2036 ओलंपिक्स की मेजबानी की कैसी चल रही है तैयारी? भारत 24 के मंच पर केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने बताया पूरा रोडमैप

भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Building Bharat Leadership Summit' में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने विकसित भारत में महिलाओं, बच्चियों और युवाओं के योगदान पर चर्चा की. साथ ही उन्होंने  2036 में भारत के द्वारा ओलंपिक्स की मेजबानी को लेकर चल रहे तैयारी को लेकर भी विस्तार से अपनी बात रखी. 

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भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Building Bharat Leadership Summit' में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने विकसित भारत में महिलाओं, बच्चियों और युवाओं के योगदान पर चर्चा की. साथ ही उन्होंने  2036 में भारत के द्वारा ओलंपिक्स की मेजबानी को लेकर चल रहे तैयारी को लेकर भी विस्तार से अपनी बात रखी. 

2047 में विकसित भारत बनाने में महिलाओं, बच्चियों और युवाओं को आप किस तरीके से देखते हैं?

हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी नरेंद्र भाई मोदी जी की हमेशा से यही कोशिश रही और हमेशा वो कहते हैं अपने स्पीच में कहते हैं कई बार आपने देखा भी होगा कि विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए आज की युवा जो पीढ़ी है उन्हें हमें साथ में लेकर उनके विचार को साथ में लेकर हमें इस देश को विकसित बनाना है. इसलिए हमारे मंत्रालय के माध्यम से यूथ मिनिस्ट्री एंड स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री के माध्यम से हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि आज के हमारे देश के युवाओं को हम कैसे एक साथ जोड़ें? उनको सरकार के साथ हम कैसे जोड़ें कि जिसके माध्यम से उनके विचारों से हम इस देश को आगे बढ़ा सकते हैं. जो अभी लेटेस्ट बजट हमारा हुआ हमारे फ़ाइनेंस मिनिस्टर ने भी बजट की शुरुआत में ही कहा कि जो विकासित भारत यंग लीडर डायलॉग्स जो हमने पिछले साल से यह सीरीज शुरू की जो अभी दो साल हुए उसको तो उसमें से जो प्रेजेंटेशन हमारे देश के युवाओं ने जो आदरणीय प्रधानमंत्री जी के सामने रखे थे विकसित भारत को लेकर तो उन विचारों को भी इस बजट में शामिल किया गया. 

तो मैं ये कहना चाहूंगी कि आप युवाओं के विचार को लेकर जब आगे बढ़ोगे इस देश के डेवलपमेंट के लिए तो डेफिनेटली हम विकसित भारत का सपना हम पूरा कर पाएंगे. और जहां तक बात महिलाओं की आती है तो मैं कहना चाहूंगी कि महिलाओं को भी उतनी अपॉर्चुनिटी हम देने की कोशिश कर रहे हैं. इसमें दो फ्रैक्शन है. एक तो यूथ मिनिस्ट्री के प्रोग्राम हमारे अलग से चलते हैं और उसके साथ ही हम स्पोर्ट्स के प्रोग्राम भी अलग से चला रहे हैं. और स्पोर्ट्स में रिसेंटली अभी वुमस डे अभी 8 मार्च को हो चुका है. तो इस बार हमने कोशिश की जो अस्मिता लीग स्पोर्ट्स मंत्रालय का ही एक भाग है जो आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने 2021 में उसकी शुरुआत की थी और उनका यही इंटेंशन था कि स्पोर्ट्स सेक्टर में भी हम ज्यादा से ज्यादा महिलाओं का पार्टिसिपेशन बढ़ाएं और से सबसे अहम बात कि हम ग्रास रूट तक ले जाएं. एक अच्छा टैलेंट तो हमें ग्रास रूट से मिलेगा ही मिलेगा जो हमारे देश का आगे का भविष्य रहेगा. 

