5,643 मीटर ऊंचाई, बर्फीली हवाएं... बिहार की बेटी ने रचा इतिहास, यूरोप की सबसे ऊंची चोटी पर फहराया तिरंगा

बिहार की मोनी कुमारी ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराकर ऐसा ही उदाहरण पेश किया है. सारण के इसुआपुर की बहू और बिहार ग्रामीण बैंक में मैनेजर मोनी ने 5,643 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर देश का गौरव बढ़ाया.

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कभी-कभी किसी उपलब्धि की ऊंचाई सिर्फ मीटर में नहीं मापी जाती, बल्कि उस हौसले से तय होती है जो मुश्किल परिस्थितियों के बीच इंसान को आगे बढ़ाता है. बिहार की मोनी कुमारी ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराकर ऐसा ही उदाहरण पेश किया है. 

सारण के इसुआपुर की बहू और बिहार ग्रामीण बैंक में मैनेजर मोनी ने 5,643 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर देश का गौरव बढ़ाया. उनका यह अभियान स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा फहराने के संकल्प के साथ शुरू हुआ था, जिसे उन्होंने मौसम की चुनौती को देखते हुए एक दिन पहले ही पूरा कर लिया.

14 अगस्त की सुबह एल्ब्रुस की चोटी पर पहुंचीं मोनी

मोनी कुमारी ने 10 अगस्त से माउंट एल्ब्रुस अभियान की शुरुआत की थी. उनका लक्ष्य 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर चोटी पर तिरंगा फहराने का था. लेकिन मौसम खराब होने की आशंका और पर्वतीय परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने अपनी रणनीति बदली और अभियान को तेज किया. 

आखिरकार 14 अगस्त की सुबह वह 5,643 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंच गईं और वहां तिरंगा फहराकर अपना सपना पूरा किया. यह पल उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवार और बिहार के लोगों के लिए भी गर्व का अवसर बन गया.

बर्फीली हवाओं और कम ऑक्सीजन के बीच कायम रहा हौसला

माउंट एल्ब्रुस की चढ़ाई के दौरान मोनी को बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. बर्फीली हवाओं के साथ कड़ाके की ठंड, बर्फबारी, कम ऑक्सीजन और दुर्गम रास्ते उनके सामने बड़ी चुनौतियां बनकर आए. 

ऊंचाई बढ़ने के साथ शरीर पर दबाव भी बढ़ता है, लेकिन मोनी ने आत्मविश्वास बनाए रखा और लगातार शिखर की ओर बढ़ती रहीं. कई कठिन पड़ावों को पार करने के बाद जब उन्होंने चोटी पर तिरंगा लहराया तो उनकी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति को एक बड़ी कामयाबी मिली.

किलिमंजारो के बाद एल्ब्रुस पर भी फहराया तिरंगा

माउंट एल्ब्रुस मोनी कुमारी की पहली बड़ी पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं है. इससे पहले दिसंबर 2025 में उन्होंने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो का सफलतापूर्वक आरोहण किया था. इसके अलावा वह बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स भी पूरा कर चुकी हैं. 

लगातार दूसरी अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण सफलता ने उनके सफर को और खास बना दिया है. बैंकिंग सेवा की जिम्मेदारी संभालने के साथ पर्वतारोहण के लिए समय निकालना उनकी प्रतिबद्धता और अनुशासन को दर्शाता है.

परिवार के सहयोग को दिया सफलता का श्रेय

मोनी कुमारी ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने पति आशीष कुमार पुंज, माता-पिता और सास-ससुर के लगातार सहयोग को दिया है. उनका कहना है कि परिवार के प्रोत्साहन ने उन्हें मुश्किल रास्तों पर आगे बढ़ने की ताकत दी. 

उन्होंने भविष्य के पर्वतारोहण अभियानों के लिए बिहार सरकार से सहयोग की उम्मीद भी जताई है. उनकी कहानी बताती है कि जब परिवार और समाज का समर्थन मिले तो अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ बड़े सपनों को भी पूरा किया जा सकता है.

आरा की बेटी से लेकर पर्वतों की विजेता तक का सफर

मोनी कुमारी मूल रूप से आरा की रहने वाली हैं और उनका ससुराल सारण जिले के इसुआपुर प्रखंड के डटरा पुरसौली गांव में है. वह बिहार ग्रामीण बैंक में मैनेजर के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ पर्वतारोहण के क्षेत्र में भी लगातार पहचान बना रही हैं. 

माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराने की उनकी उपलब्धि सिर्फ एक पर्वत पर विजय की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन तमाम युवाओं और खासकर बिहार की बेटियों के लिए प्रेरणा है जो अपनी परिस्थितियों को अपनी सीमा मानने से इनकार करती हैं. मोनी ने साबित किया है कि ऊंची मंजिल के सामने रास्ते भले ही कठिन हों, लेकिन मजबूत इरादे और निरंतर प्रयास से शिखर तक पहुंचा जा सकता है.

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