कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते यूनुस! क्या सत्ता में बने रहने का मोहम्मद यूनुस का नया दांव?

Bangladesh Elections: बांग्लादेश में लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने देश के आम चुनावों को लेकर बड़ा ऐलान किया है.

Bangladesh Election Annoucment Muhammad Yunus amid pressure
कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते यूनुस! क्या सत्ता में बने रहने का मोहम्मद यूनुस का नया दांव?

Bangladesh Elections: बांग्लादेश में लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने देश के आम चुनावों को लेकर बड़ा ऐलान किया है. शुक्रवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में यूनुस ने कहा कि आम चुनाव अप्रैल 2026 के पहले पखवाड़े में कराए जाएंगे. हालांकि, उन्होंने न तो कोई निश्चित तारीख बताई और न ही चुनावी प्रक्रिया को लेकर कोई विस्तृत योजना साझा की, जिससे राजनीतिक हलकों में संशय की स्थिति बन गई है.

विपक्ष की मांग: दिसंबर में चुनाव कराए जाएं

यूनुस के इस एलान पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) समेत विपक्षी दलों ने नाराज़गी जताई है. बीएनपी और बांग्लादेश की कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है कि चुनाव दिसंबर 2025 से पहले किसी भी कीमत पर कराए जाने चाहिए. इन पार्टियों का मानना है कि चुनावों को टालना लोकतंत्र के खिलाफ है.  वहीं, नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP)  जो छात्र नेताओं द्वारा संचालित है, ने यूनुस की घोषणा का समर्थन किया है, लेकिन उसके बदले जुलाई चार्टर और प्रशासनिक सुधारों को तत्काल लागू करने की मांग की है. इस बीच, कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी भी एनसीपी की मांग के साथ खड़ा नजर आ रहा है.

निष्पक्ष चुनाव को लेकर जताई जा रही चिंता

राजनीतिक पर्यवेक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यूनुस सरकार की चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. ढाका के सामाजिक कार्यकर्ता रेजाउर रहमान के अनुसार, मौजूदा कानून, राजनीतिक ध्रुवीकरण और प्रशासनिक अनिश्चितता ऐसी स्थिति पैदा कर रहे हैं, जहां निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराना मुश्किल दिखता है.

शेख हसीना के बाद सत्ता में आए यूनुस, अब तक बनी हुई है अस्थिरता

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के अगस्त 2024 में पद छोड़ने के बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली थी. उन्होंने शुरुआती दौर में यह संकेत दिए थे कि दिसंबर 2025 से जून 2026 के बीच कभी भी चुनाव कराए जा सकते हैं. हालांकि अब अप्रैल 2026 की घोषणा को कुछ विपक्षी दल सत्ता में बने रहने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं.

एनसीपी और यूनुस की समीपता पर बीएनपी का शक

बीएनपी का मानना है कि यूनुस और एनसीपी के बीच एक "गोपनीय गठबंधन" काम कर रहा है. चूंकि यूनुस की कैबिनेट में एनसीपी से जुड़े छात्र सलाहकार शामिल हैं, इसलिए बीएनपी इन छात्रों के इस्तीफे की मांग कर रही है. उनका आरोप है कि प्रशासन पर एनसीपी का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है.

सेना प्रमुख की दखलअंदाज़ी से बदले समीकरण

सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने हाल ही में बयान दिया था कि देश के नीति-निर्धारण का अधिकार सिर्फ एक चुनी हुई सरकार को होना चाहिए. उन्होंने चुनाव को दिसंबर तक कराने की सिफारिश की थी. सेना के इस रुख के बाद यूनुस ने इस्तीफे की धमकी देकर राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया था. हालांकि बाद में बातचीत के जरिए उन्हें पद पर बने रहने के लिए मना लिया गया.

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