Tobacco Products Tax: जनवरी का महीना समाप्त होने वाला है और कल से नया महीना फरवरी 2026 शुरू होगा. हर महीने की तरह फरवरी भी कुछ महत्वपूर्ण बदलावों के साथ देशवासियों के सामने आने जा रहा है. इन बदलावों में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में संभावित बदलाव, टोल टैक्स भुगतान में FASTag नियमों से जुड़ी नई शर्तें, और सबसे अधिक प्रभाव डालने वाले तंबाकू उत्पादों और पान मसाला की कीमतों में वृद्धि शामिल हैं.
विशेष रूप से, 1 फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पादों और पान-मसाला की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है. इसका कारण सरकार द्वारा इन उत्पादों पर लागू अतिरिक्त करों और उत्पाद शुल्क में इजाफा करना है.
सरकार ने साल की शुरुआत में ही कर ढांचे में बदलाव की तैयारी कर ली थी
इस साल की शुरुआत में ही केंद्र सरकार ने GST क्षतिपूर्ति उपकर की जगह नए उत्पाद शुल्क और उपकर लागू करने की अधिसूचना जारी की थी. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इसके तहत 1 फरवरी 2026 से देश में तंबाकू उत्पादों और पान मसाला पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा. सरकार की अधिसूचना के मुताबिक, तंबाकू और पान मसाला पर यह नया शुल्क जीएसटी दरों के अतिरिक्त लगेगा.
यानी इस पर पहले से लागू 28% जीएसटी के अलावा अब उत्पाद शुल्क और राष्ट्रीय उपकर भी जुड़ जाएंगे. इसके अलावा जनवरी की शुरुआत में वित्त मंत्रालय ने चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और शुल्क संग्रह) नियम, 2026 अधिसूचित किए. इन नियमों के तहत चबाने वाले तंबाकू उत्पादों के निर्माताओं से उनकी उत्पादन क्षमता का आकलन कर अतिरिक्त शुल्क वसूलने का तरीका निर्धारित किया गया.
यह कदम दिसंबर 2025 में संसद द्वारा पारित दो विधेयकों के बाद उठाया गया था. इन विधेयकों में पान मसाला निर्माण पर स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया था.
सिगरेट और पान मसाला की कीमतों में बढ़ोतरी
सरकार द्वारा संशोधित कर ढांचे के अनुसार, 1 फरवरी 2026 से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू होगा. विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे अधिक प्रभाव लंबी और प्रीमियम सिगरेट पर पड़ेगा. बदलाव के अनुसार, सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर उत्पाद शुल्क 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक लगेगा.
यह अतिरिक्त शुल्क 40% जीएसटी से अलग होगा. इसके प्रभाव से तंबाकू उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित होंगे. कंपनियां इस बढ़े हुए कर का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं. इसका सीधा परिणाम यह होगा कि सिगरेट, पान-मसाला और गुटखा महंगे हो जाएंगे.
Crisil का अनुमान और उद्योग पर असर
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, उत्पाद शुल्क में यह बढ़ोतरी सिगरेट उद्योग की बिक्री पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है. वर्तमान में, सिगरेट पर 28% जीएसटी के अलावा विभिन्न क्षतिपूर्ति उपकर भी लागू हैं.
1 फरवरी से ये क्षतिपूर्ति उपकर हटाए जाएंगे और सिगरेट की लंबाई के आधार पर नया उत्पाद शुल्क लागू होगा. क्रिसिल का अनुमान है कि इससे घरेलू सिगरेट उद्योग में अगले वित्तीय वर्ष में 6-8% की गिरावट देखने को मिल सकती है.
अन्य नियम और बदलाव
फरवरी 2026 से एलपीजी सिलेंडर की कीमतों और टोल टैक्स भुगतान में FASTag नियमों में भी बदलाव लागू हो सकते हैं. इन नियमों का उद्देश्य टोल संचालन को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना है. हालांकि, इन बदलावों का सीधा प्रभाव आम उपभोक्ता पर पडे़गा, लेकिन सबसे अधिक झटका तंबाकू उत्पादों के शौकीनों को लगेगा.
सरकार का यह कदम स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अहम माना जा रहा है. पान-मसाला और सिगरेट पर बढ़ा कर, सरकार न केवल राजस्व संग्रह बढ़ा रही है बल्कि तंबाकू उत्पादों के सेवन को सीमित करने का प्रयास भी कर रही है.
उपभोक्ताओं के लिए संदेश
संक्षेप में, फरवरी 2026 से शुरू होने वाले ये बदलाव उपभोक्ताओं के लिए खर्च बढ़ाने वाले और उद्योग के लिए नई चुनौतियाँ लाने वाले साबित होंगे.
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