Comando Vermelho: ब्राजील की राजधानी रियो डी जेनेरियो इन दिनों किसी जंग के मैदान में बदल गई है. चारों तरफ गोलियों की आवाज़, बख्तरबंद गाड़ियां, हेलिकॉप्टर और सायरन की गूंज, यह सब किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि ब्राजील का ताज़ा हकीकत है.
देश की सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रग माफिया और गैंगस्टर्स के खिलाफ ‘ऑपरेशन कंटेनमेंट’ शुरू किया, जो अब तक का सबसे बड़ा पुलिस एक्शन साबित हुआ है. इस दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ में 4 पुलिसकर्मियों समेत 64 लोग मारे गए. यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसने न सिर्फ ब्राजील बल्कि पूरी दुनिया में मानवाधिकार और पुलिस हिंसा पर बहस छेड़ दी है.
❗️⚠️🇧🇷 - The Public Defender's Office of Rio de Janeiro confirms 132 deaths in a mega-operation against the Comando Vermelho (CV). This is currently the deadliest police operation in Latin American history.
— 🔥🗞The Informant (@theinformant_x) October 29, 2025
In a grim update as of Wednesday, authorities report that four officers… pic.twitter.com/bSIPI4Ref1
“60 अपराधियों को खत्म कर दिया गया”
ब्राजील के गवर्नर क्लाउडियो कास्त्रो ने कहा कि पुलिस ने 60 कुख्यात अपराधियों को मार गिराया है और 81 को गिरफ्तार किया गया है. इस ऑपरेशन के दौरान 250 से अधिक तलाशी और गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए, 42 राइफलें और भारी मात्रा में गोला-बारूद जब्त किए गए. ऑपरेशन का फोकस था, “कमांडो वर्मेल्हो” (Comando Vermelho), जिसे ब्राजील का सबसे पुराना और ताकतवर ड्रग माफिया नेटवर्क कहा जाता है.
कौन है ‘कमांडो वर्मेल्हो’
इस गैंग की कहानी किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं. 1970 के दशक में इल्हा ग्रांडे जेल में आम अपराधियों और वामपंथी राजनीतिक कैदियों को एक साथ रखा गया. जेल में जीवित रहने और हिंसा से बचने के लिए दोनों ने मिलकर एक समूह बनाया, कमांडो वर्मेल्हो (रेड कमांड). शुरुआत में इसका उद्देश्य आत्मरक्षा था, लेकिन जल्द ही यह ड्रग्स, हथियारों की तस्करी और अपहरण में उतर गया.
1980 के दशक में फैल गया आतंक
1980 के दशक में रेड कमांड ने जेल की दीवारों से बाहर निकलकर रियो डी जेनेरियो की झुग्गियों (favelas) पर कब्जा करना शुरू किया. इस गैंग ने कोलंबियाई कार्टेल और अमेजन के तस्करों से मिलकर ड्रग व्यापार फैलाया. 1985 तक रियो की स्लम कॉलोनियों में ड्रग्स बिजनेस का 70% कंट्रोल इसी गैंग के पास था. आज यह नेटवर्क ब्राजील के 30,000 से अधिक सदस्यों के साथ पूरे देश में फैला है.
‘फर्नान्डिन्हो बेरा-मार’
इस गैंग का वर्तमान बॉस है लुइज़ फर्नांडो दा कोस्टा, जिसे लोग ‘फर्नान्डिन्हो बेरा-मार’ कहते हैं. वह जेल में बंद है, लेकिन फिर भी अपने संगठन को डिजिटल नेटवर्क्स, एन्क्रिप्टेड ऐप्स और स्मगलिंग चैनलों से कंट्रोल करता है. 2025 में इस गैंग ने Rotax Mobili नाम का राइड-शेयरिंग ऐप लॉन्च किया था, असल में ड्रग्स की डिलीवरी के लिए!
गरीबी, डर और ‘गैंग का समाज’
कमांडो वर्मेल्हो सिर्फ अपराध नहीं करता, बल्कि गरीब इलाकों में खुद के नियम लागू करता है. वह जरूरतमंदों को खाना बांटता है, मेडिकल मदद देता है, लेकिन बदले में निष्ठा और चुप्पी की कीमत मांगता है. यानी जहां सरकार की पकड़ कमजोर है, वहां गैंग खुद “कानून” बन गया है.
रियो की सड़कों पर अब भी धुआं है बाकी...
ऑपरेशन कंटेनमेंट के बाद ब्राजील सरकार दावा कर रही है कि उसने सबसे बड़े माफिया नेटवर्क को हिला दिया है. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इतनी मौतों के बाद भी असली लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई, क्योंकि रेड कमांड की जड़ें सिर्फ रियो की गलियों में नहीं, बल्कि ब्राजील के सिस्टम में गहराई तक समाई हैं.
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