Bihar Rajya Sabha Election: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान के दौरान एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया. मतदान के बीच महागठबंधन के चार विधायक विधानसभा में वोट डालने नहीं पहुंचे. इनमें कांग्रेस के तीन और राष्ट्रीय जनता दल के एक विधायक शामिल बताए जा रहे हैं. इन विधायकों की गैरमौजूदगी ने राज्यसभा चुनाव के समीकरणों को बदल दिया है.
खासकर महागठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के लिए स्थिति कुछ मुश्किल होती नजर आ रही है. राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. कई विश्लेषक इसे एक बड़ा सियासी खेल मान रहे हैं, क्योंकि पांचवीं सीट पर मुकाबला पहले से ही बेहद कड़ा माना जा रहा था.
कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद का राजनीतिक सफर
गैरहाजिर रहने वाले विधायकों में कांग्रेस के विधायक सुरेंद्र प्रसाद का नाम भी शामिल है. वे पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने हैं. सुरेंद्र प्रसाद का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है. उन्होंने पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ भी चुनाव लड़ा था.
वर्ष 2015 में उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के टिकट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन उस समय उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की. उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) के उम्मीदवार धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह को 1675 वोटों के अंतर से हराया.
मनोज विश्वास का पार्टी बदलने का लंबा इतिहास
कांग्रेस के एक और विधायक मनोज विश्वास भी मतदान के दौरान विधानसभा नहीं पहुंचे. वे अररिया जिले की फारबिसगंज सीट से पहली बार विधायक बने हैं. मनोज विश्वास का राजनीतिक करियर कई दलों के साथ जुड़ा रहा है. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनता दल (यूनाइटेड) से की थी. इसके बाद वर्ष 2018 में वे राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गए और करीब सात साल तक वहीं रहे.
हालांकि 2025 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया और पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने. फारबिसगंज सीट को भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है. पिछले छह विधानसभा चुनावों में से पांच बार यहां भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली है. ऐसे में मनोज विश्वास के भविष्य के राजनीतिक कदमों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं.
मनोहर प्रसाद सिंह भी नहीं पहुंचे मतदान के लिए
मतदान से गैरहाजिर रहने वाले कांग्रेस के तीसरे विधायक मनोहर प्रसाद सिंह हैं. वे कटिहार जिले की मनिहारी सीट से चौथी बार विधायक चुने गए हैं और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं. मनोहर प्रसाद सिंह पहले जनता दल (यूनाइटेड) के साथ जुड़े हुए थे. वर्ष 2010 में उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की थी.
2015 में जब नीतीश कुमार ने महागठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, उस समय सीटों के बंटवारे में मनिहारी सीट कांग्रेस के खाते में चली गई. बताया जाता है कि उसी दौरान नीतीश कुमार के कहने पर मनोहर प्रसाद सिंह कांग्रेस में शामिल हो गए और उसी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा.
आरजेडी विधायक फैसल रहमान भी रहे अनुपस्थित
महागठबंधन के जिन चार विधायकों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया, उनमें फैसल रहमान का नाम भी शामिल है. वे पूर्वी चंपारण जिले की ढाका विधानसभा सीट से विधायक हैं और राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े हुए हैं.
2025 के विधानसभा चुनाव में उनकी जीत काफी कम अंतर से हुई थी. उन्होंने महज 178 वोटों से जीत हासिल की थी. उनकी इस जीत को भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार ने अदालत में चुनौती दी है. आरोप लगाया गया है कि चुनाव के दौरान फर्जी वोट डाले गए थे. यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है.
पांचवीं सीट पर बढ़ा सस्पेंस
बिहार राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट की जरूरत होती है. ऐसे में चार विधायकों की गैरमौजूदगी ने चुनाव के समीकरण को और पेचीदा बना दिया है.
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