ढाका में बढ़ता तनाव! शेख हसीना के बयान पर लगा प्रतिबंध, मीडिया को मिली कड़ी चेतावनी

बांग्लादेश इन दिनों गहरे राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद देशभर में माहौल तनावपूर्ण हो गया है.

Bangladesh Sheikh Hasina Interim Government National Cyber Security Agency
Image Source: Social Media

बांग्लादेश इन दिनों गहरे राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद देशभर में माहौल तनावपूर्ण हो गया है. इसी बीच अंतरिम सरकार ने एक ऐसा आदेश जारी किया है जिसने पूरे मीडिया जगत को हिलाकर रख दिया है. सरकार ने सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कड़ी चेतावनी दी है कि वे शेख हसीना से जुड़े किसी भी बयान को प्रकाशित या प्रसारित न करें.


अंतरिम सरकार के मुताबिक, शेख हसीना के किसी भी संदेश या अपील से देश की सुरक्षा और शांति व्यवस्था को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. नेशनल साइबर सिक्योरिटी एजेंसी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए दावा किया कि हसीना के बयानों में ऐसे तत्व हो सकते हैं जो जनता को हिंसा, अव्यवस्था और आपराधिक गतिविधियों के लिए उकसाएँ. इसी आधार पर मीडिया संस्थानों को सलाह दी गई है कि वे जिम्मेदारी से काम करें और किसी भी ऐसे कंटेंट को प्रकाशित न करें जिससे हालात बिगड़ें.

राजधानी ढाका में हिंसा और बढ़ता तनाव

मौत की सजा के फैसले के बाद से ही ढाका और कई अन्य जिलों में विरोध और झड़पों की खबरें सामने आ रही हैं. सोमवार की रात राजधानी में भारी तनाव देखा गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई झड़प में दो लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं. पुलिस और सुरक्षाबल लगातार हालात को नियंत्रित करने की कोशिश में जुटे हैं.

दोषी और फरार घोषित व्यक्तियों के बयान प्रसारण पर रोक

NCSA का कहना है कि जिन लोगों को अदालत दोषी ठहरा चुकी है या फरार घोषित कर चुकी है, उनके बयानों को मीडिया में स्थान देना साइबर सिक्योरिटी ऑर्डिनेंस के खिलाफ है. एजेंसी ने यह भी चेतावनी दी कि प्रशासन किसी भी ऐसे कंटेंट को ब्लॉक या हटाने का अधिकार रखता है जो राष्ट्रीय अखंडता, सार्वजनिक व्यवस्था या सामाजिक सौहार्द को नुक़सान पहुँचा सकता है.इसके अलावा, नकली पहचान बनाकर नफरत फैलाने या हिंसा भड़काने पर दो वर्ष तक जेल और 10 लाख टका तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है.

शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री दोनों को मौत की सजा

78 वर्षीय शेख हसीना को छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं और मौतों के लिए दोषी ठहराते हुए ट्रिब्यूनल ने अनुपस्थिति में ही फांसी की सजा सुनाई है. इसी मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी मौत की सजा दी गई.गौरतलब है कि 5 अगस्त को हिंसा बढ़ने पर हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं, जिसके बाद अदालत उन्हें फरार घोषित कर चुकी है.

यूनुस सरकार का रुख और हसीना का पलटवार

मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह सिद्धांत स्थापित करता है. कानून के आगे कोई भी बड़ा नहीं है.वहीं, दूसरी ओर शेख हसीना ने फैसले को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है. उन्होंने ट्रिब्यूनल को “फर्जी” बताते हुए कहा कि यह फैसला उस सरकार ने दिलवाया है जिसे जनता का जनादेश प्राप्त नहीं है.

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