एक मछली के लिए बांग्‍लादेश ने तैनात किए कई युद्धपोत, हिल्‍सा के लिए भारत के साथ क्‍यों होता है तनाव?

बांग्लादेश सरकार ने देश की सबसे कीमती मछली हिल्सा (या इलिश) की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है.

Bangladesh deployed warships in the sea for Hilsa fish
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

ढाका/कोलकाता: बांग्लादेश सरकार ने देश की सबसे कीमती मछली हिल्सा (या इलिश) की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. देश के समुद्री क्षेत्र में 17 युद्धपोतों और गश्ती हेलीकॉप्टरों को तैनात किया गया है, ताकि इस मछली को प्रजनन के समय अवैध रूप से पकड़े जाने से रोका जा सके. यह कदम तब उठाया गया है जब सरकार ने 4 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक हिल्सा मछली पकड़ने पर सख्त प्रतिबंध लगाया है.

हिल्सा मछली केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल दोनों में सांस्कृतिक और भावनात्मक रूप से गहराई से जुड़ी हुई है. इसे 'मछलियों की रानी' कहा जाता है और बांग्लादेश ने इसे अपनी राष्ट्रीय मछली का दर्जा दिया है. यह मछली बंगाल की खाड़ी से हर साल अंडे देने के लिए नदियों में आती है, विशेषकर पद्मा, मेघना और गंगा जैसी नदियों में.

भारतीय बाजार में हिल्सा की भारी मांग

पश्चिम बंगाल में हिल्सा की डिमांड साल के खास समय, जैसे दुर्गा पूजा और शादियों के दौरान, बेहद बढ़ जाती है. इसका कारण इसकी विशिष्ट स्वाद, महीन हड्डियों और खास पकवानों में इसका इस्तेमाल है. हालांकि यह मछली सीमित समय के लिए ही उपलब्ध होती है, जिससे इसकी कीमत भी बढ़ जाती है.

बांग्लादेश का हिल्सा पर वैश्विक प्रभुत्व

बांग्लादेश दुनिया भर में हिल्सा मछली का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है. वैश्विक हिल्सा उत्पादन में बांग्लादेश की हिस्सेदारी करीब 70% है. हर साल देश में लगभग 5.5 से 6 लाख टन हिल्सा पकड़ी जाती है, जिससे करीब 5 लाख मछुआरों को रोज़गार मिलता है और 20 लाख लोगों का आजीविका इस पर निर्भर करती है. मछली उत्पादन में हिल्सा की हिस्सेदारी 12% तक है.

महंगाई और जलवायु परिवर्तन की दोहरी मार

हिल्सा की बढ़ती मांग और अत्यधिक मछली पकड़ने के कारण इसके प्रजनन चक्र में बाधा आ रही है. जलवायु परिवर्तन, समुद्री जलस्तर में वृद्धि और डेल्टा क्षेत्रों में पारिस्थितिक असंतुलन ने हिल्सा की संख्या को प्रभावित किया है. समुद्र के बढ़ते तापमान और प्रदूषण के कारण यह मछली अब कम दिखाई देती है.

हिल्सा की बढ़ती कीमत (जो कभी-कभी 2200 टका प्रति किलो तक पहुंच जाती है) ने इसे आम बांग्लादेशी लोगों की पहुंच से दूर कर दिया है. ऐसे में सरकार को इसका निर्यात नियंत्रित करने और स्थानीय स्तर पर आपूर्ति बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने पड़े हैं.

प्रजनन काल में मछली पकड़ना प्रतिबंधित

बांग्लादेश सरकार हर साल प्रजनन काल में हिल्सा पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाती है, ताकि मछली की संख्या को स्थिर रखा जा सके. इस वर्ष यह प्रतिबंध 4 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक लागू है. इस दौरान मछुआरों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए सरकार उन्हें प्रति परिवार 25 किलो चावल भी दे रही है.

सैन्य स्तर पर सुरक्षा: पहली बार इतनी बड़ी तैनाती

इस साल हिल्सा की सुरक्षा के लिए बांग्लादेश नौसेना ने विशेष अभियान चलाया है. सेना की मीडिया शाखा ISPR के मुताबिक, 17 युद्धपोत और गश्ती हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं ताकि समुद्र में अवैध मछली पकड़ने वालों को रोका जा सके. इससे साफ है कि सरकार हिल्सा को लेकर कितनी गंभीर है.

भारत-बांग्लादेश के बीच हिल्सा को लेकर तनाव

हिल्सा मछली ने कभी-कभी भारत और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक रिश्तों को भी प्रभावित किया है. वर्ष 2012 से 2018 के बीच बांग्लादेश ने भारत को हिल्सा का निर्यात रोक दिया था. यह निर्णय तीस्ता नदी जल समझौते पर गतिरोध के बाद लिया गया था. इस फैसले का असर पश्चिम बंगाल में खासा देखा गया था, जहां दुर्गा पूजा के दौरान हिल्सा की मांग अपने चरम पर होती है.

2022 और 2023 में भी ऐसे प्रतिबंध देखने को मिले, जब बांग्लादेश में सरकार में अस्थिरता और राजनीतिक तनाव के चलते भारत को मछली भेजने पर रोक लगी थी. इससे यह साफ होता है कि हिल्सा अब सिर्फ एक मछली नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक हथियार बन चुकी है.

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