हमारे देश के लिए खेल सकेंगे. मेडल ला सकेंगे. लेकिन उसके अला अलावा ही हमें स्पोर्ट्स कल्चर को भी बढ़ाना है. क्योंकि हमारे लिए फिजिकल हेल्थ मेंटल हेल्थ काफी जरूरी है. और जब हम विकसित भारत की बात करते हैं जब तक हम मेंटली फिजिकली फिट नहीं रहेंगे तब तक हम इस देश को विकसित नहीं बना सकते. तो स्पोर्ट्स एक बड़ा माध्यम है इस देश को विकसित बनाने के लिए. जी. इसलिए खास करके हमने 8 मार्च के अवसर पे इस बार पूरे देश में नियर अबाउट 250 डिस्ट्रिक्ट में हमने अस्मिता लीग्स करवाई. जहां से छोटे बच्चों से लेके तो बड़े महिलाओं ने महिलाओं ने भी इसमें पार्टिसिपेशन किया और राउंड अबाउट 2 लाख महिलाओं ने इसमें पार्टिसिपेशन किया. तो मुझे लगता है कि भारत सरकार और स्पोर्ट्स मंत्रालय, यूथ मंत्रालय पूरी तरह से कोशिश कर रहे हैं कि हम यूथ को और स्पोर्ट्स को पूरी तरह से आगे बढ़ाएं. उस तरह से अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से हम प्रयास कर रहे हैं और काफी अच्छे रिजल्ट भी हमें दिखाई दे रहे हैं. स्पोर्ट्स को एक नया फ्यूचर की तरफ अभी हम देख रहे हैं और काफी अच्छा परफॉर्म भी हमारे देश के एथलीट्स और सभी महिलाएं भी और यूथ भी करते हुए दिखाई दे रहे हैं. 

योजनाएं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए क्या कुछ रोड मैप आपने तैयार किया है?

पिछले ही सेशन में हमने खेलो इंडिया नीति हमने यहां पे बनाई और उसके बाद स्पोर्ट्स गवर्नर बिल्स भी हम लाए. जिसका यही मकसद है कि हम राज्य सरकार के साथ मिलके और जो कॉर्पोरेट सेक्टर है उनके साथ मिलके हम स्पोर्ट्स को ग्रास रूट तक कैसे ले जा सकते हैं. क्योंकि आपने देखा होगा कि खेलो इंडिया एक ऐसा हमारा स्पोर्ट्स का इवेंट बना कि जिसके माध्यम से आज हर गांव का बच्चा खेलो इंडिया के बारे में जानता है. और उससे और बड़े स्केल पे हम कैसे बढ़ा सकते हैं. इसलिए हमने खेलो अह खेलो भारत नीति के माध्यम से टैलेंट आइडेंटिफिकेशन हम कैसे कर पाएंगे. स्पोर्ट्स साइंस को हम आगे कैसे बढ़ा सकते हैं? अ उसके बाद स्पोर्ट्स गुड मैन्युफैक्चर को हम आगे कैसे बढ़ा सकते हैं? स्पोर्ट्स टूरिज्म को हम कैसे आगे बढ़ा सकते हैं? 

और खास करके महिलाओं को स्पोर्ट्स के साथ हम कैसे जोड़ सकते हैं? इसलिए यह पूरे कंपोनेंट में हम काम करने की कोशिश कर रहे हैं और खेलो इंडिया मिशन की भी इस बार शुरुआत की है जो खेलो इंडिया का ही एक नया वर्जन है कि खेलो इंडिया मिशन कि जिसके माध्यम से हम हर ये प्रयास कर रहे हैं कि हर डिस्ट्रिक्ट में हम एक स्पोर्ट्स स्कूल खोल पाए राज्य सरकार के साथ मिलके कि जिसके माध्यम से वो डिस्ट्रिक्ट का जितना भी टैलेंट है स्पोर्ट्स को लेके तो वो स्कूल में उन्हें अच्छे से ट्रेनिंग दिया जाए. उसके बाद स्टेट एक्सीलेंस सेंटर हम बनाएं. वह भी राज्य सरकार के साथ मिलके और केंद्र सरकार उसे सपोर्ट करेगी और फिर तीसरा आएगा कि जो हमारे केंद्र सरकार के जो स्पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के जो हमारे स के सेंटर है और उसके साथ ही ओलंपिक सेंटर भी हम बनाने जा रहे हैं कि जो एलिट एथलीट है जो डिस्ट्रिक्ट से लेके तो नेशनल तक आ रहे हैं उनका वहां पर ट्रेनिंग दिया जाएगा. 

कोचेस को अभी पूरे रिफॉर्म के साथ हम आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और काफी अच्छा रिस्पांस हर स्टेट की तरफ से भी हमें दिखाई दे रहा है और खास करके एक बात कहना चाहूंगी कि स्पोर्ट्स टूर टूरिज्म को हम बढ़ाने की काफी कोशिश कर रहे हैं कि जिसके माध्यम से जो हमारे स्पोर्ट्स का इंफ्रास्ट्रक्चर है या हमारे ऐसे वेन्यू है कि जहां पे हम स्पोर्ट्स का टूरिज्म काफी अच्छे से बढ़ा सकते हैं. लोग मैच देखने लिए देखने के लिए आए तो ऑटोमेटिकली वहां की इकोसिस्टम या इकोनॉमिकल सिस्टम भी वहां पे बढ़ती है. वहां पे ग्रोथ दिखाई देता है. रिसेंटली एक डेढ़ महीने पहले ही हमने पुणे में ग्रैंड टूर साइकिल का इंटरनेशनल कंपटीशन वहां पे करवाया. 

