West Bengal Election: पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले मतगणना पर्यवेक्षकों की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने स्पष्ट किया कि मतगणना प्रक्रिया के लिए अधिकारियों की नियुक्ति करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है और इसमें किसी तरह की दखलंदाजी नहीं की जा सकती.
TMC ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और आरोप लगाया था कि केवल केंद्रीय सरकारी अधिकारियों को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया जाना उचित नहीं है. पार्टी का कहना था कि इससे प्रक्रिया में संतुलन और निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है.
कपिल सिब्बल की दलीलें
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने TMC की ओर से कई तर्क रखे. उन्होंने कहा कि इस मामले में चार प्रमुख मुद्दे हैं. उनके अनुसार, डिप्टी इलेक्शन ऑफिसर (DEO) को नोटिस 13 अप्रैल को जारी किया गया था, लेकिन इसकी जानकारी पार्टी को 29 अप्रैल को मिली.
सिब्बल ने यह भी आशंका जताई कि हर बूथ पर गड़बड़ी की संभावना हो सकती है और यह भी सवाल उठाया कि इस तरह की व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ी.
उन्होंने तीसरे मुद्दे के रूप में कहा कि पहले से ही प्रत्येक बैठक में एक केंद्रीय सरकारी अधिकारी मौजूद होता है, जो माइक्रो ऑब्जर्वर की भूमिका निभाता है. ऐसे में एक और केंद्रीय अधिकारी की आवश्यकता क्यों है.
इसके अलावा, उन्होंने चौथा मुद्दा उठाते हुए कहा कि आयोग के परिपत्र में राज्य सरकार के अधिकारी की भी बात कही गई है, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया में राज्य सरकार द्वारा नामित किसी अधिकारी को शामिल नहीं किया गया है.
कोर्ट में क्या हुआ सवाल-जवाब
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग के बयान में संभावित अनियमितताओं की बात कही गई है, लेकिन इसके पीछे कोई ठोस आंकड़ा या आधार नहीं दिया गया है. उन्होंने यह भी पूछा कि केंद्र सरकार के अधिकारियों को ही क्यों नियुक्त किया जा रहा है और राज्य सरकार के प्रतिनिधित्व को क्यों नजरअंदाज किया गया है.
इस पर न्यायमूर्ति बागची ने सवाल उठाया कि राजनीतिक दलों की सहमति का मुद्दा यहां कहां से आता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि नियमों के अनुसार केंद्रीय या राज्य सरकार के अधिकारियों की नियुक्ति संभव है और केवल एक ही श्रेणी से चयन को गलत नहीं माना जा सकता.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सरकारी कर्मचारी एक ही व्यवस्था का हिस्सा हैं और उन्हें अलग-अलग मानकर देखना सही नहीं है.
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