Jainendra Kumar Nigam Success Story: कुछ साल पहले जैनेंद्र कुमार निगम के हाथों में हथकड़ियां थीं, जेल की चारदीवारी के अंदर दिन रात काट रहे थे और भविष्य के बारे में कोई स्पष्ट उम्मीद नहीं थी. लेकिन उनकी कहानी एक अलग ही मोड़ पर गई. आज वह DSP (डिप्टी सुपरडेंट ऑफ पुलिस) बन चुके हैं. यह उनकी संघर्षों, मुश्किलों और अपार मेहनत की कहानी है, जो हर युवा के लिए प्रेरणा से भरपूर है. आइए जानते हैं कि जैनेंद्र ने कैसे अपनी मंजिल को हासिल किया.
साधारण परिवार से DSP बनने तक का सफर
भिंड जिले के डोगरपुरा गांव में किसान के घर जन्मे जैनेंद्र कुमार निगम का जीवन शुरू से ही संघर्षपूर्ण रहा. उनके पिता, केशव जाटव, खेती करते थे और मां कुसुम देवी घर का काम संभालती थीं. जैनेंद्र की शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से हुई, जहां से उन्होंने अपनी पढ़ाई की शुरुआत की. पढ़ाई के दौरान वह बिना किसी कोचिंग के, अपने कमरे में 7 से 8 घंटे लगातार पढ़ाई करते थे. जैनेंद्र की मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि वह तीसरे प्रयास में MPPSC की परीक्षा पास कर DSP बने.
दूसरी सरकारी नौकरियों की राह में रुकावटें
जैनेंद्र का जीवन मुश्किलों से भरा था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. वे पहले राज्य सेवा परीक्षा-2020 में नायब तहसीलदार के रूप में चयनित हुए थे, लेकिन बाद में उन्होंने इस पद को जॉइन नहीं किया. इसके बाद वन सेवा परीक्षा में भी रेंजर के पद पर चयनित हुए, लेकिन फिर भी जॉइन नहीं किया. हालांकि, उनका सपना हमेशा यही था कि वह एक दिन पुलिस विभाग में DSP बनें, और उन्होंने उसी दिशा में पूरी मेहनत से काम किया.
पिता के सपने को पूरा करने का संकल्प
जैनेंद्र के पिता केशव जाटव का सपना था कि उनका बेटा DSP बने, लेकिन खुद वे कई बार गांव के दबंगों द्वारा दर्ज किए गए मुकदमों में उलझे रहे. पिता का यह सपना कभी पूरा नहीं हो सका, लेकिन जैनेंद्र ने उसे अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया. 2015 में पुलिस आरक्षक की परीक्षा पास की, लेकिन पिता के कहने पर उन्होंने उस नौकरी को छोड़ दिया और DSP बनने की राह पर आगे बढ़े.
कई बार जाना पड़ा जेल
जैनेंद्र की कहानी सिर्फ संघर्षों और सपनों की नहीं, बल्कि कठिनाइयों और बुरी स्थिति का भी सामना करने की है. 2019 और 2020 के बीच उन्होंने कई बार झूठे आरोपों का सामना किया. एक बार तो परिवार के खिलाफ फर्जी FIR दर्ज करके उन्हें और उनके पिता को जेल भेज दिया गया. जैनेंद्र की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें उनके हाथों में हथकड़ी लगी हुई थी. लेकिन इन सबके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को साबित किया.
भारत यात्रा से लेकर संघर्ष की दूसरी लहर तक
जेल से बाहर आने के बाद जैनेंद्र ने खुद को एक नया रास्ता दिखाने के लिए पैदल भारत यात्रा शुरू की, जो उन्हें जम्मू कश्मीर तक ले गई. हालांकि, कोरोना लॉकडाउन के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा. इसके बाद, उनके परिवार पर एक और जानलेवा हमला हुआ, और एक बार फिर से उनके खिलाफ फर्जी FIR दर्ज कर दी गई. लेकिन इन सब मुश्किलों के बावजूद जैनेंद्र ने न केवल इन आरोपों को खत्म किया, बल्कि तीन सरकारी नौकरियां भी हासिल की.
“पापा, आपका बेटा DSP बन गया है”
आखिरकार, नवंबर 2022 में MPPSC का परिणाम आया, और जैनेंद्र का नाम DSP के तौर पर सामने आया. यह पल उनके लिए बहुत खास था, और उन्होंने फोन पर अपने पिता को यह खुशी की खबर दी, “पापा, आपका बेटा DSP बन गया है.” यह सुनकर उनके पिता केशव की आंखों में आंसू आ गए. वह अपनी मेहनत और बेटे की सफलता को देख कर भावुक हो गए.
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