नियर अबाउट 25 कंट्रीज के वहां पे साइकिलिस्ट जो इंटरनेशनल साइकिलिस्ट है उन्होंने पार्टिसिपेशन किया. उनको पहली बार यहां आके महसूस हुआ कि इतना भी क्राउड यहां पे है जो हमारे कंपटीशन को देखने के लिए आया है. नियर अबाउट 15 लैस लोग थे मतलब लास्ट दिन कि इतने लोगों ने वहां पे ये कंपटीशन दिखा तो उनको भी एक ऐसा महसूस हुआ कि इतना अच्छे लेवल पे हम ऑर्गेनाइज इसको कर सकते हैं. तो कोशिश यही चल रही है कि स्पोर्ट्स को एक बड़ा सिस्टम बना के हम विकसित भारत के संकल्प हम पूरा कर सकते हैं और पूरी आशा है कि जिस तरह से आदरणीय प्रधानमंत्री जी का जो विज़न है स्पोर्ट्स को लेके आने वाले 10 साल में वो पूरा करते हुए हम दिखाई देंगे. 

 2036 में भारत ओलंपिक्स की मेजबानी कर रहा है. इसको लेकर हम कितने तैयार हैं?

मैंने अभी पहले ये सब चीजें आपको बताई जो बातें मैंने रखी यहां पे वो उसी धरती पर हम कर रहे हैं कि आने वाले 10 साल में हम स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को स्पोर्ट्स फैसिलिटी को या जो भी पूरा इको सिस्टम है वो हम किस तरह से हम डेवलप कर पाएंगे और उसी लाइन पे हम सभी राज्य सरकार के साथ हम मिलके काम कर रहे हैं. काफ़ी नई पॉलिसी है. हर राज्य अपनी-अपनी तरफ़ से भी कोशिश कर रहा है कि वहां के उनके इंफ़्रास्ट्रक्चर को और कैसे वह मजबूत कर पाए और जो हमारी अह पूरी आम जनता है उनको भी हम स्पोर्ट्स के साथ कैसे जोड़ पाए? इसलिए पूरी कोशिश सरकार की तैयार हो चुकी है और उस तरह से हम कदम भी उठा रहे हैं. 

यूथ फेस्टिवल कार्यक्रम का आयोजन और प्रतिनिधित्व आपने किया. अब उस टारगेट को कैसे पूरा करना चाहते हैं? खासतौर पर जो महिलाएं या बच्चियां हैं, लड़कियां हैं. 

विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग्स का मकसद यह है कि जो यूथ फेस्टिवल हम जो सेलिब्रेशन करते हैं कि जैसे मैंने पहले भी बताया कि इस बार के बजट में आदरणीय हमारे फाइनेंस मिनिस्टर ने इस बात को रखा जो कि बहुत अहम बात है हमारे लिए और इसका एक मैसेज पूरे देश के युवाओं को एक देने का काम आदरणीय फाइनेंस मिनिस्टर ने किया आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने किया है कि हमारे देश का विकास और विकसित भारत का संकल्प हमारे देश के युवाओं के विचारों के साथ करते हुए हम दिखाई दे रहे हैं. और जो विकसित भारत यंग डी अह यंग लीडर डायलॉग्स की जो शुरुआत है पिछले साल से हमने की कि जो हमारा यूथ मिनिस्ट्री का माय भारत पोर्टल है जिस पोर्टल के माध्यम से हम पूरे देश के युवाओं को जोड़ने का काम कर रहे हैं. 

नियर अबाउट आज 2 करोड़ 15 लाख युवा माया भारत पोर्टल के ऊपर रजिस्टर हैं. विकसित भारत को लेकर हम उन्हें अलग-अलग विषय के ऊपर उन्हें क्विज कंपटीशन हम लेते हैं. इस बार नियर अबाउट 50 लैक्स यूथ ने पार्टिसिपेशन उसमें किया और फिर स्टेज बाय स्टेज उनका सिलेक्शन होता जाता है और दिल्ली में ah नौ जनवरी मतलब चार दिन के लिए 9 से 12 जनवरी के भीतर यहां पे 3000 युवाओं को हम पूरे इंडिया से हर स्टेट से हमें उन्हें बुलाते हैं. वहां उनका ओरिएंटेशन होता है. प्रेजेंटेशन होता है और 12 जनवरी के दिन आदरणीय खुद प्रधानमंत्री जी उस प्रेजेंटेशन में वहां पे रहते हैं. सभी युवाओं का प्रेजेंटेशन वहां पे सुना जाता है और उस प्रेजेंटेशन में से जो चीजें सरकार को लगती है कि यह हम कर सकते हैं यह हमारे देश के भविष्य के लिए जरूरी है तो उन विचारों को हम बजट में शामिल करके इस देश इस देश को विकास के लिए गति देने का प्रयास कर रहे हैं. 

