राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय भारोत्तोलन टीम का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है. इस बार महिला भारोत्तोलक बिंदियारानी देवी ने 58 किलोग्राम भारवर्ग में शानदार जुझारूपन दिखाते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया. उन्होंने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर भारत के पदकों की संख्या बढ़ाई और यह साबित कर दिया कि दबाव की परिस्थितियों में भी भारतीय खिलाड़ी बड़े मंच पर शानदार प्रदर्शन करने का माद्दा रखते हैं. इस स्पर्धा में नाइजीरिया की रफियातु फोलाशेड लवाल ने स्वर्ण और कनाडा की आन सोफी तासचेरयू ने रजत पदक जीता.
स्नैच में लगातार तीन सफल प्रयासों से बनाई मजबूत नींव
बिंदियारानी ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आत्मविश्वास के साथ की. उन्होंने स्नैच के पहले प्रयास में 83 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया. इसके बाद दूसरे प्रयास में 85 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 87 किलोग्राम वजन उठाकर अपने सभी प्रयास सफल बनाए. खास बात यह रही कि उन्होंने अंतिम समय में शुरुआती वजन बदलने का फैसला लिया, जो पूरी तरह सही साबित हुआ. स्नैच में उनके बेहतरीन प्रदर्शन ने उन्हें पदक की दौड़ में मजबूती से बनाए रखा.
क्लीन एंड जर्क में नो लिफ्ट के बाद दिखाई जबरदस्त हिम्मत
क्लीन एंड जर्क की शुरुआत बिंदियारानी के लिए आसान नहीं रही. 110 किलोग्राम का पहला प्रयास पहले सफल माना गया, लेकिन ज्यूरी की समीक्षा के बाद उसे नो लिफ्ट घोषित कर दिया गया. इसके बावजूद उन्होंने मानसिक दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया और दूसरे प्रयास में 112 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाकर शानदार वापसी की. आखिर तक इंग्लैंड की एलिजा प्राट उनसे कांस्य पदक की दौड़ में बनी रहीं, लेकिन अपने अंतिम प्रयास में 113 किलोग्राम वजन उठाने में असफल रहीं, जिससे बिंदियारानी का पदक पक्का हो गया.
भारतीय भारोत्तोलन टीम का शानदार अभियान जारी
बिंदियारानी देवी के कांस्य पदक के साथ भारत ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में अब तक छह पदक अपने नाम कर लिए हैं, जिनमें पांच पदक भारोत्तोलन से आए हैं. भारत के खाते में फिलहाल एक स्वर्ण, तीन रजत और दो कांस्य पदक हैं. मीराबाई चानू ने स्वर्ण, ऋषिकांता सिंह, राजा और ज्ञानेश्वरी ने रजत, जबकि बिंदियारानी देवी और पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है. भारतीय भारोत्तोलकों का यह प्रदर्शन आने वाली स्पर्धाओं के लिए भी उम्मीदों को और मजबूत करता है.
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