CDS General Anil Chauhan: भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने उत्तराखंड के देहरादून स्थित गढ़ी कैंट में आयोजित 'देवभूमि मेगा वेटरन्स रैली' में भाग लेते हुए देश के पूर्व सैनिकों को संबोधित किया. उन्होंने इस मौके पर पूर्व सैनिकों की भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें सशस्त्र बलों की छवि को मजबूत करने के लिए सोशल मीडिया पर रचनात्मक और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी.
यह कार्यक्रम मुख्यालय उत्तराखंड सब एरिया द्वारा आयोजित किया गया था और इसमें भारी संख्या में पूर्व सैनिक, उनके परिजन और स्थानीय सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे. यह आयोजन जसवंत सिंह ग्राउंड में किया गया था, जो गढ़ी कैंट क्षेत्र का एक प्रमुख स्थल है.
"सोशल मीडिया पर सोच-समझकर रखें राय"
अपने संबोधन में जनरल अनिल चौहान ने सोशल मीडिया की भूमिका पर विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि पूर्व सैनिकों को चाहिए कि वे सोशल मीडिया पर ऐसा कोई भी बयान न दें जिससे भारतीय सेना या सशस्त्र बलों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचे. उन्होंने कहा कि हमारे देश में अक्सर रणनीतिक सोच की कमी देखने को मिलती है. लेकिन पूर्व सैनिक, जिनके पास अनुभव और अनुशासन दोनों है, अगर सोशल मीडिया पर सकारात्मक और संतुलित विचार रखें, तो यह न केवल सैन्य छवि को मज़बूत करेगा, बल्कि युवाओं को भी प्रेरित करेगा.
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाली पीढ़ी के सैनिकों की गुणवत्ता इस बात से प्रभावित होती है कि हम आज अपने पूर्व सैनिकों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं. अगर समाज पूर्व सैनिकों को सम्मान और सहयोग देता है, तो युवा भी सशस्त्र बलों में शामिल होने को लेकर अधिक प्रेरित होंगे.
वेटरन सेल की शुरुआत और उसका विकास
जनरल चौहान ने 2013 में वेटरन सेल की शुरुआत का ज़िक्र करते हुए बताया कि आज यह संरचना भारतीय सेना में एक पूर्ण वेटरन्स निदेशालय (Directorate of Indian Army Veterans - DIAV) के रूप में कार्य कर रही है. उन्होंने इस सेल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि यह मंच पूर्व सैनिकों के कल्याण, संवाद और पुनर्संस्करण के लिए एक सशक्त माध्यम बन चुका है.
उत्तराखंड: अध्यात्म और वीरता का संगम
उत्तराखंड की सैन्य परंपरा और आध्यात्मिक विरासत की तारीफ करते हुए सीडीएस ने राज्य को "देवभूमि" कहकर संबोधित किया. उन्होंने कहा कि यह भूमि केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि देशभक्ति और सैन्य बलिदानों के लिए भी जानी जाती है. यह जगह उस साहस और श्रद्धा का संगम है, जो भारत को विशेष बनाता है.
उत्तराखंड न केवल बड़ी संख्या में सैनिकों और अधिकारियों की जन्मस्थली है, बल्कि यहां की जनजातियों और समुदायों का सेना से गहरा जुड़ाव है. इस राज्य ने हर युद्ध और संघर्ष में देश के लिए अपना बहुमूल्य योगदान दिया है.
सीमावर्ती क्षेत्रों में मॉडल को उत्तराखंड में लागू करने की योजना
रैली के दौरान जनरल चौहान ने एक नई आर्थिक पहल की भी घोषणा की, जो उत्तराखंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है. उन्होंने बताया कि सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में जो मॉडल सफल रहे हैं, उन्हें अब उत्तराखंड में भी लागू किया जाएगा.
इस पहल के तहत स्थानीय डेयरी और पशुपालन उत्पादों की खरीद की जाएगी. ताजे राशन की आपूर्ति स्थानीय सहकारी समितियों के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी. यह पूरी प्रक्रिया स्थानीय समुदायों और पूर्व सैनिकों को आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में काम करेगी. सीडीएस ने कहा कि इस तरह की आर्थिक गतिविधियों से न केवल स्थानीय किसानों और व्यवसायों को फायदा होगा, बल्कि सेना और समाज के बीच सहयोग भी बढ़ेगा.
पूर्व सैनिकों के कल्याण पर विशेष ध्यान
रैली के दौरान कई कल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी भी पूर्व सैनिकों को दी गई. इसमें हेल्थकेयर, पेंशन, पुनः नियुक्ति के अवसर, और कौशल विकास जैसे विषय शामिल थे. साथ ही पूर्व सैनिकों के परिजनों के लिए भी कुछ योजनाएं साझा की गईं.
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