नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार की राजनीति कौन संभालेगा? भारत 24 के मंच पर शाहनवाज हुसैन ने दिया जवाब

भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Building Bharat Leadership Summit' में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने बिहार की राजनीति पर विस्तार से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने चिराज पासवान को लेकर भी अपनी रखी.

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भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Building Bharat Leadership Summit' में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने बिहार की राजनीति पर विस्तार से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने चिराज पासवान को लेकर भी अपनी रखी. साथ ही भाजपा के साथ अल्पसंख्यकों के जुड़ाव पर भी बात की. तो चलिए अब आपको बताते हैं कि इस खास बातचीत में शाहनवाज हुसैन ने किन महत्वपूर्व बिंदुओं पर जोर देते हुए अपनी बात रखी.  

नीतीश कुमार बिहार से राज्यसभा जा रहे हैं. वो राज्यसभा में रहेंगे तो बिहार की राजनीति कौन संभालेगा?

नीतीश कुमार जी राज्यसभा में जा रहे हैं. अपनी मर्जी से जा रहे हैं. उनके मन में यह बहुत पहले से इच्छा थी कि वह चारे हाउस के मेंबर बने. तीन साल कबल भी उन्होंने यह बात कही थी जो बिहार में खबरों में था. इस बार उन्होंने तय किया कि बिहार की बहुत सेवा की है और वह राज्यसभा में जा रहे हैं. लेकिन राज्यसभा में जाने का मतलब यह नहीं है कि वो बिहार की राजनीति से अलग हो रहे हैं. अलग नहीं हो रहे हैं. उनकी बड़ी पार्टी है. उनके पार्लियामेंट में भी बहुत सारे मेंबर हैं. 

स्टेट में भी उनकी पार्टी बड़ी पार्टी है. हम और एनडीए की सरकार रहेगी. उन्हीं की मार्गदर्शन में वह सरकार चलेगी भी. क्योंकि बिहार को जिससे गड्ढे से निकालकर वह लाए हैं. बिहार की मैं आज कहूंगा कि आज के दौर के वो विश्वकर्मा है. जिस बिहार के बारे में परसेप्शन खराब था. उस पूरे परसेप्शन को बदलने का काम किया. मेरा सौभाग्य है कि मैंने केंद्र सरकार में भी उनके साथ काम किया है, मंत्री के तौर पर और राज्य सरकार में भी मैंने मंत्री के तौर पर उनके साथ काम किया है. तो मैंने देखा है कि वह काम के प्रति कितने जागरूक हैं. लेकिन जब वह राज्यसभा में आ जाएंगे तो फिर कोई नहीं. 

बिहार की जनता किसी और चेहरे को एक्सेप्ट करेगी?

जो भी आएगा वो नीतीश कुमार के काम को आगे बढ़ाएगा. हम और नीतीश कुमार की पार्टी उस पार्टी के वह राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं जनता दल यूनाइटेड के वह उस पार्टी के लोग उसमें शामिल रहेंगे और यह सही है कि जल्द ही सरकार बन जाएगी. उनके बाद जब वह राज्यसभा जाएंगे तो उनकी जगह कोई नया मुख्यमंत्री आएगा और जो रोड मैप है जो उन्होंने रोड मैप बनाया है वह सरकार में उसी पे काम होगा और उसको आगे बढ़ाएंगे. 

बिहार को कभी बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलेगा? 

मिल सकता है. 

कब तक? अभी कोई संभावना नजर आती है?

संभावना तो है ही. 

अब चिराग पासवान सबसे युवा चेहरा है और उनकी पार्टी के कई कार्यकर्ता उन्हें सीएम के तौर पर देखना चाहते हैं. 

हर पार्टी के जो वर्कर हैं वह अपने नेता के लिए अच्छा बोलते हैं. उनके लिए अच्छा सपने देखते हैं. उनके लिए बोलते हैं. अगर आप सोशल मीडिया पे जाएंगे तो कई नाम होंगे. हम लोगों का भी लोग नाम लिख देता है. तो लिखने वाले बोलने वाले बहुत लोग हैं. लेकिन जो सेंट्रल केंद्रीय नेतृत्व है वह तय करेगा और संख्या बल के पर हमारी एनडीए की बहुमत है और इसलिए एनडीए का मुख्यमंत्री बनेगा और चिराग पासवान अच्छे नेता हैं. उनके बारे में बहुत अच्छी-अच्छी बात होती रहती है और हम लोगों को भी खुशी होती है. 

