Budget 2026: यूनियन बजट 2026 से पहले देशभर के रेल यात्रियों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं. खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ सकती है. बजट से जुड़े सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार कोरोना से पहले बंद की गई सीनियर सिटीजन टिकट रियायत को दोबारा शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो लाखों बुजुर्ग यात्रियों के लिए ट्रेन का सफर फिर से किफायती हो जाएगा.
बजट से पहले क्यों बढ़ी उम्मीद?
भारतीय रेलवे हर साल करोड़ों यात्रियों को सेवा देता है और इनमें बड़ी संख्या वरिष्ठ नागरिकों की होती है. लंबे समय से बुजुर्ग संगठनों और यात्रियों की मांग रही है कि कोरोना काल में बंद की गई टिकट छूट को फिर बहाल किया जाए.
अब बजट 2026 से पहले संकेत मिल रहे हैं कि वित्त मंत्रालय और रेल मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर बातचीत हो चुकी है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इस पर कोई ठोस घोषणा हो सकती है.
कोरोना से पहले क्या थी व्यवस्था?
यह छूट स्लीपर क्लास से लेकर थर्ड एसी, सेकेंड एसी और फर्स्ट एसी तक लागू थी. यानी लंबी दूरी की यात्रा करने वाले बुजुर्गों को काफी राहत मिलती थी.
क्या सच में 3000 का टिकट 1500 में मिलेगा?
इस तरह तीर्थ यात्रा, इलाज या परिवार से मिलने जाने का खर्च आधा तक कम हो सकता है.
कोविड काल में क्यों हटाई गई थी छूट?
साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान सरकार का फोकस गैर-जरूरी यात्राओं को कम करने और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने पर था. इसी वजह से रेलवे ने मार्च 2020 में सीनियर सिटीजन कंसेशन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था.
हालांकि बाद में रेल सेवाएं पूरी तरह सामान्य हो गईं, लेकिन बढ़ते खर्च और राजस्व दबाव के चलते यह सुविधा दोबारा शुरू नहीं की गई. अब जब रेलवे की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, तो यह मांग फिर जोर पकड़ रही है.
बिना झंझट मिलता था फायदा
इस छूट की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरल प्रक्रिया थी. यात्री को किसी अलग कार्ड, सर्टिफिकेट या आवेदन की जरूरत नहीं होती थी.
IRCTC वेबसाइट से टिकट बुक करते समय या रेलवे रिजर्वेशन काउंटर पर बस उम्र दर्ज करते ही सिस्टम अपने आप रियायती किराया लागू कर देता था. अगर यही व्यवस्था लौटती है, तो बुजुर्ग यात्रियों को फिर से बिना किसी झंझट के सीधा फायदा मिलेगा.
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