MH-60R Romeo Helicopters: भारत अपनी समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक क्षमताओं को लगातार मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. इसी रणनीति के तहत रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी सरकार के साथ एक अहम समझौता किया है, जिसके तहत अमेरिकी नौसेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अत्याधुनिक एमएच-60आर सीहॉक हेलीकॉप्टरों के रखरखाव और मरम्मत के लिए भारत को पांच साल तक तकनीकी व लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की जाएगी. लगभग 7,995 करोड़ रुपये के इस सस्टेनमेंट सपोर्ट एग्रीमेंट से भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता में असाधारण बढ़ोतरी होगी.
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह पैकेज बेहद व्यापक है. इसमें सीहॉक हेलीकॉप्टरों के महत्वपूर्ण स्पेयर पार्ट्स, सपोर्ट इक्विपमेंट, तकनीकी मार्गदर्शन, मरम्मत सेवाएँ और मेंटेनेंस सभी शामिल हैं.
Another milestone in the #USIndiaDefense partnership! Today our countries signed a follow-on support and sustainment deal for India’s MH-60R maritime helicopters that strengthens the operational readiness of India’s fleet and ensures continued interoperability and collaboration… pic.twitter.com/TQeOjjZ2Fj
— U.S. Embassy India (@USAndIndia) November 28, 2025
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अमेरिका भारत में ही मध्यम स्तर की मरम्मत (इंटरमीडिएट रिपेयर) और पीरियडिक मेंटेनेंस इंस्पेक्शन सुविधाओं की स्थापना करेगा. इससे न केवल हेलीकॉप्टरों की सर्विसिंग की प्रक्रिया तेज होगी बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा. आने वाले वर्षों में इससे भारतीय MSMEs और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी अन्य कंपनियों को स्वदेशी उत्पादों के निर्माण का मौका मिलेगा.
नौसैनिक अभियानों की क्षमता में जोरदार सुधार
एमएच-60आर को भारतीय नौसेना का ‘गेम चेंजर’ कहें तो गलत नहीं होगा. यह हेलीकॉप्टर समुद्री अभियानों के लिए डिजाइन किए गए दुनिया के सबसे उन्नत प्लेटफॉर्म्स में से एक है. अत्याधुनिक सेंसर, मिशन सिस्टम, हथियारों और मल्टी-मिशन क्षमताओं के चलते यह हेलीकॉप्टर दुश्मन की पनडुब्बियों, सतह पर मौजूद खतरों और अन्य समुद्री चुनौतियों का तेजी से सामना कर सकता है.
रखरखाव समझौता नौसेना को इन हेलीकॉप्टरों को जहाजों और तटीय बेसों दोनों से आसानी से ऑपरेट करने की सुविधा देगा. इससे उनकी उपलब्धता बढ़ेगी और हर परिस्थिति में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सकेगा.
सीहॉक: नौसेना के लिए क्यों खास हैं ये हेलीकॉप्टर
एमएच-60आर एक मल्टी-रोल, सभी मौसमों में ऑपरेट करने वाला मिशन हेलीकॉप्टर है. दुनिया की अग्रणी नौसेनाएँ इसे समुद्री निगरानी और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए सबसे भरोसेमंद हथियार मानती हैं.
भारतीय नौसेना पहले ही आईएनएस विक्रांत जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर पर सीहॉक हेलीकॉप्टरों की सफल लैंडिंग कराकर इसकी क्षमता को परख चुकी है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों और चीनी पनडुब्बियों की बढ़ती मौजूदगी के बीच यह हेलीकॉप्टर भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
हेलीकॉप्टर की विशेषताएँ
सीहॉक हेलीकॉप्टर को समुद्री वातावरण के लिए आदर्श माना जाता है. लगभग 834 किलोमीटर की मारक क्षमता और उन्नत एवियोनिक्स के साथ यह एक बहु-उद्देश्यीय प्लेटफॉर्म है. इसे आधुनिक मिशनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.
इसमें लगे अत्याधुनिक राडार, नाइट विजन सिस्टम, हेलिफायर मिसाइलें, टॉरपीडो, और रॉकेट सिस्टम इसे एंटी-सबमरीन ऑपरेशन में बेहद घातक बना देते हैं. चीनी पनडुब्बियों का ट्रैकिंग और निष्प्रभावी करने में इसकी दक्षता भारतीय समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.
भारत की नौसैनिक तैयारी को मिलेगा मजबूत आधार
भारत ने 2020 में अमेरिका से 24 एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों की खरीद लगभग 15,000 करोड़ रुपये में की थी. अब सस्टेनमेंट सपोर्ट एग्रीमेंट के लागू होने से यह सुनिश्चित हो जाएगा कि ये हेलीकॉप्टर आने वाले वर्षों तक उच्च स्तरीय तकनीकी सहायता के साथ अपने मिशन जारी रख सकें. यह कदम न केवल भारतीय नौसेना को मजबूत करेगा बल्कि समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और हिंद-प्रशांत रणनीति को भी मजबूती प्रदान करेगा.
यह भी पढे़ं- पंजाब कैबिनेट का बड़ा फैसला, 12 प्रमुख कैटेगरी के 300 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की लिस्टिंग को मिली मंजूरी