Azam Khan News: आजम खान पर ED का एक्शन, जौहर यूनिवर्सिटी समेत कई ठिकानों पर की छापेमारी

Azam Khan News: जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए करीब 494 करोड़ रुपये के खर्च और ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों को लेकर ईडी ने रामपुर में कई ठिकानों पर छापेमारी की है.

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Azam Khan News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने एक बार फिर जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों को चर्चा में ला दिया है. बुधवार सुबह ईडी की टीम ने रामपुर में आजम खान के जेल रोड स्थित आवास, जौहर विश्वविद्यालय और उनसे जुड़े कुछ लोगों के ठिकानों पर छापेमारी शुरू की. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब आयकर विभाग पहले ही मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों को लेकर सवाल उठा चुका है.

जांच का मुख्य फोकस जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण और उससे जुड़ी जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर तथा अन्य खर्चों के स्रोत पर बताया जा रहा है. ट्रस्ट पर आरोप है कि वह विश्वविद्यालय के निर्माण में हुए बड़े खर्च का पूरा वित्तीय विवरण और उससे जुड़े दस्तावेज आयकर विभाग के सामने पेश नहीं कर सका है. हालांकि, ईडी की छापेमारी के बाद जांच के दायरे और संभावित निष्कर्षों की तस्वीर कार्रवाई पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.

जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण पर 494 करोड़ के खर्च का मामला

आजम खान से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च को लेकर है. बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय के निर्माण पर अनुमानित तौर पर करीब 494 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. आयकर विभाग ने ट्रस्ट से इस रकम के स्रोत और इसके इस्तेमाल से संबंधित दस्तावेज मांगे थे. आयकर विभाग की जांच में ट्रस्ट से उसकी आय और व्यय के अलावा विश्वविद्यालय के लिए जमीन की खरीद, निर्माण कार्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की गई रकम का प्रमाण उपलब्ध कराने को कहा गया था. जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था किन स्रोतों से हुई और क्या इसके लिए सभी जरूरी वित्तीय नियमों का पालन किया गया.

आयकर विभाग ने ट्रस्ट का पंजीकरण किया रद्द

जौहर ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों को लेकर आयकर विभाग पहले ही कार्रवाई कर चुका है. 23 जून को आय और व्यय का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराने समेत अन्य कथित अनियमितताओं के आधार पर ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया गया था. इसके बाद विभाग की ओर से ट्रस्ट को नोटिस जारी कर वर्ष 2015 से 2020 के बीच हुई आय और खर्च का रिकॉर्ड मांगा गया. साथ ही जौहर विश्वविद्यालय के लिए खरीदी गई जमीन, निर्माण और बुनियादी ढांचे पर किए गए खर्च का साक्ष्यों के साथ विवरण देने को कहा गया था.

11 संदिग्ध फर्मों से मिले दान पर भी सवाल

जांच केवल विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च तक सीमित नहीं है. आयकर विभाग ने उन 11 संदिग्ध फर्मों से जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे हैं, जिन पर ट्रस्ट को दान के नाम पर करोड़ों रुपये देने की बात सामने आई है. विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इन फर्मों से ट्रस्ट को मिला पैसा वास्तव में किस उद्देश्य से दिया गया था और इन लेन-देन का पूरा वित्तीय रिकॉर्ड क्या है. ट्रस्ट की ओर से अतिरिक्त समय मांगे जाने की बात भी सामने आई है. अब ईडी की कार्रवाई के बीच इन वित्तीय लेन-देन की जांच और महत्वपूर्ण हो सकती है.

ईडी ने क्यों शुरू की छापेमारी?

आजम खान के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी ईडी ने जुलाई में पुलिस और प्रशासन से मांगी थी. इसके बाद से ही यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि केंद्रीय एजेंसी रामपुर में कार्रवाई कर सकती है. बुधवार सुबह ईडी की टीम के पहुंचने के साथ यह कार्रवाई शुरू हो गई. जांच का एक अहम पहलू जौहर विश्वविद्यालय और ट्रस्ट से जुड़ी संपत्तियों तथा उनके वित्तीय स्रोतों की पड़ताल माना जा रहा है. अगर जांच में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता या मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित सबूत सामने आते हैं, तो आगे की कार्रवाई उसी के आधार पर तय होगी.

2022 में भी जौहर विश्वविद्यालय पहुंची थी ईडी

जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में ईडी की सक्रियता नई नहीं है. वर्ष 2022 में भी एजेंसी की एक टीम विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों की प्रारंभिक जांच के लिए रामपुर पहुंची थी. अब कई वर्षों बाद एक बार फिर ईडी की कार्रवाई से जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े पुराने मामलों पर ध्यान केंद्रित हुआ है. इस बार आयकर विभाग की जांच और ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े सवालों के बीच ईडी की छापेमारी हुई है. ऐसे में जांच एजेंसी के सामने विश्वविद्यालय के निर्माण से लेकर ट्रस्ट के लेन-देन तक कई पहलुओं की पड़ताल का आधार मौजूद है.

आजम खान के खिलाफ कई मामलों में आ चुका है फैसला

आजम खान लंबे समय से कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके खिलाफ दर्ज मामलों में से 16 में अदालत का फैसला आ चुका है. इनमें आठ मामलों में उन्हें सजा सुनाई गई, जबकि आठ मामलों में उन्हें राहत मिली है. वर्तमान में आजम खान रामपुर जेल में अपने छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ सजा काट रहे हैं. दो पैन कार्ड मामले में उन्हें दस वर्ष की सजा मिली है. डूंगरपुर मामले में भी उन्हें दस वर्ष की सजा सुनाई गई थी.

जौहर विश्वविद्यालय के भवनों को लेकर भी विवाद

जौहर विश्वविद्यालय हाल के दिनों में एक अन्य वजह से भी चर्चा में रहा है. रामपुर विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय परिसर में बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए 38 भवनों को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था. हालांकि, इस आदेश पर मंडलायुक्त ने अंतरिम रोक लगा दी, जिससे आजम खान और विश्वविद्यालय प्रबंधन को फिलहाल राहत मिली. अब ईडी की छापेमारी के बाद जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक मामलों की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है.

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