तो मुझे लगता है कि आज युवाओं के मन में यह बात है कि आज सरकार हमारे विचार सुन रही है. सरकार आज हमारे साथ है और हम हर कॉलेज में जाके यह बात रखने का प्रयास कर रहे हैं युवा कनेक्ट प्रोग्राम के माध्यम से और वह हम मतलब हम खुद नहीं रख रहे वो हमारे युवा ही बात रख रहे हैं कि किस तरह से सरकार आज के युवाओं को लेकर आगे बढ़ रही है. उनके विचारों को लेकर आगे बढ़ रही है. तो मुझे लगता है कि एक काफी अच्छी कोशिश हम करने की कोशिश कर रहे हैं कि जिसके माध्यम से आज युवा हमारे साथ जुड़ने के लिए तैयार हैं. 

सरकार और GenZ के बीच में समन्वय को लेकर के आपने कभी सोचा है क्या? 

 इसमें मेरा जो ऑब्जरवेशन है कि मैं कहना चाहूंगी कि मतलब आदरणीय हमारे देश के प्रधानमंत्री जी का विज़ और उनके विज़न से जो आज हम कर रहे हैं वो काफी आगे का विज़न है. जो आज अगर हम ग्लोबली अगर सिचुएशन देखें कि जेंजी को लेके किस तरह से आज अलग-अलग देशों में प्रॉब्लम को इशू मतलब कैसे किस तरह से प्रॉब्लम फेस किए जा रहे हैं वहां के गवर्नमेंट के साथ. लेकिन हमारे देश में वो स्थिति नहीं है. आज हमारे देश का युवा उसको इतना पता है कि मुझे मेरे देश के लिए काम करना है. मेरी भी जिम्मेदारी है और उसी को ध्यान में रखते हुए हम भी यही कोशिश कर रहे हैं कि आज का हमारा युवा रिस्पांसिबल बने अपने देश के प्रति और उसे ये हमेशा एहसास होना चाहिए कि मेरा कर्तव्य पहले मेरे देश के लिए भी है. 

और यही प्रोग्राम जैसे मैंने पहले कहा कि विकसित भारत यंग लीडर डाल के जब हम बात करते हैं तो यही हम चीजें इस प्रोग्राम के माध्यम से आज के युवाओं के भीतर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं और युवाओं का सबसे पहला चैलेंज रहता है कि मुझे कोई सुनने वाला चाहिए. जी. आज आज के युवाओं के लिए बहुत बड़ी अपॉर्चुनिटी कि आज उनकी बातें आज सरकार सुनने के लिए रेडी है. उनके विचारों से इस देश को आगे ले जाने के लिए आज सरकार कोशिश कर रही है. तो और काफ़ी अच्छा रिस्पांस भी जी. युवाओं की तरफ़ से मिल रहा है. और दूसरी चीज जो आदरणीय प्रधानमंत्री जी चाहते हैं कि हम स्पोर्ट्स कल्चर को आगे बढ़ाएं. जी. क्योंकि जो आपने बात की कि आज घर में कोई सुनने वाला नहीं है. तो यही एक दिक्कत है कि आज की जनरेशन या आज की सिचुएशन हमारे देश की जो बन चुकी है कि आज हस्बैंड वाइफ वर्किंग पे रहते हैं. जॉइंट फैमिली कल्चर अभी हमारा धीरे-धीरे कम हो रहा है और कहीं ना कहीं आज का युवा एंजाइटटी डिप्रेशन की तरफ जा रहा है. 