विपक्ष की तरफ से एक आरोप लगाया जाता है कि बीजेपी अल्पसंख्यकों की अनदेखी करती है. केंद्र सरकार की योजनाओं से अल्पसंख्यक समुदाय को कितना लाभ मिल रहा है? 

बड़ा सवाल है कि यह परसेप्शन बनाया जाता है हमारे बारे में कि भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यकों के खिलाफ है. मुस्लिम के खिलाफ है. भारतीय जनता पार्टी के बारे में यह सही है कि बहुत वोट भी नहीं मिलते. मैं कबूल करता हूं. मैं खुद छह लोकसभा का चुनाव लड़ा हूं. इसलिए मैंने खुद देखा है लड़ते हुए मुस्लिम समाज में वोट वैसा नहीं आता. यह बात सही है. इसको मैं इंकार करूं कि नहीं जी हमें बहुत वोट मिलते हैं तो वह सही नहीं होगा. उसी तरह जब बीजेपी सरकार में आई आप जानते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी जी की जब सरकार थी तब मैं उस सरकार में कैबिनेट मंत्री था. हम लोगों ने कोई भेदभाव नहीं किया और बहुत ईमानदारी से सरकार चलाई. 

अभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को मुस्लिम वोट मिले ना मिले लेकिन उन्होंने अपना फर्ज जिम्मेदारी अपना धर्म निभाया है. उन्होंने कहा सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास इसी मंत्र को लेकर चल रहे हैं. हां, यह सही है कि हम अपीज़मेंट नहीं करते. हम इस बात को कबूल करते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के कलम से इसलिए कोई काम नहीं होगा कि आप मुसलमान हैं. इसलिए आपको कुछ पहला हक होना चाहिए. जो मनमोहन सिंह जी ने कहा था कि भारत के संसाधन पर पहला हक मुसलमानों का है वो हम नहीं मानते. हम यह मानते हैं कि भारत के संसाधन पर पहला हक भारतीयों का है और भारतीयों की ना हम जात पूछते ना धर्म पूछते ना राज्य पूछते हैं. तो हम लोग काम कर रहे हैं. 

आज भी देखिए पूरे दुनिया में आज क्या हालात है. पूरा ईरान, इजराइल, यूएई, सऊदी अरब सब वॉर में हैं. और मैं बहुत दावे से कहता हूं कि भारत के मुसलमानों के लिए ये बात मैंने 2000 में पार्लियामेंट में कही आज मैं 26 साल बाद आपके फ्लोर पे कहता हूं कि भारत के मुसलमानों के लिए भारत से अच्छा देश, हिंदू से अच्छा दोस्त और आज मैं कहता हूं मोदी से अच्छा नेता नहीं मिलेगा. हम 5 किलो अनाज दे रहे हैं तो मुस्लिम को भी दे रहे हैं. हम कोई काम कर रहे हैं. अगर अकाउंट में पैसा डाल रहे हैं तो उनके भी डाल रहे हैं. हम पक्का मकान दे रहे हैं तो उनको भी दे रहे हैं. हमने ईडब्ल्यूएस में अगर आरक्षण दिया है तो जहां राजपूत ब्राह्मण भूमिहार कास्ट को दिया है वहां शेख सैयद पठान को भी दिया है. यानी उनको 10% आरक्षण है. 

प्रधानमंत्री सबका साथ सबका विकास की बात करते हैं और इतनी सारी योजनाएं भी केंद्र सरकार के द्वारा लाई गई. लेकिन क्या पार्टी और संगठन से अल्पसंख्यक समुदाय के लोग जुड़ रहे हैं?

नहीं बड़ी तादाद में जुड़ रहे हैं. देखिए लोगों को लगता है अगर आप जाएंगे तो लोग कहेंगे बीजेपी में कौन है तो शाहनवाज नकवी हैं. यह परसेप्शन बना हुआ है. लेकिन नीचे जाएंगे हजारों वर्कर हैं हमारे. मैं तो कहूंगा लाखों वर्कर हैं जो भारतीय जनता पार्टी में काम कर रहे हैं और उनको पूरा महत्व भी मिल रहा है. यह सही है कि मैं और नकवी दोनों कैबिनेट मिनिस्टर बीजेपी की तरफ से रहे हैं. इसलिए चर्चा में वो नाम रहता है. लेकिन बड़ी तादाद में लोग हैं जो काम कर रहे हैं और उनको हम लोग पूरा महत्व दे रहे हैं. 

पहले की बीजेपी में और अब की बीजेपी में कोई अंतर आपको नजर आता है?

