पाकिस्तान ने फिर कबूली पुरानी करतूतें, बिलावल भुट्टो ने मानी भारत में आतंक की साजिश

वर्षों से पाकिस्तान पर आरोप लगता रहा है कि वह अपनी धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंक फैलाने के लिए करता रहा है, और अब खुद पाकिस्तान के एक बड़े नेता ने इस पर मुहर लगा दी है.

Bilawal Bhutto accept spreading terrorism in india
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वर्षों से पाकिस्तान पर आरोप लगता रहा है कि वह अपनी धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंक फैलाने के लिए करता रहा है, और अब खुद पाकिस्तान के एक बड़े नेता ने इस पर मुहर लगा दी है. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया है कि पाकिस्तान से जुड़े कुछ आतंकी गुट अतीत में भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे हैं.

हालांकि, बिलावल ने यह भी सफाई दी कि इन घटनाओं में पाकिस्तान की सरकार की कोई सीधी भागीदारी नहीं थी. उनका कहना था कि पाकिस्तान ने अब अपना रुख बदल लिया है और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं.

पहलगाम हमले पर किनारा, TRF के सवाल से बचते दिखे बिलावल

साल 2025 के अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक बर्बर आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे. इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने तुरंत ले ली थी. लेकिन जब इंटरव्यू में बिलावल से TRF की भूमिका और पाकिस्तान से उसके संबंधों को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज किया. उन्होंने पाकिस्तान की संलिप्तता से साफ इनकार करते हुए दावा किया कि भारत की तरफ से अब तक कोई "विश्वसनीय सबूत" साझा नहीं किया गया है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद उठे सवालों पर चुप्पी

भारत द्वारा किए गए जवाबी सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर में आतंकियों के कई ठिकानों को निशाना बनाकर तबाह किया गया था. इस ऑपरेशन के बाद जो आतंकी मारे गए, उनके जनाज़े में पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों और कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ को एक साथ देखा गया. इस संवेदनशील मुद्दे पर जब बिलावल भुट्टो से सवाल किया गया, तो उन्होंने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया और सवाल को टाल गए.

क्या वाकई बदला है पाकिस्तान?

बिलावल भुट्टो का कहना है कि पाकिस्तान अब पहले जैसा नहीं रहा. उनके मुताबिक, अब आतंकी गुटों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और इस्लामाबाद अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से ले रहा है. हालांकि, भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई विशेषज्ञ इस दावे पर संदेह जताते रहे हैं.

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