एडिक्शन की तरफ जा रहा है. तो स्पोर्ट्स के माध्यम से हम यही कोशिश कर रहे हैं कि इन सब चीजों से हम युवाओं को दूर रखें. स्पोर्ट्स के माध्यम से आज वो कम्युनिटी के साथ जुड़ने मतलब जुड़ने की बातें वो सुनता है या जुड़ने की कोशिश वो करता है. आज टाइम मैनेजमेंट वो सीखता है. हारना जीतना वो स्पोर्ट्स के माध्यम से सीखता है. मेंटली फिजिकली फिट रहना वो सीखता है. सभी लोगों के बीच में उसे कैसे लीडरशिप डेवलप करनी है वो आज वो सीख रहा है. और मुझे लगता है आज की युवाओं के लिए यही जरूरत है. अगर हम ये सभी चीजें स्पोर्ट्स के माध्यम से और यूथ मिनिस्ट्री के माध्यम से अगर उन्हें उपलब्ध करवा रहे हैं तो मुझे नहीं लगता कि आगे चलके हमें कुछ जेंजी के बारे में हमें बहुत सोचने की जरूरत है. तभी GenZ हमारी देश की ताकत है. 

आप जलगांव में थी. आप इवेंट में पहुंचती हैं और आपने कहा कि अधिकारी बहुत ज्यादा ध्यान नहीं देते जब जनप्रतिनिधि पहुंचते हैं. हुआ क्या था वहां पे?

एक्चुअली हर मतलब जो मेंबर ऑफ पार्लियामेंट हम रहते हैं कि हमें अधिकार है कि दिशा की हम बैठक लेते हैं और उस दिशा का बैठक का प्रोटोकॉल यही है कि जो भी केंद्र सरकार के माध्यम से योजना है उस योजना के ऊपर हम मॉनिटरिंग करें. सही तरह से योजना पहुंच रही है नहीं पहुंच रही है. जो भी दिक्कतें टेक्निकल आती है तो हम उन्हें सपोर्ट करते हैं. उस मीटिंग में ऐसा कोई ज्यादा इशू नहीं था. सिर्फ इतना ही था कि जो भी सेंट्रल स्पोंसर स्कीम है कोई भी स्टेट में रहे या कोई भी डिस्ट्रिक्ट में रहे तो वहां का जो प्रशासन है उनकी भी रिस्पांसिबिलिटी बनती है कि वहां के सांसद को बुला के या सांसद से कंसल्ट से वो प्रोग्राम किए जाए या उनका भी व्यू उसमें लेना जरूरी है क्योंकि आज हम भी लोक प्रतिनिधि हैं या हम भी जनता के बीच में से हो के आते हैं तो हमारे पास भी काफी डिमांड्स रहती है. 

काफी क्वेश्चंस लोगों के रहते हैं. तो यह कहीं ना कहीं कम्युनिकेशन गैप जो मुझे दिखाई दिया उसके रिगार्डिंग मैंने वहां पर बात रखी क्योंकि कोई भी क्षेत्र का विकास वहां के एमएलए जितना इंपॉर्टेंट है उसके साथ एमपी भी उतना ही इंपॉर्टेंट रहता है. एक आखिरी सवाल हालांकि मैंने कह दिया था एक महिला होते हुए पॉलिटिक्स में जगह बनाना ये कितना मुश्किल होता है? एक महिला होते हुए अगर आप इसका जवाब दे सके क्योंकि यूथ यहां बैठे हैं, लड़कियां बैठी है और यह समझना हर कोई चाहता है. हाउ डिफिकल्ट द सिचुएशन इज फॉर अ वूमेन? मैं कहूंगी जितना आपके लिए मुश्किल है उतना मेरे लिए भी मुश्किल है. 

क्योंकि क्योंकि कोई भी क्षेत्र में महिलाओं के लिए इतना इजी नहीं रहता है. ठीक है? उन्हें अपॉर्चुनिटी मिलती है लेकिन उसके साथ जिस तरह से हमारे अह देश की संस्कृति है या हमारे अह जो देश का एक स्ट्रक्चर है खास करके कि हमें रिस्पॉन्सिबिलिटी पहले से ही लेनी पड़ती है. क्योंकि आज हम कितने भी बड़े पोजीशन पर चले जाएं. लेकिन घर की रिस्पांसिबिलिटी हमें ही लेनी पड़ती है. बच्चों की रिस्पांसिबिलिटी हमें ही लेनी पड़ती है. और इस सभी रिस्पांसिबिलिटी के साथ हम कोशिश करते रहते हैं कि हम अपने क्षेत्र में बेस्ट कर पाएं. इसको रिकग्नाइज बहुत कम बार किया जाता है तो भी हम उसके बीच में भी हम कोशिश करते रहते हैं कि हम अपना बेस्ट दे पाए और दिक्कतें हैं लेकिन भगवान ने इतनी ताकत तो हमें दी है कि कितनी भी दिक्कतें आ गए तो भी उसके बावजूद भी हम अपना बेस्ट देने की कोशिश करते ही है. 

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