इनकम टैक्स, इश्योरेंस से लेकर सोना-चांदी तक... बजट में निर्मला सीतारमण कर सकती हैं कई बड़े ऐलान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में आम बजट 2026 पेश करने जा रही हैं. यह उनके कार्यकाल का नौवां बजट होगा, जिसमें दो अंतरिम बजट भी शामिल हैं.

Budget 2026 Nirmala Sitharaman can make many big announcements
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में आम बजट 2026 पेश करने जा रही हैं. यह उनके कार्यकाल का नौवां बजट होगा, जिसमें दो अंतरिम बजट भी शामिल हैं. ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं से गुजर रही है, भारत का यह बजट नीतिगत सुधारों और आर्थिक मजबूती की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है.

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए गए भाषण से संकेत मिलते हैं कि सरकार का फोकस इस बार भी रिफॉर्म-ओरिएंटेड बजट पर रहेगा. सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) में बदलाव, टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और निवेश को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे इस बजट के केंद्र में हो सकते हैं.

टैक्सपेयर्स को मिल सकती है राहत

बजट से सबसे ज्यादा उम्मीदें मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों को हैं. माना जा रहा है कि नई इनकम टैक्स रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जा सकता है. इससे टैक्सेबल इनकम घटेगी और हाथ में आने वाली सैलरी बढ़ सकती है.

इसके अलावा टैक्स स्लैब में बदलाव या बीमा (इंश्योरेंस) प्रीमियम पर अतिरिक्त छूट जैसे ऐलान भी संभव माने जा रहे हैं, जिससे टैक्सपेयर्स को सीधी राहत मिल सकती है.

सोना-चांदी हो सकते हैं सस्ते?

बाजार की नजरें इस बार सीमा शुल्क सुधारों पर टिकी हैं. माना जा रहा है कि सरकार सोना और चांदी पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती कर सकती है. अगर ऐसा होता है तो घरेलू बाजार में कीमती धातुओं के दाम कम हो सकते हैं, जिससे ज्वेलरी सेक्टर को भी फायदा मिलेगा.

किसानों और रेलवे को लेकर उम्मीदें

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाई जा सकती है. इससे करोड़ों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा.

रेलवे सेक्टर में भी बड़े ऐलानों की संभावना है. अमृत भारत ट्रेनों और वंदे भारत एक्सप्रेस के नए रूट और नई ट्रेनों की घोषणा की जा सकती है, जिससे कनेक्टिविटी और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा.

राजकोषीय घाटा: सरकार की बड़ी चुनौती

राजकोषीय घाटा सरकार की कमाई और खर्च के बीच के अंतर को दर्शाता है. चालू वित्त वर्ष में यह जीडीपी का लगभग 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है. बाजार इस बात पर नजर रखे हुए है कि सरकार इसे कैसे कंट्रोल में लाती है.

उम्मीद की जा रही है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4 प्रतिशत के आसपास तय कर सकती है. इससे सरकार की वित्तीय अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता साफ झलकेगी.

कैपिटल एक्सपेंडिचर पर बना रहेगा जोर

चालू वित्त वर्ष में सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 11.2 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया था. निजी निवेश की रफ्तार थोड़ी धीमी होने के कारण अनुमान है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च को आगे भी मजबूत बनाए रखेगी.

अगले बजट में इसमें 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा सकती है, जिससे कुल पूंजीगत खर्च 12 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जा सकता है. इससे सड़क, रेलवे, पोर्ट और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर को नई गति मिलने की उम्मीद है.

कर्ज और उधारी पर बाजार की नजर

2024-25 के बजट में वित्त मंत्री ने संकेत दिया था कि 2026-27 से सरकार कर्ज-जीडीपी अनुपात को कम करने की दिशा में काम करेगी. फिलहाल यह अनुपात करीब 85 प्रतिशत है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा लगभग 57 प्रतिशत है.

बाजार यह जानना चाहता है कि सरकार इसे 60 प्रतिशत तक लाने के लिए कौन-सी समयसीमा तय करती है.

वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने 14.80 लाख करोड़ रुपये की सकल उधारी का अनुमान रखा है. उधारी का स्तर सरकार की आर्थिक सेहत और राजकोषीय स्थिति का अहम संकेतक माना जाता है.

टैक्स रेवेन्यू और जीएसटी कलेक्शन

बजट 2025-26 में सरकार ने कुल टैक्स रेवेन्यू का लक्ष्य 42.70 लाख करोड़ रुपये रखा था, जो पिछले साल से लगभग 11 प्रतिशत ज्यादा है. इसमें—

  • 25.20 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष करों से
  • 17.5 लाख करोड़ रुपये अप्रत्यक्ष करों से

मिलने का अनुमान है.

जीएसटी से वित्त वर्ष 2025-26 में 11.78 लाख करोड़ रुपये के राजस्व की उम्मीद है. सितंबर 2025 से जीएसटी दरों में कटौती के बाद कलेक्शन में सुधार की संभावना को देखते हुए 2026-27 के अनुमानों पर खास नजर रहेगी.

जीडीपी ग्रोथ को लेकर अनुमान

वित्त वर्ष 2025-26 में मौजूदा कीमतों पर जीडीपी ग्रोथ 10.1 प्रतिशत और वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है. महंगाई दर कम रहने के कारण मौजूदा कीमतों पर ग्रोथ का अनुमान घटाकर 8 प्रतिशत किया गया है.

वित्त वर्ष 2026-27 में देश की जीडीपी ग्रोथ 10.5 से 11 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद जताई जा रही है.

किन सेक्टरों को मिल सकती है बड़ी सौगात?

प्रधानमंत्री मोदी के हालिया संकेतों के मुताबिक—

  • हेल्थकेयर सेक्टर में सरकारी खर्च बढ़ सकता है
  • डिफेंस सेक्टर में स्वदेशी उत्पादन को और प्रोत्साहन मिल सकता है
  • इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को नई रफ्तार दी जा सकती है

इसके अलावा रियल एस्टेट सेक्टर को भी टैक्स राहत, सस्ती ब्याज दरों और अफोर्डेबल हाउसिंग से जुड़े ऐलानों की उम्मीद है, जिससे मांग बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं.

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