Caller Name Display: अब जल्द ही मोबाइल फोन पर कॉल आने पर केवल नंबर ही नहीं, बल्कि कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम भी स्क्रीन पर दिखेगा. यह कदम फोन कॉल से जुड़ी पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, दूरसंचार विभाग (DoT) ने सभी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे इस नई सुविधा को देश के किसी एक सर्किल में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करें.
सूत्रों के अनुसार, DoT ने कंपनियों को आदेश दिया है कि वे 7 दिनों के भीतर किसी एक सर्किल में यह सुविधा शुरू करें. इस प्रोजेक्ट के तहत जब किसी यूज़र को कॉल आएगी, तो नंबर के साथ-साथ कॉलर का नाम भी फोन स्क्रीन पर दिखेगा.
कंपनियां अपनी पसंद का सर्किल चुन सकेंगी और वहां लगभग 60 दिनों तक यह सर्विस ट्रायल के रूप में चलेगी. इस अवधि के दौरान टेलीकॉम कंपनियों को हर हफ्ते अपनी प्रगति रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी. सरकार इन रिपोर्ट्स के आधार पर तकनीकी और गोपनीयता से जुड़ी समस्याओं का मूल्यांकन करेगी ताकि इस सेवा को बाद में पूरे देश में लागू किया जा सके.
यह सुविधा सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है. इससे स्पैम कॉल, फ्रॉड और फर्जी नंबरों से लोगों को मिलने वाली परेशानियों में कमी आने की उम्मीद है.
वोडाफोन आइडिया के लिए आई बड़ी राहत
इसी बीच, वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (Vi) के लिए अदालत का एक हालिया फैसला बड़ी राहत लेकर आया है. कंपनी पर करीब 5,606 करोड़ रुपये के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाये का मामला चल रहा था. अब अदालत ने सरकार को इस बकाये पर पुनर्विचार और सामंजस्य की प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया है.
वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला वोडाफोन आइडिया के अस्तित्व के लिए जीवनरेखा साबित हो सकता है. ब्रोकरेज फर्म सिटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस निर्णय से कंपनी को आंशिक राहत मिल सकती है, जैसे बकाये में आंशिक माफी या भुगतान की समयसीमा में विस्तार.
निवेशकों का बढ़ सकता है भरोसा
वोडाफोन आइडिया इस समय करीब 25,000 करोड़ रुपये के बैंक वित्तपोषण की प्रक्रिया में है, लेकिन AGR विवाद के कारण यह फंडिंग रुकी हुई थी. कोर्ट के फैसले के बाद निवेशकों का कंपनी पर भरोसा बढ़ सकता है और वित्त जुटाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है.
इससे न केवल कंपनी को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि सरकार की मौजूदा हिस्सेदारी में भी धीरे-धीरे कमी आ सकती है. विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला पूरे दूरसंचार क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है, खासकर तब जब भारत 5G नेटवर्क विस्तार और नई तकनीकों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
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