Bihar MLC Election 2026: बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन कई नेताओं के लिए खुशखबरी लेकर आया, तो कुछ के लिए नए राजनीतिक समीकरणों की शुरुआत भी कर गया. बिहार विधान परिषद की 10 रिक्त सीटों पर हुए चुनाव में सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए. चूंकि जितनी सीटें खाली थीं, उतने ही प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था, इसलिए मतदान की आवश्यकता ही नहीं पड़ी. इस परिणाम ने न केवल सत्ताधारी गठबंधन की ताकत को प्रदर्शित किया, बल्कि राज्य सरकार में मंत्री पद संभाल रहे दीपक प्रकाश के भविष्य को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
सभी दलों के उम्मीदवारों को मिली निर्विरोध जीत
विधान परिषद की 10 सीटों के लिए भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास) और राजद ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक किसी भी प्रत्याशी ने अपना पर्चा वापस नहीं लिया. ऐसे में सभी उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया.
भारतीय जनता पार्टी की ओर से पवन सिंह, संजय मयूख, शीला पंडित और अनिल ठाकुर को जीत मिली. वहीं जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार भारती मेहता, निशांत कुमार, ललन प्रसाद और शिवानी देवी भी निर्विरोध विधान परिषद पहुंचे. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अशरफ अंसारी तथा राष्ट्रीय जनता दल के सुनील सिंह भी बिना मुकाबले विजयी घोषित किए गए.
विधानसभा पहुंचकर लिया निर्वाचन प्रमाण पत्र
निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा के बाद सभी नवनिर्वाचित सदस्य विधानसभा परिसर पहुंचे, जहां उन्हें निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपे गए. नेताओं और समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला. कई उम्मीदवारों ने इसे जनता और पार्टी नेतृत्व के विश्वास की जीत बताया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम राज्य में मौजूदा राजनीतिक संतुलन और दलों की रणनीतिक समझ का भी संकेत देता है, क्योंकि किसी भी दल ने अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर मुकाबले की स्थिति पैदा नहीं की.
नीतीश कुमार की सीट से विधान परिषद पहुंचे ललन प्रसाद
इन चुनावों में सबसे अधिक चर्चा जदयू उम्मीदवार ललन प्रसाद की रही. दरअसल, यह सीट मुख्यमंत्री रह चुके और बाद में राज्यसभा पहुंचे नीतीश कुमार के विधान परिषद छोड़ने से रिक्त हुई थी. जदयू ने इस महत्वपूर्ण सीट के लिए ललन प्रसाद पर भरोसा जताया और उन्हें उम्मीदवार बनाया. विशेष बात यह है कि ललन प्रसाद का कार्यकाल अन्य सदस्यों से अलग रहेगा. उनका कार्यकाल वर्ष 2030 तक होगा, जबकि बाकी नौ नवनिर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल 2032 तक चलेगा.
नामांकन प्रक्रिया में नहीं आया कोई विवाद
विधान परिषद चुनाव की पूरी प्रक्रिया बेहद शांतिपूर्ण रही. 10 सीटों के लिए कुल 10 उम्मीदवारों ने ही नामांकन पत्र दाखिल किए थे. नामांकन पत्रों की जांच के दौरान सभी उम्मीदवारों के दस्तावेज सही पाए गए. किसी भी प्रत्याशी के नामांकन पर आपत्ति नहीं हुई और न ही किसी का पर्चा खारिज किया गया. इसके बाद नाम वापसी की प्रक्रिया भी बिना किसी अप्रत्याशित घटनाक्रम के पूरी हो गई, जिससे सभी उम्मीदवारों की जीत लगभग तय हो गई थी.
अब चर्चा में मंत्री दीपक प्रकाश का भविष्य
इन चुनाव परिणामों के बाद सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर उठ रहा है. दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार सरकार में मंत्री हैं और दो बार मंत्री पद की शपथ भी ले चुके हैं. हालांकि वे अभी विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं.
संविधान के अनुसार किसी व्यक्ति को मंत्री बनने के छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक होता है. ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे और मंत्री दीपक प्रकाश के लिए क्या राजनीतिक रणनीति अपनाते हैं.
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