'अपना हिस्सा नहीं छोड़ेंगे...' फिर बिलबिलाए बिलावल भुट्टो, भारत को बार-बार क्यो दे रहे जंग की धमकी?

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने हाल ही में एक साक्षात्कार में भारत पर तीखा हमला बोला है.

Bilawal Bhutto got very upset due to water cut off
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- ANI

इस्लामाबाद: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने हाल ही में एक साक्षात्कार में भारत पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया कि अगर भारत पाकिस्तान का पानी रोकने का प्रयास करता है, तो उनके देश के पास "युद्ध ही अंतिम विकल्प" बचेगा.

बिलावल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था. भारत ने यह भी स्पष्ट किया था कि "पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते." यह भारत का अब तक का सबसे कड़ा रुख माना जा रहा है.

सिंधु जल संधि: विवाद की जड़

1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि को दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे का आधार माना जाता रहा है. लेकिन हाल के वर्षों में पाकिस्तान की ओर से आतंकवादी गतिविधियों में बढ़ती संलिप्तता और भारत पर लगातार हमलों के चलते भारत ने इस संधि पर पुनर्विचार करने का फैसला किया.

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान की भूमिका सामने आने के बाद भारत ने कड़ा कदम उठाया. भारत ने संधि निलंबित करने के साथ-साथ पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक, पाकिस्तानियों के वीजा रद्द करने और अटारी-वाघा सीमा बंद करने जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए.

भुट्टो का आक्रामक रुख या सियासी दबाव?

जर्मन मीडिया को दिए इंटरव्यू में बिलावल ने कहा, "भारत की पानी रोकने की रणनीति पाकिस्तान के लिए जीवन-मरण का सवाल है. अगर भारत ने ऐसा किया तो हमारे पास युद्ध के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा."

विश्लेषकों के मुताबिक, बिलावल का यह बयान पाकिस्तान के घरेलू राजनीतिक दबाव का परिणाम हो सकता है, जहां लगातार बिगड़ती आर्थिक स्थिति और वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक छवि के कारण विपक्षी दलों और जनता में गुस्सा है.

बिलावल ने भारत पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत जानबूझकर पाकिस्तान की जल सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहा है. हालांकि, उन्होंने खुद को शांति का समर्थक बताते हुए यह भी कहा कि पाकिस्तान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन "अपने पानी और अस्तित्व से कोई समझौता नहीं करेगा."

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की फजीहत

भारत के कड़े कदम के बाद पाकिस्तान ने दुनिया भर में अपना पक्ष रखने की कोशिश की. बिलावल भुट्टो के नेतृत्व में एक पाकिस्तानी संसदीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका, यूरोप और ब्रिटेन के नेताओं से समर्थन हासिल करने के लिए दौरा कर चुका है. हालांकि, अमेरिकी सांसदों ने इस प्रतिनिधिमंडल के सामने पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन बंद करने और भारत को आतंकवादियों को सौंपने की सख्त सलाह दी.

ब्रसेल्स में भी पाकिस्तान की कोशिशों को सीमित समर्थन मिला है, जबकि भारत ने अपने डोजियर और सबूतों के जरिए वैश्विक समुदाय को पाकिस्तान की भूमिका से अवगत कराया है.

जल कूटनीति में अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान

भारत के विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि को भारत के खिलाफ एक "राजनीतिक हथियार" के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है. लेकिन बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों में पाकिस्तान के दावे अब पहले की तरह मजबूत नहीं हैं.

भारत की स्पष्ट नीति "आतंकवाद और वार्ता साथ नहीं चल सकते" अब जल कूटनीति में भी लागू होती दिख रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल संधि को निलंबित करने का भारत का फैसला पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है और बिलावल जैसे नेताओं के आक्रामक बयानों के पीछे घरेलू असफलताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव से उपजा डर भी छिपा हुआ है.

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