'AK-47 लाओ और ले जाओ 4 लाख', किस राज्य सरकार ने किया ऐलान और क्यों?

छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ा कदम देखने को मिला है. हाल ही में 18 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. खास बात यह है कि आत्मसमर्पण के दौरान केवल इनाम की राशि ही नहीं.

Chhattisgarh Government Policy for Naxalite surrender gaving cash to them
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छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ा कदम देखने को मिला है. हाल ही में 18 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. खास बात यह है कि आत्मसमर्पण के दौरान केवल इनाम की राशि ही नहीं, बल्कि उनके द्वारा जमा कराए गए हथियारों के बदले भी सरकार उन्हें नकद राशि देती है. यह पहल राज्य सरकार की संशोधित नक्सल सरेंडर नीति 2025 का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य है – हिंसा को हतोत्साहित करना और ज्यादा से ज्यादा नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना.

क्यों दिया जाता है हथियारों पर इनाम?

सरकार का मानना है कि आत्मसमर्पण करते वक्त यदि नक्सली अपने साथ हथियार भी सौंपते हैं, तो इससे भविष्य में हिंसा की घटनाएं रोकने में मदद मिलती है. ऐसे में हथियारों की कीमत तय कर दी गई है, ताकि नक्सली स्वेच्छा से अपने पास मौजूद सभी हथियार सरकार को सौंप दें. यह रणनीति सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है.

कौन-से हथियार पर कितना इनाम?

सरेंडर करने वाले नक्सली अगर AK-47 जैसे खतरनाक हथियार लाते हैं, तो उन्हें उसके लिए अलग से नकद इनाम मिलता है. नीचे कुछ प्रमुख हथियारों की सूची और उनके निर्धारित इनाम की जानकारी दी गई है:

हथियार    पहले का इनाम    संशोधित इनाम (2025)

  • LMG    ₹4.5 लाख    ₹5 लाख
  • AK-47    ₹3 लाख    ₹4 लाख
  • SLR राइफल    ₹1.5 लाख    ₹2 लाख
  • 303 राइफल    ₹75,000    ₹1 लाख
  • 12 बोर बंदूक    ₹30,000    ₹30,000
  • 2'' मोर्टार    ₹2.5 लाख    ₹2.5 लाख
  • पिस्टल/रिवॉल्वर    ₹20,000    ₹20,000
  • वायरलेस सेट    ₹5,000    ₹5,000
  • विस्फोटक पदार्थ    ₹1,000/किलो    ₹1,000/किलो
  • ग्रेनेड/जिलेटिन    ₹500    ₹500
  • एम्युनिशन    ₹5 प्रति यूनिट    —

सरेंडर पर क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं?

तत्काल ₹50,000 नकद. तीन साल के लिए एफडी में जमा मोटी राशि. जमीन खरीदने और रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता. ट्रेनिंग, शिक्षा और स्किल डवलपमेंट की सुविधा. सरकारी योजनाओं का लाभ, जैसे. आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज. पीएम आवास योजना के तहत मकान निर्माण. मुफ्त राशन की सुविधा

नक्सली क्यों छोड़ रहे हैं हिंसा का रास्ता?

सरकार द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यों और पुनर्वास योजनाओं से प्रभावित होकर कई नक्सली अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं. आत्मसमर्पण करने वाले कई नक्सलियों ने स्वीकार किया कि सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं अब गांवों तक पहुंच रही हैं, जिससे उन्हें महसूस हुआ कि हिंसा के बजाय विकास ही बेहतर विकल्प है.

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