Bihar: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गयाजी में किया पिंडदान, पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए की प्रार्थना

Gaya Pitru Paksha Fair: विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, और इसी क्रम में रविवार को एक भावुक और ऐतिहासिक क्षण तब देखने को मिला जब देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गया पहुंचकर अपने पूर्वजों के मोक्ष और शांति के लिए विधि-विधान से पिंडदान किया.

Bihar President Draupadi Murmu performed Pind Daan at Gayaji prayed for souls of ancestors
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Gaya Pitru Paksha Fair: विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, और इसी क्रम में रविवार को एक भावुक और ऐतिहासिक क्षण तब देखने को मिला जब देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गया पहुंचकर अपने पूर्वजों के मोक्ष और शांति के लिए विधि-विधान से पिंडदान किया.

यह पहला मौका था जब राष्ट्रपति पद पर रहते किसी भारतीय महिला ने इस प्रकार धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में भागीदारी निभाई हो. राष्ट्रपति का यह कदम, आध्यात्मिकता और भारतीय परंपरा के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है.

वैतरणी तर्पण का विशेष दिन

रविवार को श्राद्ध पक्ष का 14वां दिन था, जिसे वैतरणी तर्पण और गौदान के लिए विशेष शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन गया में पिंडदान करने से पिंडदानी के 21 कुलों का उद्धार होता है. यही कारण है कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हर साल इस पुण्य अवसर पर गया पहुंचते हैं.

सुरक्षा व्यवस्था और विशेष प्रबंध

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विशेष विमान से गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरीं, जहां से उन्होंने सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच सड़क मार्ग से विष्णुपद मंदिर तक यात्रा की. राष्ट्रपति के आगमन को लेकर पूरे रूट पर तीन स्तर की सुरक्षा तैनात की गई थी. कई जगहों पर बैरिकेडिंग, ट्रैफिक डायवर्जन और आम लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया.

धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक विधि

पिंडदान के लिए मंदिर परिसर में एक एल्यूमिनियम फैब्रिकेटेड हॉल में विशेष व्यवस्था की गई थी. तीन अलग-अलग कक्ष बनाए गए, जिनमें से एक में राष्ट्रपति ने अपने परिजनों के साथ पिंडदान किया. इस दौरान गयापाल पुरोहित राजेश लाल कटरियार और उनकी टीम ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई. पिंडदान के बाद राष्ट्रपति ने विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना भी की और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.

परंपरा से जुड़ाव की मिसाल

राष्ट्रपति मुर्मू का यह आध्यात्मिक कदम सिर्फ व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि यह एक राष्ट्रप्रमुख द्वारा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सम्मान देने का प्रतीक भी है. यह घटना उन सभी के लिए प्रेरणास्रोत है जो आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं.

हर साल भाद्रपद की पूर्णिमा से अश्विन अमावस्या तक गया में आयोजित होने वाला पितृपक्ष मेला पूर्वजों को तर्पण, पिंडदान और गौदान के लिए विश्वविख्यात है. ऐसी मान्यता है कि यहां तर्पण करने से आत्माएं मोक्ष को प्राप्त करती हैं और कुल के दोष भी समाप्त होते हैं.

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