अयोध्या, भारत 24 डिजिटल डेस्क: इस समय पूरी दुनिया की नजर अयोध्या पर ही टिकी हुई है. 22 जनवरी 2024 के दिन अयोध्या राम मंदिर (Ram Mandir Ayodhya) में भगवान राम की प्रतीमा की प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है. राम मंदिर न सिर्फ भव्यता बल्कि तकनीक के मामले में भी अव्वल है. मंदिर निर्माण की कार्यदायी संस्था के इंजीनियरों का दावा है कि 8.0 रिक्टर की तीव्रता वाले भूकंप भी आ जाए तब भी मंदर सुरक्षित रहेगा. इसके चलते राम मंदिर कम से कम एक हजार साल तक अक्षुण्ण रहेगा.
प्राकृतिक आपदाओं से कैसे बचेगा मंदिर?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का भी कहना है कि भूकंप आ जाए तो राम मंदिर पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. दरअसल प्राकृतिक आपदाओं से मंदिर को बचाने के लिए विशिष्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसकी नींव में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है कि ये 1000 साल तक खड़ा रहेगा. वहीं, सरयू की जलधारा से सुरक्षित रखने के लिए मंदिर के चारों तरफ रिटेनिंग वॉल बनाई गई है.
इन संस्थानों की तकनीक से बना मंदिर
राम मंदिर को बनाने में सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टिट्यूशन रुड़की और जियोफिजिकल स्टडी रिसर्च लैब हैदराबाद के इंजीनियर्स ने काफी मदद की है. मंदिर में लगने वाले ग्रेनाइट पत्थरों को अच्छी तरह फिट करने के लिए इनमें होल्स बनाए गए हैं. इसका सुझाव CBRI रुड़की और हैदराबाद के इंजीनियरों ने दिया है. वहीं, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने अवध विश्वविद्यालय में जियो स्टेशन स्थापित किया है. इस टेक्नोलॉजी के जरिए 24 घंटे पहले ही भूंकप आने की सूचना मिल जाएगी.
500 KM इलाके में हुई भूकंप की स्टडी
राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्रा के मुताबिक, भूकंप में भी मंदिर को कुछ ना हो इसके लिए नेपाल से लेकर 500 किलोमीटर दूर तक भूकंप की पूरी स्टडी की गई. इस दौरान रिक्टर स्केल पर मिनिमम और मैक्सिमम तीव्रता को बारीकी से जांचा गया. मंदिर को इस तरह तैयार किया गया है कि ये रिक्टर स्केल पर भूकंप की दोगुनी तीव्रता को भी आसानी से झेल सके.