पहले भी मैं 1986 में मैं भारतीय जनता पार्टी में आया. तब हमारे दो सांसद होते थे. मैं युवा मोर्चा में आया. उमा भारती जी राष्ट्रीय अध्यक्ष थी. मैं राष्ट्रीय मंत्री था. नड्डा जी की टीम में वह भी युवा मोर्चा के अध्यक्ष थे. उनकी टीम में रहा. मैं बीजेपी का राष्ट्रीय मंत्री, माइनॉरिटी मोर्चे का अध्यक्ष और 18 साल तक मैं पार्लियामेंट्री बोर्ड जो सेंट्रल इलेक्शन कमेटी है जो निर्णय करती है जिसमें जब अटल जी आडवाणी जी होते थे और जोशी जी होते थे, जसवंत सिंह होते थे तो 11 लोग ही होते थे. मैंने उसमें भी काम किया और अभी मोदी जी के साथ भी काम किया. यानी मैंने 18 साल कोई भी इतने लंबे साल तक पार्लियामेंट्री बोर्ड में काम नहीं कर सकता. मैंने काम किया. मुझे तब की बीजेपी और अब की बीजेपी में अंतर कहेंगे तो क्या है? अब मुझे तो कुछ अंतर कहीं से दिखता नहीं. 

अब चीजें बदल गई हैं.  जब जब जगदीश जी प्रोग्राम करते थे. मुसलमान के बारे में अलग प्रोग्राम करते थे. उसका सेट अलग था. आज आपके सेट पर मैं आया हूं तो कितना खूबसूरत बना हुआ है. तो लोग कहेंगे कि कातिल साहब तो वही हैं लेकिन सेट बदल गया है. तो हमारा सेट बदला हुआ दिखेगा. सोशल मीडिया के में हमारे अग्रेसिव हैं हम थोड़ा. लेकिन यह सही है कि पहले हम फाइव डे मैच ज्यादा देखते थे. हम्. अब T20 का दौर है तो आप जानते हैं वर्ल्ड कप भी जीते हैं. तो T20 में पहले अटल जी हमारे अह सुनील गावस्कर की तरह खेलते थे. वो भी लीजेंड थे. और आज का जो दौर है नरेंद्र मोदी है वह टी20 की तरह खेलते हैं तो वह चीजें बदली हैं.  यानी स्पीड बदला है. खेल बदला है. 

भारत में युवा आबादी इस वक्त सबसे ज्यादा है. युवाओं को सफलता का एक क्या मंत्र आप देना चाहेंगे? 

नहीं हम युवा को यही कहना चाहेंगे जरा अपना स्क्रीन टाइम जो है वह मोबाइल से घटा लें और उसको कहीं पॉजिटिव जगह लगाएं. आजकल क्या हो रहा है कि मैंने एक बार एक सर्वे किया मैं आपको मालूम है कि मैं सिविल एिएशन मिनिस्टर रहा हूं तो जब मैं एयरपोर्ट पर जाता हूं तो मैं वो देखता रहता हूं कि क्या हो रहा है. कुछ नया है या कुछ सुझाव भी होता है देता रहता हूं. तो मैंने एक दिन बस में आ रहा था तो बस घूम कर आ रही थी. तो मैंने देखा मैंने 22 लोगों को गिना. उसमें एक आदमी भी खाली नहीं था. सब मोबाइल जो बैठा हुआ था वर्कर हर कोई मोबाइल पर बिजी था. 

तो आज दौड़ यह है कि 11 12 घंटा 14 घंटा तो लोग मोबाइल पर रह रहे हैं. आज के युवाओं से कह रहे हैं कि आप टेक्नोलॉजी के साथ जाएं. लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें कि जो अपनी संस्कृति है, कल्चर है, अगर आप जाएंगे तो आप बहुत चीजें अग्रेसिव होती है. पहले मैं बहुत टीवी में भारतीय जनता पार्टी का आज भी राष्ट्रीय प्रवक्ता हूं लेकिन टीवी डिबेट में मैं नहीं दिखता हूं. संबित पात्रा भी नहीं दिखते. तो वो हम लोग इसलिए नहीं दिखते क्योंकि आज का जो दौर है कोई आपको गाली भी दे सकता है. गंदी मां बहन की गाली डिबेट में शुरू हो गई. तो चीजें बदल गई हैं. तो युवाओं को कहूंगा कि शालीनता रखें, मां-बाप की इज्जत करें, मुल्क के लिए और जो सोशल मीडिया पे चलता है वो सच सब नहीं होता. आजकल तो एआई जनरेटेड में आप देखेंगे तो बुर्ज खलीफा ही गिरा गिरा दिया लोगों ने. हमने देखा अरे यह तो गिर गया. तो उससे भी बचना चाहिए.

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