स्थिति में सरकार के पास देश के निजी संसाधनों को इस्तेमाल करने के ज्यादा अधिकार होंगे.

आदेश नहीं मानने पर कार्रवाई

अगर कोई व्यक्ति या संगठन राष्ट्रीय रक्षा की तैयारी से जुड़े कामों में सहयोग करने से इनकार करता है या जानबूझकर इसमें देरी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. कुछ मामलों में जुर्माने का भी प्रावधान है.

टेक्नोलॉजी पर इतना जोर क्यों?

चीन के इस कानून में टेक्नोलॉजी पर खास ध्यान दिया गया है. इसका एक बड़ा कारण ‘डुअल यूज टेक्नोलॉजी’ है. इसका मतलब ऐसी तकनीक से है जिसका इस्तेमाल आम लोगों के साथ-साथ सैन्य कामों में भी किया जा सकता है.

AI, ड्रोन, डेटा सिस्टम और साइबर टेक्नोलॉजी इसके उदाहरण हैं. इन तकनीकों का इस्तेमाल सामान्य समय में नागरिक कामों के लिए किया जाता है, लेकिन युद्ध के दौरान इन्हें सैन्य जरूरतों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसी वजह से चीन अपने निजी टेक सेक्टर को भी राष्ट्रीय रक्षा व्यवस्था से जोड़ रहा है.

भारत के लिए क्यों अहम है चीन का यह कानून?

चीन के इस बदलाव का असर भारत की रणनीतिक सोच पर भी पड़ सकता है. खासकर भारत-चीन सीमा पर इसका महत्व बढ़ जाता है. अगर युद्ध या लंबे सैन्य तनाव की स्थिति बनती है, तो चीन अपने नागरिक संसाधनों, टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल तेजी से कर सकता है. इससे चीन को सीमा पर लंबे समय तक सैन्य और लॉजिस्टिक दबाव बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

इसलिए चीन का नया कानून केवल सेना में ज्यादा लोगों को जोड़ने तक सीमित नहीं है. यह देश के नागरिकों, टेक कंपनियों, अर्थव्यवस्था और दूसरे संसाधनों को युद्ध की जरूरत के हिसाब से एक साथ इस्तेमाल करने की व्यवस्था को मजबूत करता है.

ये भी पढ़ें- हिमाचल से सिक्किम तक खतरे में सैकड़ो झीलें, फटीं तो मच सकती है भयंकर तबाही! सरकार ने शुरू की निगरानी