इस्लामाबाद/न्यूयॉर्क: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत के खिलाफ आक्रामक भाषण देकर अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल एक बार फिर राजनीतिक प्रोपेगेंडा के रूप में किया. हालांकि इस बार, उनकी आलोचना केवल भारत से ही नहीं बल्कि पाकिस्तान के भीतर से भी हुई है. बलूचिस्तान के वरिष्ठ नेताओं ने शरीफ की टिप्पणी को दोहरे मापदंड (Double Standards) करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र से मांग की है कि पाकिस्तान को इसकी सदस्यता से बाहर किया जाए, क्योंकि यह देश खुद आतंकवाद का संरक्षक और प्रसारक रहा है.
बलूच नेता मीर यार बलूच ने किया खुला विरोध
बलूच आंदोलन के प्रमुख नेता मीर यार बलूच ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की UNGA में की गई टिप्पणियों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र के मंच का दुरुपयोग किया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा अपने पंजाब-प्रधान सत्ता ढांचे के ज़रिए न केवल पड़ोसी देशों के खिलाफ साज़िशें रची हैं, बल्कि बलूचिस्तान जैसे स्वायत्त क्षेत्र पर भी जबरन कब्जा किया है, जो पहले एक स्वतंत्र गणराज्य था.
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का दिखावा
मीर यार बलूच ने कहा कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को आतंकवाद के खिलाफ योद्धा दिखाने का हर संभव प्रयास किया है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल विपरीत है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी ISI लंबे समय से आईएसआईएस (ISIS), अल-कायदा और अन्य चरमपंथी संगठनों को पनाह देती रही है. उनके मुताबिक पाकिस्तान न सिर्फ इन संगठनों को प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता देता है, बल्कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण भी प्रदान करता है.
शहबाज शरीफ एक कठपुतली प्रधानमंत्री हैं- बलूच नेता
बलूच नेता ने शहबाज शरीफ को "कठपुतली प्रधानमंत्री" की उपाधि दी और कहा कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में बलूचिस्तान की वास्तविक स्थिति को छिपाने की कोशिश की. उन्होंने सवाल उठाया कि जिस देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तक नहीं है, वह कैसे दुनिया को शांति और न्याय का पाठ पढ़ा सकता है?
बलूचिस्तान में अगस्त 2025 के पूरे महीने इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया था, जिससे करीब 6 करोड़ बलूच लोग दुनिया से पूरी तरह कट गए. उन्होंने कहा कि बलूच नागरिकों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने तक की अनुमति नहीं है.
मानवाधिकार हनन के गंभीर आरोप
बलूच नेता के अनुसार, पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान में युद्ध अपराध कर रही है:
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से यह मांग की कि बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, और जिम्मेदारों को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में लाया जाए.
भारत पर हमलों में पाकिस्तान की भूमिका
शहबाज शरीफ ने अपने UNGA भाषण में भारत पर आतंकी ठिकानों पर हमले करने का आरोप लगाया था, लेकिन मीर यार बलूच ने इसके जवाब में कहा कि पाकिस्तान खुद इन हमलों का मुख्य स्रोत है.
उन्होंने कहा कि भारत द्वारा हाल में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए आतंकी पाकिस्तानी नागरिक ही थे, जो जेहादी संगठनों से जुड़े थे. विशेष रूप से पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए मीर यार ने दावा किया कि यह हमला पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के भड़काऊ भाषण के ठीक बाद हुआ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान ने ही इस हमले को प्रायोजित किया.
पाकिस्तान आतंकवाद का जनक है, पीड़ित नहीं
बलूच नेता ने पाकिस्तान की कथनी और करनी पर सवाल उठाते हुए कहा, "पाकिस्तान न तो कभी आतंकवाद का शिकार रहा है, न ही उससे लड़ा है. बल्कि यह आतंकवादियों की माँ है."
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने सालों तक ओसामा बिन लादेन जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी को छुपाकर रखा और उसे खुफिया एजेंसी ISI के "गेस्ट हाउस" में सुरक्षा प्रदान की. इससे पाकिस्तान की आतंकी संगठनों के साथ सांठगांठ साबित होती है.
बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते
मीर यार बलूच ने बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हजारों वर्षों पुराने जातीय और सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान इस क्षेत्र में सांस्कृतिक आक्रमण कर रहा है. उन्होंने दावा किया कि इस्लामाबाद न केवल बलूचों की पहचान और संस्कृति मिटाने पर तुला है, बल्कि अफगान सीमा तक अपने सामरिक और आतंकी नेटवर्क का विस्तार कर रहा है.
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