BJP New Team: भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए 65 पदाधिकारियों की नई टीम का ऐलान किया है. नितिन नवीन के नेतृत्व वाली इस टीम में उत्तर प्रदेश को खास तवज्जो दी गई है. संगठन में राज्य से कई चेहरों को जगह मिली है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा दो मुस्लिम नेताओं की हो रही है. भाजपा ने डॉ. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष बनाया है.
दोनों नेताओं का राजनीतिक सफर अलग-अलग पृष्ठभूमि से आया है. तारिक मंसूर जहां अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से जुड़े रहे हैं और चिकित्सा क्षेत्र में लंबा अनुभव रखते हैं, वहीं बासित अली ने जमीनी संगठन से राजनीति की शुरुआत करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय संगठन तक का सफर तय किया है. ऐसे में इन नियुक्तियों को केवल संगठनात्मक बदलाव के तौर पर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की आगामी चुनावी राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है.
कौन हैं डॉ. तारिक मंसूर?
डॉ. तारिक मंसूर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से आने वाले भाजपा के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में शामिल हैं. उन्हें पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम में एक बार फिर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है. वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य हैं. अप्रैल 2023 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने उन्हें विधान परिषद के लिए मनोनीत किया था.
20 सितंबर 1956 को अलीगढ़ में जन्मे तारिक मंसूर का परिवार शिक्षा और अकादमिक क्षेत्र से जुड़ा रहा है. उनके पिता प्रोफेसर हफीजुल रहमान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कानून विभाग के संस्थापक डीन रहे हैं. उनकी पत्नी हामिदा तारिक जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं.
डॉक्टर से AMU के कुलपति तक का सफर
तारिक मंसूर ने जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से 1978 में एमबीबीएस और 1982 में सर्जरी में एमएस की पढ़ाई पूरी की. मेडिकल क्षेत्र में शुरुआती जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने कॉलेज में रजिस्ट्रार और बाद में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में भी काम किया.
इसके बाद वह सऊदी अरब के किंग फहाद टीचिंग हॉस्पिटल में सर्जिकल स्पेशलिस्ट के तौर पर भी रहे. भारत लौटने के बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में अकादमिक करियर शुरू किया. वह असिस्टेंट प्रोफेसर से आगे बढ़ते हुए एसोसिएट प्रोफेसर और फिर प्रोफेसर बने.
उनके करियर में बड़ा मोड़ 2017 में आया, जब उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया. उनके बाद राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश को भी खास तौर पर देखा गया, क्योंकि वह विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर रहने के बाद सक्रिय राजनीति में आने वाले चर्चित चेहरों में शामिल रहे.
2023 में भाजपा में शामिल हुए तारिक मंसूर
तारिक मंसूर ने 2023 में औपचारिक तौर पर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की. इसके बाद पार्टी संगठन में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई. उन्हें भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व के करीब माना जाता रहा है.
राजनीति में आने से पहले भी वह कई राष्ट्रीय संस्थाओं और समितियों से जुड़े रहे. इनमें मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया, आईआईएम लखनऊ के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स और मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन की शासी निकाय जैसी जिम्मेदारियां शामिल रही हैं.
कौन हैं कुंवर बासित अली?
कुंवर बासित अली को भाजपा ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष नियुक्त किया है. इससे पहले वह उत्तर प्रदेश भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर काम कर चुके हैं. संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण उन्हें भाजपा के जमीनी मुस्लिम नेताओं में गिना जाता है.
बासित अली उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से आते हैं और मुस्लिम राजपूत समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. उनका जन्म मेरठ के कायस्थ बड्ढा गांव में हुआ, जो किठौर विधानसभा क्षेत्र में आता है. उन्होंने शुरुआती शिक्षा उत्तर प्रदेश बोर्ड से पूरी की और बाद में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की. शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने मेरठ में होटल व्यवसाय शुरू किया, लेकिन इसके साथ-साथ उनका जुड़ाव भाजपा संगठन से भी बढ़ता गया.
मंडल स्तर से राष्ट्रीय संगठन तक पहुंचे बासित अली
बासित अली ने वर्ष 2011 में उत्तर प्रदेश भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा में मंडल अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया था. इसके बाद संगठन में उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती गईं. वह मेरठ जिले के मीडिया प्रभारी रहे और 2012 में जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली.
इसके बाद उन्होंने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के क्षेत्रीय संयोजक के तौर पर भी काम किया. अल्पसंख्यक मोर्चा में क्षेत्रीय और पश्चिमी क्षेत्र के समन्वयक के रूप में भी उन्होंने संगठन को मजबूत करने की कोशिश की.
भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी का सदस्य बनाया गया. इस दौरान उन्होंने उर्दू भाषा को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यक्रमों और मुशायरों का आयोजन भी किया.
यूपी भाजपा में बड़ी जिम्मेदारी के बाद राष्ट्रीय पद
20 जून 2021 को बासित अली को उत्तर प्रदेश भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. करीब पांच साल बाद पार्टी ने उन्हें राज्य की राजनीति से निकालकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी है.
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष के तौर पर अब उनकी भूमिका केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी. देशभर में पार्टी और अल्पसंख्यक समुदाय के बीच संवाद बढ़ाने की जिम्मेदारी भी उनके सामने होगी.
भाजपा के लिए क्यों अहम है उत्तर प्रदेश?
भाजपा के संगठनात्मक बदलाव को उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति से अलग करके देखना मुश्किल है. राज्य में विधानसभा की 403 और लोकसभा की 80 सीटें हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश का राजनीतिक प्रदर्शन किसी भी राष्ट्रीय दल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है.
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन 2019 की तुलना में कमजोर रहा था. पार्टी की सीटों की संख्या 62 से घटकर 33 रह गई थी. ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करना भाजपा की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है.
नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिए जाने और दो प्रमुख मुस्लिम चेहरों को अहम जिम्मेदारी मिलने को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
मुस्लिम वोटरों तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति?
भाजपा पिछले कुछ वर्षों से मुस्लिम समाज के भीतर अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक समूहों के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने पर जोर देती रही है. पार्टी का पसमांदा मुस्लिमों के बीच संपर्क बढ़ाने का अभियान इसी रणनीति का हिस्सा रहा है.
तारिक मंसूर और बासित अली की सामाजिक और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि अलग है. ऐसे में दोनों नेताओं को जिम्मेदारी देकर भाजपा उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समाज के विभिन्न वर्गों तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर सकती है.
हालांकि, इन नियुक्तियों का चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा. मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन केवल संगठनात्मक नियुक्तियों से तय नहीं होता, बल्कि स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों, सरकार के प्रदर्शन और चुनावी समीकरणों का भी इसमें बड़ा योगदान रहता है.
क्या है पसमांदा मुस्लिम समुदाय?
'पसमांदा' शब्द फारसी भाषा से आया है, जिसका अर्थ broadly पीछे छूटा या वंचित वर्ग माना जाता है. भारत में इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समुदायों के लिए किया जाता है. उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में पसमांदा मुस्लिमों की राजनीतिक भूमिका लंबे समय से चर्चा का विषय रही है.
भारतीय मुस्लिम समाज के भीतर भी अलग-अलग सामाजिक और बिरादरी आधारित समूह मौजूद हैं. आम तौर पर मुस्लिम समुदाय को अशरफ, अजलाफ़ और अरजाल जैसे सामाजिक वर्गों के संदर्भ में समझा जाता है, हालांकि इन वर्गीकरणों को लेकर अकादमिक और सामाजिक बहस भी मौजूद है.
भाजपा लंबे समय से यह संदेश देने की कोशिश करती रही है कि वह मुस्लिम समाज के भीतर केवल प्रभावशाली वर्गों के बजाय पिछड़े और वंचित समूहों तक भी अपनी पहुंच बनाना चाहती है. तारिक मंसूर और बासित अली की नियुक्तियों को इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है.
नई जिम्मेदारियों से क्या हासिल करना चाहती है भाजपा?
तारिक मंसूर और बासित अली दोनों की भूमिकाएं अलग हैं, लेकिन दोनों को उत्तर प्रदेश और मुस्लिम समाज के बीच भाजपा की राजनीतिक पहुंच मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है. मंसूर का अकादमिक और संस्थागत अनुभव उन्हें एक अलग तरह की पहचान देता है, जबकि बासित अली का संगठनात्मक और जमीनी अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है.
अब देखना यह होगा कि राष्ट्रीय संगठन में मिली इन जिम्मेदारियों का इस्तेमाल भाजपा किस तरह करती है और आगामी चुनावों में इसका कितना राजनीतिक लाभ पार्टी को मिलता है. फिलहाल इतना स्पष्ट है कि नई टीम में इन दोनों मुस्लिम चेहरों को शामिल कर भाजपा ने अपने संगठनात्मक और चुनावी संदेश में एक अहम संकेत जरूर दिया है.
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