जनवरी में ठंड ने बरपाया कहर, अब फरवरी में कैसा रहेगा मौसम? IMD ने जारी किया अलर्ट

Weather Update: जनवरी के आखिरी करीब दस दिनों में जहां उत्तर भारत के बड़े हिस्से कड़ाके की ठंड की चपेट में रहे, वहीं अब फरवरी महीने को लेकर मौसम विभाग ने अहम अनुमान जारी किए हैं.

Cold wreaked havoc in January now how will the weather be in February IMD issued alert
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Weather Update: जनवरी के आखिरी करीब दस दिनों में जहां उत्तर भारत के बड़े हिस्से कड़ाके की ठंड की चपेट में रहे, वहीं अब फरवरी महीने को लेकर मौसम विभाग ने अहम अनुमान जारी किए हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक फरवरी में न केवल देशभर में बारिश सामान्य से कम रह सकती है, बल्कि न्यूनतम और अधिकतम तापमान भी औसत से ऊपर बने रहने की संभावना है. मौसम विभाग का यह आकलन कृषि, खासकर रबी फसलों के लिहाज से चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है.

आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि फरवरी महीने में पूरे देश में बारिश सामान्य से कम रहने की उम्मीद है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस दौरान दिन और रात दोनों का तापमान औसत से ज्यादा रह सकता है. महापात्र ने कहा कि कम बारिश और ज्यादा तापमान का सीधा असर गेहूं और जौ जैसी रबी फसलों पर पड़ सकता है. उन्होंने चेतावनी देते हुए बताया कि इससे फसलों में समय से पहले पकने की समस्या हो सकती है. इसका नतीजा यह होगा कि बालियों में दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाएंगे, दाने हल्के रह जाएंगे और कुल उत्पादन में गिरावट देखने को मिल सकती है.

उत्तर-पश्चिम भारत में ज्यादा असर की आशंका

मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े हिस्से फरवरी में सूखे मौसम की चपेट में रह सकते हैं. इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं. महापात्र के अनुसार इन क्षेत्रों में फरवरी के दौरान बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है. उन्होंने इस बदलते मौसम पैटर्न को सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन से जोड़ा.

जलवायु परिवर्तन से जुड़ा शुष्क मौसम का पैटर्न

आईएमडी प्रमुख ने बताया कि दिसंबर और जनवरी के अधिकतर हिस्सों में पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सक्रिय नहीं रहे, जिसकी वजह से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सर्दियों के दौरान मौसम काफी हद तक शुष्क बना रहा. उन्होंने कहा कि 20 जनवरी के बाद ही इन इलाकों में प्रभावी रूप से हिमपात देखने को मिला. यह स्थिति बीते कुछ वर्षों में लगातार देखी जा रही है, जिससे सर्दियों में सामान्य बारिश और बर्फबारी का चक्र प्रभावित हो रहा है.

पश्चिमी हिमालय में बारिश घटने का लंबा रुझान

महापात्र ने कहा कि समय के साथ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में वर्षा में कमी का एक स्पष्ट रुझान सामने आया है. IMD और अन्य शोध संस्थानों द्वारा किए गए अध्ययनों में इस बदलाव के पीछे जलवायु परिवर्तन को प्रमुख कारण माना गया है.

हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह तय करना कठिन है कि जलवायु परिवर्तन का कौन-सा विशिष्ट पहलू पश्चिमी हिमालय में बारिश की कमी के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है.

जनवरी में मौसम पैटर्न कैसे रहा?

आईएमडी के अनुसार जनवरी के दौरान लगातार दो पश्चिमी विक्षोभों के कारण देश के पश्चिमी हिस्सों में कुछ इलाकों में बारिश देखने को मिली. वहीं बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र ने जनवरी में पूर्वोत्तर भारत को छोड़कर देश के पूर्वी हिस्सों को लगभग बारिश से वंचित रखा. इस असंतुलित मौसम पैटर्न ने सर्दियों की सामान्य स्थिति को और अधिक प्रभावित किया.

फरवरी में तापमान रहेगा औसत से ऊपर

तापमान को लेकर भी मौसम विभाग का पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है. महापात्र ने बताया कि फरवरी महीने में देश के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है. हालांकि दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य स्तर पर रह सकता है.

इसी तरह अधिकतम तापमान भी देश के अधिकांश क्षेत्रों में औसत से ऊपर रहने का अनुमान है. हालांकि मध्य भारत के कुछ दूरदराज इलाकों और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य के आसपास रह सकता है.

खेती और जल संसाधनों पर असर की आशंका

कम बारिश और अधिक तापमान का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव खेती, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. रबी फसलों की पैदावार पर खतरा, मिट्टी में नमी की कमी और पानी की उपलब्धता जैसे मुद्दे फरवरी के दौरान अहम बन सकते हैं. मौसम विभाग की यह चेतावनी किसानों और नीति-निर्माताओं दोनों के लिए सतर्क रहने का संकेत है, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें.

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