Bihar Paper Leak: बिहार में भी पेपर लीक पर बड़ा एक्शन, तीन फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर सरकार ने कसा शिकंजा

Bihar Paper Leak: पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर बिहार सरकार ने पटना, लखीसराय और पूर्णिया में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए हैं.

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Bihar Paper Leak: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राज्य में पहली बार परीक्षा से जुड़े अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए गए हैं. इन अदालतों का उद्देश्य ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा करना है, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिले और भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहे.

पटना हाईकोर्ट के निर्देश के बाद गठित इन विशेष अदालतों से उम्मीद की जा रही है कि वर्षों तक लंबित रहने वाले परीक्षा घोटालों के मामलों में अब तेजी आएगी. सरकार का मानना है कि इससे युवाओं का प्रतियोगी परीक्षाओं पर भरोसा भी मजबूत होगा.

पटना, लखीसराय और पूर्णिया में शुरू हुई विशेष अदालतें

राज्य सरकार ने फिलहाल तीन जिलों पटना, लखीसराय और पूर्णिया में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया है. इन अदालतों में पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी के मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी. इन कोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो तथा समयबद्ध तरीके से फैसला सामने आए.

तीन महीने में मामलों के निपटारे का लक्ष्य

सरकार ने इन विशेष अदालतों के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है. पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024 के तहत दर्ज मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर करने का प्रयास किया जाएगा. इसके लिए अलग रोस्टर तैयार किया गया है और नियमित सुनवाई की व्यवस्था की गई है. गवाहों के बयान दर्ज करने और साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया भी तेज की जाएगी, जिससे मुकदमों में देरी की संभावना कम हो सके.

तीनों अदालतों में जजों की हुई नियुक्ति

फास्ट ट्रैक कोर्ट के संचालन के लिए सरकार ने न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है. पटना में एडीजे गौरव सिंह, लखीसराय में एडीजे सीमा भारतीय और पूर्णिया में एडीजे अमन कुमार ठाकुर को इन विशेष अदालतों की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इन न्यायाधीशों की निगरानी में परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों की नियमित सुनवाई होगी और प्राथमिकता के आधार पर फैसले दिए जाएंगे.

कई चर्चित भर्ती घोटाले पहले से जांच के दायरे में

बिहार में कई चर्चित भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामले पहले से जांच और न्यायिक प्रक्रिया में हैं. पटना में TRE-3 शिक्षक भर्ती, सिपाही भर्ती परीक्षा, 67वीं बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा और एईडीओ पेपर लीक जैसे मामलों की सुनवाई चल रही है. वहीं लखीसराय में री-नीट परीक्षा में कथित धांधली की जांच जारी है, जबकि पूर्णिया में एसएससी एमटीएस परीक्षा से जुड़े अनियमितताओं के मामलों की पड़ताल की जा रही है. नई अदालतों के गठन से इन मामलों में सुनवाई की गति तेज होने की उम्मीद है.

पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट के तहत होगी सुनवाई

विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में उन मामलों की सुनवाई की जाएगी जो पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज किए गए हैं. इस कानून का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली, पेपर लीक और संगठित नकल जैसी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है. सरकार का मानना है कि इस कानून और विशेष अदालतों के संयुक्त प्रभाव से परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी.

छात्रों के भरोसे को मजबूत करने की कोशिश

हाल के वर्षों में कई भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों ने लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत पर सवाल खड़े किए हैं. ऐसे में सरकार का कहना है कि विशेष अदालतों की स्थापना से दोषियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई होगी और युवाओं का भर्ती प्रक्रिया पर विश्वास मजबूत होगा. सरकार का यह भी मानना है कि त्वरित न्याय व्यवस्था भविष्य में परीक्षा माफियाओं के लिए कड़ा संदेश साबित होगी और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

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