Bihar Sugar Mill: बिहार की राजनीति और विकास के एजेंडे में एक बार फिर बड़ा मुद्दा केंद्र में आ गया है. राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक अहम घोषणा करते हुए कहा है कि बिहार की सभी बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू किया जाएगा. यह फैसला सिर्फ उद्योगों को पुनर्जीवित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए किसानों, मजदूरों और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलने की तैयारी है. सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अब बिहार में ही अवसर मिलेंगे और पलायन को हर हाल में रोका जाएगा.
सम्राट चौधरी समृद्धि यात्रा के तहत छपरा पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने मंच से बिहार के बदलते स्वरूप की तस्वीर पेश की. उन्होंने कहा कि बिहार अब केवल शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बिजली तक सीमित नहीं रह गया है. राज्य तेजी से उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है. बड़े पैमाने पर औद्योगिक ढांचा खड़ा किया जा रहा है, ताकि युवाओं को रोज़गार के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े.
चीनी मिलों की वापसी से किसानों को राहत
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू करने से सबसे बड़ा फायदा गन्ना किसानों को होगा. वर्षों से किसान अपनी उपज के सही दाम और समय पर भुगतान के लिए संघर्ष कर रहे थे. मिलों के दोबारा शुरू होने से न सिर्फ किसानों को स्थायी बाजार मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिलेगा. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.
निवेशकों के लिए लाल कालीन बिछा रही सरकार
सम्राट चौधरी ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना है. इसके लिए बिहार में देश की सबसे आकर्षक औद्योगिक नीतियों में से एक लागू की गई है. निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार एक रुपये में जमीन उपलब्ध करा रही है. इतना ही नहीं, 15 दिनों के भीतर लोन अप्रूवल की व्यवस्था भी की गई है. उन्होंने दावा किया कि इसी नीति का असर है कि अब बिहार में सेमीकंडक्टर जैसी अत्याधुनिक फैक्ट्रियां भी लग रही हैं, जो पहले राज्य के लिए कल्पना से परे थीं.
नीतीश कुमार की यात्राओं से बदला विकास का मॉडल
डिप्टी सीएम ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विभिन्न यात्राओं का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि न्याय यात्रा, प्रगति यात्रा और समृद्धि यात्रा के जरिए मुख्यमंत्री ने जनता से सीधे संवाद किया. इन यात्राओं के दौरान लोगों की जरूरतों और समस्याओं को समझा गया और उसी आधार पर विकास की दिशा तय की गई. सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली जैसे बुनियादी क्षेत्रों में जो ऐतिहासिक काम हुए हैं, उनकी नींव इन्हीं यात्राओं से पड़ी.
बिजली व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव
बिजली को लेकर सम्राट चौधरी ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि एक समय था जब बिहार में शहरों को भी मुश्किल से पांच घंटे बिजली मिल पाती थी. आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. गांवों में भी 24 घंटे बिजली की आपूर्ति हो रही है. उन्होंने बताया कि राज्य के करीब एक करोड़ 90 लाख परिवारों को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है. इसका सीधा लाभ यह हुआ है कि लगभग एक करोड़ 70 लाख परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिली है.
कनेक्टिविटी पर सरकार का फोकस
सड़क और परिवहन को लेकर भी सरकार का विजन साफ दिखाई देता है. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि गांव से लेकर गली-गली तक सड़कों का जाल बिछाया गया है. उन्होंने यह भी ऐलान किया कि छपरा में जल्द ही एयरपोर्ट का निर्माण होगा. इससे सारण और आसपास के जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. व्यापार, उद्योग और पर्यटन को इससे नई गति मिलने की उम्मीद है.
युवाओं के लिए बड़ा लक्ष्य
युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने कौशल विकास को मिशन मोड में लिया है. इसके लिए युवा कौशल विकास विभाग का गठन किया गया है, जहां उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जा रहा है. सम्राट चौधरी ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में 50 लाख सरकारी नौकरी और रोजगार दिए गए हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि अगले पांच वर्षों में एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा.
बिहार बदलाव की राह पर
सम्राट चौधरी के बयानों से साफ है कि बिहार अब सिर्फ योजनाओं की बात नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. बंद पड़ी चीनी मिलों की वापसी, उद्योगों का विस्तार और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, ये सभी संकेत देते हैं कि बिहार अब नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां विकास, उद्योग और रोजगार एक साथ आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं.
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