खराब हो जाए EVM मशीन तो क्या होगा? जान लीजिए चुनाव से जुड़े ऐसे सवालों के जवाब

Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में आज यानी 6 नवंबर को 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान हो रहा है. लोकतंत्र के इस महापर्व में कुल 1314 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें तेजस्वी यादव, सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा और तेज प्रताप यादव जैसे कई बड़े चेहरे शामिल हैं.

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Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में आज यानी 6 नवंबर को 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान हो रहा है. लोकतंत्र के इस महापर्व में कुल 1314 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें तेजस्वी यादव, सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा और तेज प्रताप यादव जैसे कई बड़े चेहरे शामिल हैं. आज की वोटिंग के साथ ही सभी प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) में कैद हो जाएगी. लेकिन जैसे-जैसे मतदान आगे बढ़ता है, मतदाताओं के मन में एक सवाल जरूर उठता है. अगर ईवीएम खराब हो गई तो क्या होगा? बिजली चली जाए तो वोट सुरक्षित रहेगा या नहीं? ऐसे ही कई सवालों के जवाब जानना जरूरी है.

मतदान के दौरान अगर किसी कारणवश ईवीएम काम करना बंद कर दे तो घबराने की जरूरत नहीं होती. चुनाव आयोग हर बूथ पर बैकअप ईवीएम उपलब्ध कराता है. यदि मशीन तकनीकी रूप से खराब हो जाती है, तो उसे तुरंत नई ईवीएम से बदल दिया जाता है. पुराने सिस्टम में डाले गए सारे वोट कंट्रोल यूनिट की मेमोरी में सुरक्षित रहते हैं, इसलिए पहले से दिए गए वोटों पर कोई असर नहीं पड़ता. इस प्रक्रिया को बूथ पर मौजूद अधिकारी पूरी पारदर्शिता के साथ करते हैं.

कौन रखता है ईवीएम पर निगरानी?

मतदान वाले दिन ईवीएम की निगरानी का जिम्मा जोनल, एरिया और सेक्टर मजिस्ट्रेट के पास होता है. वे लगातार निरीक्षण करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि कहीं कोई तकनीकी गड़बड़ी न हो. उनके पास अतिरिक्त ईवीएम का स्टॉक भी रहता है ताकि किसी बूथ पर मशीन फेल होने की स्थिति में तत्काल नई मशीन लगाई जा सके.

क्या ईवीएम खराब होने की संभावना होती है?

ईवीएम के खराब होने की संभावना बहुत कम होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि इन मशीनों की कई चरणों में जांच की जाती है. सबसे पहले “फर्स्ट लेवल चेकिंग” यानी एफएलसी की जाती है, जिसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बेंगलुरु) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (हैदराबाद) के इंजीनियर मशीन की कार्यक्षमता की पुष्टि करते हैं. इन परीक्षणों के बाद ही ईवीएम को चुनावी ड्यूटी पर भेजा जाता है.

अगर बिजली चली जाए तो क्या होगा?

अक्सर लोगों के मन में यह शंका रहती है कि बिजली जाने से मतदान रुक जाएगा या वोटिंग डेटा मिट जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं होता. ईवीएम पूरी तरह से बैटरी से चलती है, इसलिए बिजली कटने पर भी मतदान की प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ता. यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि किसी भी परिस्थिति में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित न हो.

एक ईवीएम में कितने वोट रिकॉर्ड हो सकते हैं?

एक ईवीएम मशीन में अधिकतम 2000 वोट रिकॉर्ड किए जा सकते हैं. इसमें दो प्रमुख हिस्से होते हैं—कंट्रोल यूनिट और वोटिंग यूनिट, जो लगभग पांच मीटर लंबी केबल से जुड़ी होती हैं. कंट्रोल यूनिट मतदान अधिकारी के पास रहती है, जबकि वोटिंग यूनिट को उस कम्पार्टमेंट में रखा जाता है जहां मतदाता जाकर अपना वोट डालते हैं.

कैसे पता चलता है कि आपका वोट दर्ज हो गया है?

जब आप अपने पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के सामने बटन दबाते हैं, तो ईवीएम पर एक लाल बत्ती जलती है और बीप की आवाज आती है. यह संकेत होता है कि आपका वोट सफलतापूर्वक दर्ज हो गया है. साथ ही, VVPAT मशीन से एक पर्ची निकलती है जिसमें उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिह्न दिखाई देता है. यह पर्ची कुछ सेकंड तक दिखाई देती है और फिर अपने आप बॉक्स में चली जाती है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि आपका वोट सही उम्मीदवार को गया है.

क्यों सुरक्षित है ईवीएम प्रणाली?

भारत की ईवीएम मशीनें पूरी तरह ऑफलाइन होती हैं, यानी इन्हें इंटरनेट से नहीं जोड़ा जा सकता. इनमें कोई सॉफ्टवेयर अपडेट या हैकिंग की संभावना नहीं रहती. मशीनें सील करके कड़ी सुरक्षा के बीच रखी जाती हैं, और हर चरण में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं. यही वजह है कि ईवीएम के जरिए मतदान आज भी भारत के लोकतंत्र का सबसे विश्वसनीय माध्यम माना जाता है.

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