Ravidas Jayanti: रविदास जयंती का पर्व पूरे भारत में करोड़ों लोगों के लिए आस्था, समानता और सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है. संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की शिक्षाएं आज भी समाज को मानवता, प्रेम और भेदभाव से मुक्त जीवन का संदेश देती हैं. इसी कारण रविदास जयंती हर वर्ष देशभर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है.
इस वर्ष 1 फरवरी को पड़ने वाली रविदास जयंती विशेष महत्व रखने वाली है, क्योंकि इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब के डेरा सचखंड बल्लां पहुंचेंगे. यह स्थान रविदास समाज की आस्था का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है और यहां प्रधानमंत्री की मौजूदगी को बेहद अहम माना जा रहा है.
संत निरंजन दास जी से करेंगे संवाद
प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान संत निरंजन दास जी से भी बातचीत करेंगे. संत निरंजन दास जी रविदास परंपरा के प्रमुख आध्यात्मिक गुरुओं में से एक हैं और समाज सेवा व आध्यात्मिक योगदान के लिए उन्हें हाल ही में पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है.
यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं होगी, बल्कि संत रविदास जी की शिक्षाओं, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित संवाद का अवसर भी बनेगी. प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी कई अवसरों पर संतों और धार्मिक गुरुओं से संवाद करते हुए सामाजिक सद्भाव और समावेशी सोच पर जोर देते रहे हैं.

PM मोदी और संत निरंजन दास जी की पुरानी मुलाकातें
प्रधानमंत्री मोदी और संत निरंजन दास जी की मुलाकात कोई नई बात नहीं है. इससे पहले भी दोनों के बीच कई बार संवाद हो चुका है. खास तौर पर 2019 की रविदास जयंती का अवसर काफी यादगार रहा था, जब प्रधानमंत्री मोदी ने यह पर्व काशी में संत निरंजन दास जी की उपस्थिति में मनाया था.
उस समय प्रधानमंत्री ने संत रविदास जी की शिक्षाओं को भारत की सामाजिक चेतना से जोड़ते हुए कहा था कि गुरु रविदास का संदेश आज के भारत के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना सदियों पहले था. काशी में हुआ वह आयोजन रविदास समाज के लिए एक ऐतिहासिक क्षण माना गया था.
डेरा सचखंड बल्लां का महत्व
पंजाब स्थित डेरा सचखंड बल्लां रविदास समाज का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है. यहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं और रविदास जयंती के अवसर पर विशेष आयोजन किए जाते हैं. प्रधानमंत्री मोदी का यहां पहुंचना रविदास समाज के लिए सम्मान और मान्यता के रूप में देखा जा रहा है.

रविदास जयंती का सामाजिक संदेश
रविदास जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह समानता, सामाजिक न्याय और मानव गरिमा का संदेश देती है. गुरु रविदास जी ने अपने जीवन और वचनों के माध्यम से जाति, ऊंच-नीच और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई थी.
प्रधानमंत्री मोदी का इस अवसर पर डेरा सचखंड बल्लां पहुंचना इसी संदेश को आगे बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है—कि भारत की विविधता में एकता और सभी वर्गों का सम्मान देश की सबसे बड़ी ताकत है.
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